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Bilaspur News: प्रदेश में क्षेत्रीय विकास को गति देने के लिए एमओयू साइन
Sat, 28 Mar 2026 11:01 PM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर
Updated Sat, 28 Mar 2026 11:01 PM IST
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प्रदेश में क्षेत्रीय विकास को गति देने के लिए एमओयू साइन
.टाउन एंड कंट्री प्लानिंग और एसपीए, नई दिल्ली मिलकर तैयार करेंगे योजनाएं
.बिलासपुर, हमीरपुर और ऊना के संतुलित विकास पर रहेगा फोकस
-वैज्ञानिक तरीके से होगा शहरी विस्तार, अव्यवस्थित निर्माण पर लगेगी रोक
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। हिमाचल प्रदेश में योजनाबद्ध और संतुलित शहरी विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए टाउन एंड कंट्री प्लानिंग विभाग, हिमाचल प्रदेश सरकार और स्कूल ऑफ प्लानिंग एंड आर्किटेक्चर (एसपीए), नई दिल्ली के बीच शनिवार को समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए।
इस समझौते के तहत प्रदेश के बिलासपुर, हमीरपुर और ऊना जिलों के लिए विस्तृत क्षेत्रीय विकास योजनाएं (रीजनल प्लान) तैयार की जाएंगी। इन योजनाओं का उद्देश्य इन जिलों में तेजी से हो रहे शहरीकरण को व्यवस्थित करना और भविष्य की जरूरतों के अनुरूप आधारभूत ढांचे का विकास सुनिश्चित करना है। इस दौरान तकनीकी शिक्षा मंत्री राजेश धर्माणी विशेष रूप से उपस्थित रहे। उन्होंने कहा कि प्रदेश में अनियोजित शहरी विस्तार एक बड़ी चुनौती बनता जा रहा है, जिसे दूर करने के लिए विशेषज्ञ संस्थानों के सहयोग से वैज्ञानिक और दीर्घकालिक योजनाएं बनाना जरूरी है। उन्होंने कहा कि इस पहल से न केवल शहरों का सुव्यवस्थित विकास होगा, बल्कि ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के बीच संतुलन भी कायम रहेगा। साथ ही, लोगों को बेहतर सड़क, जल आपूर्ति, सीवरेज, परिवहन और आवास जैसी मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराई जा सकेंगी। एमओयू के तहत स्कूल ऑफ प्लानिंग एंड आर्किटेक्चर, नई दिल्ली के विशेषज्ञों की टीम संबंधित जिलों का विस्तृत सर्वेक्षण और अध्ययन करेगी। इसके आधार पर ऐसी योजनाएं तैयार की जाएंगी, जो आने वाले वर्षों में जनसंख्या वृद्धि, औद्योगिक विस्तार, पर्यटन विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं को ध्यान में रखेंगी। तैयार की जाने वाली योजनाओं में प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण, हरित क्षेत्रों के विकास और पर्यावरण संतुलन बनाए रखने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। साथ ही, जल स्रोतों के संरक्षण और आपदा प्रबंधन के पहलुओं को भी योजनाओं में शामिल किया जाएगा। अधिकारियों के अनुसार, इन क्षेत्रीय योजनाओं के लागू होने से निवेश को बढ़ावा मिलेगा और नए औद्योगिक एवं व्यावसायिक अवसर विकसित होंगे। इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी सृजित होंगे और आर्थिक गतिविधियों को गति मिलेगी।
इनसेट
अव्यवस्थित निर्माण पर लगेगी रोक
योजनाओं के लागू होने के बाद अनियोजित निर्माण और अव्यवस्थित शहरी विस्तार पर प्रभावी नियंत्रण लगाया जा सकेगा। इससे शहरों की सुंदरता और रहने योग्य वातावरण में सुधार होगा।
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इनसेट
कार्यक्रम के दौरान विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों और एसपीए, नई दिल्ली के प्रतिनिधियों की मौजूदगी में एमओयू से संबंधित दस्तावेजों का औपचारिक आदान-प्रदान किया गया। सभी उपस्थित अधिकारियों ने इस पहल को प्रदेश के समग्र और सतत विकास की दिशा में एक मील का पत्थर बताया।
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.टाउन एंड कंट्री प्लानिंग और एसपीए, नई दिल्ली मिलकर तैयार करेंगे योजनाएं
.बिलासपुर, हमीरपुर और ऊना के संतुलित विकास पर रहेगा फोकस
-वैज्ञानिक तरीके से होगा शहरी विस्तार, अव्यवस्थित निर्माण पर लगेगी रोक
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। हिमाचल प्रदेश में योजनाबद्ध और संतुलित शहरी विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए टाउन एंड कंट्री प्लानिंग विभाग, हिमाचल प्रदेश सरकार और स्कूल ऑफ प्लानिंग एंड आर्किटेक्चर (एसपीए), नई दिल्ली के बीच शनिवार को समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए।
इस समझौते के तहत प्रदेश के बिलासपुर, हमीरपुर और ऊना जिलों के लिए विस्तृत क्षेत्रीय विकास योजनाएं (रीजनल प्लान) तैयार की जाएंगी। इन योजनाओं का उद्देश्य इन जिलों में तेजी से हो रहे शहरीकरण को व्यवस्थित करना और भविष्य की जरूरतों के अनुरूप आधारभूत ढांचे का विकास सुनिश्चित करना है। इस दौरान तकनीकी शिक्षा मंत्री राजेश धर्माणी विशेष रूप से उपस्थित रहे। उन्होंने कहा कि प्रदेश में अनियोजित शहरी विस्तार एक बड़ी चुनौती बनता जा रहा है, जिसे दूर करने के लिए विशेषज्ञ संस्थानों के सहयोग से वैज्ञानिक और दीर्घकालिक योजनाएं बनाना जरूरी है। उन्होंने कहा कि इस पहल से न केवल शहरों का सुव्यवस्थित विकास होगा, बल्कि ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के बीच संतुलन भी कायम रहेगा। साथ ही, लोगों को बेहतर सड़क, जल आपूर्ति, सीवरेज, परिवहन और आवास जैसी मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराई जा सकेंगी। एमओयू के तहत स्कूल ऑफ प्लानिंग एंड आर्किटेक्चर, नई दिल्ली के विशेषज्ञों की टीम संबंधित जिलों का विस्तृत सर्वेक्षण और अध्ययन करेगी। इसके आधार पर ऐसी योजनाएं तैयार की जाएंगी, जो आने वाले वर्षों में जनसंख्या वृद्धि, औद्योगिक विस्तार, पर्यटन विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं को ध्यान में रखेंगी। तैयार की जाने वाली योजनाओं में प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण, हरित क्षेत्रों के विकास और पर्यावरण संतुलन बनाए रखने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। साथ ही, जल स्रोतों के संरक्षण और आपदा प्रबंधन के पहलुओं को भी योजनाओं में शामिल किया जाएगा। अधिकारियों के अनुसार, इन क्षेत्रीय योजनाओं के लागू होने से निवेश को बढ़ावा मिलेगा और नए औद्योगिक एवं व्यावसायिक अवसर विकसित होंगे। इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी सृजित होंगे और आर्थिक गतिविधियों को गति मिलेगी।
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अव्यवस्थित निर्माण पर लगेगी रोक
योजनाओं के लागू होने के बाद अनियोजित निर्माण और अव्यवस्थित शहरी विस्तार पर प्रभावी नियंत्रण लगाया जा सकेगा। इससे शहरों की सुंदरता और रहने योग्य वातावरण में सुधार होगा।
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कार्यक्रम के दौरान विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों और एसपीए, नई दिल्ली के प्रतिनिधियों की मौजूदगी में एमओयू से संबंधित दस्तावेजों का औपचारिक आदान-प्रदान किया गया। सभी उपस्थित अधिकारियों ने इस पहल को प्रदेश के समग्र और सतत विकास की दिशा में एक मील का पत्थर बताया।