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Bilaspur News: नप अध्यक्ष कमलेंद्र कश्यप ने दिया पद से इस्तीफा
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-बोले, नेताओं के रिश्तेदार पार्षदों पर उन्हें हटाने का बना रहे दबाव
-आत्मसम्मान को पहुंची ठेस, किसी के हटाने से पहले स्वयं हटना मंजूर
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। नगर परिषद बिलासपुर में अविश्वास प्रस्ताव आने से पहले अध्यक्ष कमलेंद्र कश्यप ने सोमवार को अपने पद से इस्तीफा दे दिया। कमलेंद्र ने कहा कि नगर परिषद में नेताओं के रिश्तेदार पार्षदों पर उन्हें हटाने का दबाव बना रहे हैं। इससे उनके आत्मसम्मान को ठेस पहुंची है। इसलिए उन्हें कोई हटाए इससे पहले वह स्वयं पद से हटना मंजूर करेंगे।
कमलेंद्र ने कहा कि शहर में लोगों ने उन्हें जो जिम्मेदारी दी है, उन्होंने ईमानदारी से उसे निभाया है। वह अपने किए कार्यों से संतुष्ट हैं। उन्होंने कहा कि पहले भी ऐसे ही कारणों के चलते उन्होंने कांग्रेस छोड़ कर भाजपा का दामन थामा था। उस समय भी जब उन्होंने अध्यक्ष पद से इस्तीफा देना चाहा तो उनके साथ शरारत की गई। आज फिर से वह घटनाक्रम हुआ है। कमलेंद्र ने कहा कि उन्हें किसी पद का लालच नहीं है। जो भी उनकी नैतिक और सामाजिक जिम्मेदारी है, उसका निर्वहन वह करते रहेंगे। उन्होंने कहा कि छह बार वह चुन कर आए और दो बार नप अध्यक्ष बने। शहरवासियों ने उन्हें जो समर्थन दिया उसके वह सदैव ऋणी रहेंगे। कहा कि उन्होंने अपने स्तर पर शहर के विकास के लिए हरसंभव प्रयास किए, लेकिन कुछ शक्तियां प्रशासनिक अधिकारियों के हाथ में ही हैं, इस कारण भी उन्हें कार्य करने में समस्याएं झेलनी पड़ती हैं। हिमाचल प्रदेश एकमात्र ऐसा राज्य है, जहां नप के पास सीमित शक्तियां हैं। उन्होंने कहा कि बीबीएमबी से उन्होंने शहर के विकास के लिए लड़ाई लड़ी है। इस शहर को बसाने के लिए बीबीएमबी को प्रयास करने चाहिए थे, लेकिन बीबीएमबी का योगदान शून्य रहा। बिलासपुर शहर जिस तरीके से बसाया जाना चाहिए था, उस तरीके से नहीं बसाया गया। साथ ही उन्होंने कहा कि नप में कर्मचारियों के आधे पद रिक्त चल रहे हैं। इस कारण में शहर की जो व्यवस्थाएं हैं, वह प्रभावित होती हैं।
इनसेट
नए अध्यक्ष पद के लिए नेताओं के रिश्तेदारों का करेंगे विरोध
नगर परिषद बिलासपुर में कुल 11 पार्षद हैं। इसमें छह पार्षद भाजपा समर्थित हैं। कमलेंद्र कश्यप ने दिसंबर 2020 में भाजपा का दामन थामा। इसके बाद उन्हें नगर परिषद अध्यक्ष भी चुना गया। प्रदेश में सरकार बदलने के बाद कमलेंद्र अक्तूबर 2023 में फिर से कांग्रेस में शामिल हो गए। इसके बाद भाजपा समर्थित पार्षद अविश्वास प्रस्ताव लाने की तैयारी में थे। इससे पहले ही उन्होंने इस्तीफा दे दिया। कमलेंद्र ने कहा कि नप में पांच पार्षद ऐसे हैं, जो दूसरी बार चुनकर आए हैं। नए अध्यक्ष के चुनाव में वह ऐसे पार्षदों का विरोध करेंगे जो नेताओं के रिश्तेदार हैं। उन्होंने कहा कि वह राजनीति से ऊपर उठकर अध्यक्ष पद के लिए केवल उसी का समर्थन करेंगे जो नेताओं के इशारे पर आगे नहीं आया होगा।
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-आत्मसम्मान को पहुंची ठेस, किसी के हटाने से पहले स्वयं हटना मंजूर
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। नगर परिषद बिलासपुर में अविश्वास प्रस्ताव आने से पहले अध्यक्ष कमलेंद्र कश्यप ने सोमवार को अपने पद से इस्तीफा दे दिया। कमलेंद्र ने कहा कि नगर परिषद में नेताओं के रिश्तेदार पार्षदों पर उन्हें हटाने का दबाव बना रहे हैं। इससे उनके आत्मसम्मान को ठेस पहुंची है। इसलिए उन्हें कोई हटाए इससे पहले वह स्वयं पद से हटना मंजूर करेंगे।
कमलेंद्र ने कहा कि शहर में लोगों ने उन्हें जो जिम्मेदारी दी है, उन्होंने ईमानदारी से उसे निभाया है। वह अपने किए कार्यों से संतुष्ट हैं। उन्होंने कहा कि पहले भी ऐसे ही कारणों के चलते उन्होंने कांग्रेस छोड़ कर भाजपा का दामन थामा था। उस समय भी जब उन्होंने अध्यक्ष पद से इस्तीफा देना चाहा तो उनके साथ शरारत की गई। आज फिर से वह घटनाक्रम हुआ है। कमलेंद्र ने कहा कि उन्हें किसी पद का लालच नहीं है। जो भी उनकी नैतिक और सामाजिक जिम्मेदारी है, उसका निर्वहन वह करते रहेंगे। उन्होंने कहा कि छह बार वह चुन कर आए और दो बार नप अध्यक्ष बने। शहरवासियों ने उन्हें जो समर्थन दिया उसके वह सदैव ऋणी रहेंगे। कहा कि उन्होंने अपने स्तर पर शहर के विकास के लिए हरसंभव प्रयास किए, लेकिन कुछ शक्तियां प्रशासनिक अधिकारियों के हाथ में ही हैं, इस कारण भी उन्हें कार्य करने में समस्याएं झेलनी पड़ती हैं। हिमाचल प्रदेश एकमात्र ऐसा राज्य है, जहां नप के पास सीमित शक्तियां हैं। उन्होंने कहा कि बीबीएमबी से उन्होंने शहर के विकास के लिए लड़ाई लड़ी है। इस शहर को बसाने के लिए बीबीएमबी को प्रयास करने चाहिए थे, लेकिन बीबीएमबी का योगदान शून्य रहा। बिलासपुर शहर जिस तरीके से बसाया जाना चाहिए था, उस तरीके से नहीं बसाया गया। साथ ही उन्होंने कहा कि नप में कर्मचारियों के आधे पद रिक्त चल रहे हैं। इस कारण में शहर की जो व्यवस्थाएं हैं, वह प्रभावित होती हैं।
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नए अध्यक्ष पद के लिए नेताओं के रिश्तेदारों का करेंगे विरोध
नगर परिषद बिलासपुर में कुल 11 पार्षद हैं। इसमें छह पार्षद भाजपा समर्थित हैं। कमलेंद्र कश्यप ने दिसंबर 2020 में भाजपा का दामन थामा। इसके बाद उन्हें नगर परिषद अध्यक्ष भी चुना गया। प्रदेश में सरकार बदलने के बाद कमलेंद्र अक्तूबर 2023 में फिर से कांग्रेस में शामिल हो गए। इसके बाद भाजपा समर्थित पार्षद अविश्वास प्रस्ताव लाने की तैयारी में थे। इससे पहले ही उन्होंने इस्तीफा दे दिया। कमलेंद्र ने कहा कि नप में पांच पार्षद ऐसे हैं, जो दूसरी बार चुनकर आए हैं। नए अध्यक्ष के चुनाव में वह ऐसे पार्षदों का विरोध करेंगे जो नेताओं के रिश्तेदार हैं। उन्होंने कहा कि वह राजनीति से ऊपर उठकर अध्यक्ष पद के लिए केवल उसी का समर्थन करेंगे जो नेताओं के इशारे पर आगे नहीं आया होगा।
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