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घुमारवीं की दस पंचायतों के 13 गांवों को नहीं छू पाया कोरोना
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घुमारवीं (बिलासपुर)। जहां देश-विदेश में कोरोना महामारी ने हड़कंप मचाया हुआ है, वहीं घुमारवीं उपमंडल में आज भी कुछ ऐसे गांव हैं, जहां आजतक कोरोना का कोई भी मामला दर्ज नहीं हुआ है। यह सब आशा वर्करों, स्वास्थ्य विभाग और लोगों की जागरूकता से ही संभव हो पाया है। उक्त गांव पूरे प्रदेश के लिए मिशाल बने हैं।
इन गांवों के आसपास कई गांव ऐसे हैं जहां पर कोविड ने खूब कहर ढाया है। इसके बावजूद इन गांव में कोविड दस्तक नहीं दे पाया। इसके लिए ग्रामीणों के साथ आशा वर्करों ने भी खूब मेहनत की है। इन गांवों के लोग अन्य लोगों के लिए भी प्रेरणास्रोत हैं। क्योंकि कोरोना बचाव के लिए नियमों की सही ढंग से पालना की जाए तो हर कोई कोरोना को बड़ी आसानी से हरा सकता है। इन गांवों में ग्राम पंचायत भुलस्वाए के गांव बाडी बारन के 49 घर हैं। इसकी आबादी 156 है और इसमें आशा वर्कर उमा देवी दिनरात लोगों को कोविड से बचाव के लिए जागरूक करती हैं। ग्राम पंचायत भराड़ी के गांव घोड़ी द बल में 30 घर हैं। इसकी कुल आबादी 140 है। इस गांव में आशा वर्कर का कार्यभार सुषमा देवी के पास है। ग्राम पंचायत त्यूनखास के गांव सलौन में 31 घर हैं, इसकी आबादी 158 है। इसी पंचायत के गांव मैहरण में 41 घर हैं, आबादी 260 है। इन दोनों गांव में सुमन लता बतौर आशा वर्कर कार्य कर रही हैं। इन गांव में 15 माह में एक भी व्यक्ति कोविड पॉजिटिव नहीं हुआ है।
ग्राम पंचायत कुठेड़ा के गांव भगोट में 52 घर हैं। इसकी आबादी 225 है। गांव में रीता बंसल बतौर आशा वर्कर कार्य कर रही हैं। ग्राम पंचायत घंडालवीं के गांव कोठी में 77 घर हैं, इसकी आबादी 377 है। इसी पंचायत के कामली गांव में 52 घर हैं, जिनकी आबादी 222 है। ग्राम पंचायत मरहाणा के गांव नरलोग में 30 घर हैं और 123 आबादी है। जिसे आशा वर्कर शालू संभाल रही हैं। ग्राम पंचायत बरोटा के गांव करोट में 44 घरों की 228 आबादी है। इसी पंचायत के छत्तर गांव के 40 घरों में 182 की आबादी है। जिसे आशा वर्कर संतोष कुमारी संभालती हैं। ग्राम पंचायत हटवाड़ के गांव देहरा टांडा के 95 घरों की 495 आबादी है। इस गांव का जिम्मा आशा वर्कर संतोष के पास है। इसी तरह तलवाड़ा पंचायत के छाड़ल गांव में 26 घर हैं, जिनकी आबादी 148 है। इस गांव की जिम्मेदारी आशा वर्कर किरण के पास है। वहीं लद्दा पंचायत के गांव भगवाणी में 28 घर हैं और 124 आबादी है। जिसे आशा वर्कर उर्मिला संभाल रही है।
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इन गांवों में लोगों और आशा वर्करों की सूझबूझ से पिछले लगभग 15 महीनों में एक भी कोरोना पॉजिटिव मामला दर्ज नहीं हुआ है। जो जिला बिलासपुर के साथ पूरे हिमाचल प्रदेश के लिए गर्व का विषय है।
इनसेट
घुमारवीं उपमंडल में ऐसे भी गांव हैं जो अन्य गांवों के लोगों के लिए प्रेरणास्रोत हैं। इन गांवों में पिछले 15 महीनों से एक भी पॉजिटिव मामला नहीं आया है। इसमें सबसे बड़ी भूमिका आशा वर्करों ने निभाई है। उनके सहयोग से यह संभव हो पाया है ।
-अभिनीत शर्मा, खंड चिकित्सा अधिकारी, घुमारवीं
इनसेट
स्थानीय प्रशासन के निरंतर प्रयासों से और स्वास्थ्य विभाग के सहयोग से घुमारवीं उपमंडल में ऐसे गांव हैं जहां कोरोना महामारी के दौरान एक भी पॉजिटिव मामला नहीं आया है। यह संभवतया लोगों की जागरूकता से ही हुआ है जो अन्य लोगों के लिए बेहतरीन उदाहरण है।
शशिपाल शर्मा, एसडीएम घुमारवीं
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इन गांवों के आसपास कई गांव ऐसे हैं जहां पर कोविड ने खूब कहर ढाया है। इसके बावजूद इन गांव में कोविड दस्तक नहीं दे पाया। इसके लिए ग्रामीणों के साथ आशा वर्करों ने भी खूब मेहनत की है। इन गांवों के लोग अन्य लोगों के लिए भी प्रेरणास्रोत हैं। क्योंकि कोरोना बचाव के लिए नियमों की सही ढंग से पालना की जाए तो हर कोई कोरोना को बड़ी आसानी से हरा सकता है। इन गांवों में ग्राम पंचायत भुलस्वाए के गांव बाडी बारन के 49 घर हैं। इसकी आबादी 156 है और इसमें आशा वर्कर उमा देवी दिनरात लोगों को कोविड से बचाव के लिए जागरूक करती हैं। ग्राम पंचायत भराड़ी के गांव घोड़ी द बल में 30 घर हैं। इसकी कुल आबादी 140 है। इस गांव में आशा वर्कर का कार्यभार सुषमा देवी के पास है। ग्राम पंचायत त्यूनखास के गांव सलौन में 31 घर हैं, इसकी आबादी 158 है। इसी पंचायत के गांव मैहरण में 41 घर हैं, आबादी 260 है। इन दोनों गांव में सुमन लता बतौर आशा वर्कर कार्य कर रही हैं। इन गांव में 15 माह में एक भी व्यक्ति कोविड पॉजिटिव नहीं हुआ है।
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ग्राम पंचायत कुठेड़ा के गांव भगोट में 52 घर हैं। इसकी आबादी 225 है। गांव में रीता बंसल बतौर आशा वर्कर कार्य कर रही हैं। ग्राम पंचायत घंडालवीं के गांव कोठी में 77 घर हैं, इसकी आबादी 377 है। इसी पंचायत के कामली गांव में 52 घर हैं, जिनकी आबादी 222 है। ग्राम पंचायत मरहाणा के गांव नरलोग में 30 घर हैं और 123 आबादी है। जिसे आशा वर्कर शालू संभाल रही हैं। ग्राम पंचायत बरोटा के गांव करोट में 44 घरों की 228 आबादी है। इसी पंचायत के छत्तर गांव के 40 घरों में 182 की आबादी है। जिसे आशा वर्कर संतोष कुमारी संभालती हैं। ग्राम पंचायत हटवाड़ के गांव देहरा टांडा के 95 घरों की 495 आबादी है। इस गांव का जिम्मा आशा वर्कर संतोष के पास है। इसी तरह तलवाड़ा पंचायत के छाड़ल गांव में 26 घर हैं, जिनकी आबादी 148 है। इस गांव की जिम्मेदारी आशा वर्कर किरण के पास है। वहीं लद्दा पंचायत के गांव भगवाणी में 28 घर हैं और 124 आबादी है। जिसे आशा वर्कर उर्मिला संभाल रही है।
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इन गांवों में लोगों और आशा वर्करों की सूझबूझ से पिछले लगभग 15 महीनों में एक भी कोरोना पॉजिटिव मामला दर्ज नहीं हुआ है। जो जिला बिलासपुर के साथ पूरे हिमाचल प्रदेश के लिए गर्व का विषय है।
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घुमारवीं उपमंडल में ऐसे भी गांव हैं जो अन्य गांवों के लोगों के लिए प्रेरणास्रोत हैं। इन गांवों में पिछले 15 महीनों से एक भी पॉजिटिव मामला नहीं आया है। इसमें सबसे बड़ी भूमिका आशा वर्करों ने निभाई है। उनके सहयोग से यह संभव हो पाया है ।
-अभिनीत शर्मा, खंड चिकित्सा अधिकारी, घुमारवीं
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स्थानीय प्रशासन के निरंतर प्रयासों से और स्वास्थ्य विभाग के सहयोग से घुमारवीं उपमंडल में ऐसे गांव हैं जहां कोरोना महामारी के दौरान एक भी पॉजिटिव मामला नहीं आया है। यह संभवतया लोगों की जागरूकता से ही हुआ है जो अन्य लोगों के लिए बेहतरीन उदाहरण है।
शशिपाल शर्मा, एसडीएम घुमारवीं