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Bilaspur News: साढ़े पांच बजे के बाद नहीं मिलती बस, ग्रामीणों ने मांगी अतिरिक्त सेवा
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बरठीं-घुमारवीं वाया सुन्हाणी मार्ग पर शाम के समय यात्रियों को हो रही परेशानी
संवाद न्यूज एजेंसी
गेहड़वीं (बिलासपुर)। झंडूता उपमंडल की ग्राम पंचायत सुन्हाणी के लोगों ने बरठीं-घुमारवीं सड़क मार्ग वाया सुन्हाणी पर शाम के समय अतिरिक्त बसें चलाने की मांग उठाई है। लोगों का कहना है कि इस मार्ग पर शाम करीब साढ़े पांच बजे के बाद बस सुविधा उपलब्ध नहीं होने से क्षेत्र के लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
बरड़ गांव निवासी समाजसेवी प्रवीण कुमार ने बताया कि बरठीं से घुमारवीं वाया सुन्हाणी मार्ग कई गांवों को जोड़ता है और बड़ी संख्या में लोग प्रतिदिन इस मार्ग से आवागमन करते हैं। नौकरीपेशा लोगों, विद्यार्थियों और जरूरी कार्यों से घुमारवीं जाने वाले लोगों को शाम के समय बस न मिलने के कारण निजी वाहनों या अन्य साधनों पर निर्भर रहना पड़ता है। इससे उन्हें अतिरिक्त खर्च के साथ-साथ कई बार काफी देर तक घर पहुंचने के लिए इंतजार करना पड़ता है। उन्होंने कहा कि शाम के समय लोगों की आवाजाही अधिक रहती है, लेकिन साढ़े पांच बजे के बाद नियमित बस सेवा न होने से सबसे अधिक परेशानी नौकरी और पढ़ाई के सिलसिले में बाहर जाने वाले लोगों को झेलनी पड़ती है। कई ग्रामीणों को मजबूरी में निजी वाहन या महंगे साधनों का सहारा लेना पड़ता है।
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संवाद न्यूज एजेंसी
गेहड़वीं (बिलासपुर)। झंडूता उपमंडल की ग्राम पंचायत सुन्हाणी के लोगों ने बरठीं-घुमारवीं सड़क मार्ग वाया सुन्हाणी पर शाम के समय अतिरिक्त बसें चलाने की मांग उठाई है। लोगों का कहना है कि इस मार्ग पर शाम करीब साढ़े पांच बजे के बाद बस सुविधा उपलब्ध नहीं होने से क्षेत्र के लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
बरड़ गांव निवासी समाजसेवी प्रवीण कुमार ने बताया कि बरठीं से घुमारवीं वाया सुन्हाणी मार्ग कई गांवों को जोड़ता है और बड़ी संख्या में लोग प्रतिदिन इस मार्ग से आवागमन करते हैं। नौकरीपेशा लोगों, विद्यार्थियों और जरूरी कार्यों से घुमारवीं जाने वाले लोगों को शाम के समय बस न मिलने के कारण निजी वाहनों या अन्य साधनों पर निर्भर रहना पड़ता है। इससे उन्हें अतिरिक्त खर्च के साथ-साथ कई बार काफी देर तक घर पहुंचने के लिए इंतजार करना पड़ता है। उन्होंने कहा कि शाम के समय लोगों की आवाजाही अधिक रहती है, लेकिन साढ़े पांच बजे के बाद नियमित बस सेवा न होने से सबसे अधिक परेशानी नौकरी और पढ़ाई के सिलसिले में बाहर जाने वाले लोगों को झेलनी पड़ती है। कई ग्रामीणों को मजबूरी में निजी वाहन या महंगे साधनों का सहारा लेना पड़ता है।
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