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Bilaspur News: मनरेगा कर्मचारियों का तीन माह से वेतन लंबित, प्रभावित हो रहे हैं काम

Mon, 28 Apr 2025 11:59 PM IST
शिमला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर Updated Mon, 28 Apr 2025 11:59 PM IST
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MNREGA employees' salary is pending for three months, work is getting affected
-मनरेगा मजदूरों को भी नहीं हुआ चार माह से दिहाड़ी का भुगतान
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-समय पर भुगतान न होने के कारण कर रहे आर्थिक परेशानी का सामना

संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। मनरेगा के तहत कार्यरत कर्मचारियों को पिछले तीन माह से वेतन का भुगतान नहीं हुआ है, इस कारण उनके परिवारों की आजीविका पर संकट उत्पन्न हो गया है। ग्राम रोजगार सेवक संघ के प्रदेश उपाध्यक्ष राकेश शर्मा, बिलासपुर के अध्यक्ष संदीप शर्मा ने बताया कि यह समस्या केवल बिलासपुर की नहीं है, प्रदेश भर में यही हाल हैं।
उन्होंने कहा कि मनरेगा कर्मचारियों का वेतन पिछले तीन माह से लंबित है, जिससे 1031 ग्राम रोजगार सहायक, 400 तकनीकी सहायक, 100 कंप्यूटर ऑपरेटर और 24 कनिष्ठ लेखपाल को गंभीर कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। इसके अलावा, प्रदेश में मनरेगा मजदूरों को पिछले चार महीनों से दिहाड़ी का भुगतान नहीं हुआ है, जिससे उनके जीवन यापन में दिक्कत आ रही हैं। 26 दिसंबर 2024 के बाद से न तो मजदूरी का भुगतान हुआ है और न ही निर्माण सामग्री की खरीद संभव हो पाई है। एडमिन मद के तहत भी मनरेगा कर्मचारियों को पिछले तीन महीनों से वेतन का भुगतान नहीं हो पाया है। यह स्थिति हजारों परिवारों के लिए संकट का कारण बन गई है। प्रदेश में मनरेगा के तहत कार्यों पर गहरा संकट उत्पन्न हो गया है, क्योंकि केंद्र सरकार द्वारा प्रदेश की मनरेगा मद के तहत 461.56 करोड़ रुपये की राशि नवंबर 2024 से लंबित रखी गई है। इस राशि में 250 करोड़ रुपये लेबर मद के लिए, 200 करोड़ रुपये निर्माण सामग्री मद के लिए और 11 करोड़ रुपये एडमिन मद के लिए हैं। इस कारण प्रदेश में मनरेगा के तहत सभी कार्य प्रभावित हो गए हैं, जिससे राज्य के ग्रामीण विकास कार्यों को भी नुकसान हो रहा है।
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प्रदेश ने वित्तीय वर्ष 2024-25 के दौरान मनरेगा के तहत शानदार प्रदर्शन किया। कुल 1534 करोड़ रुपये के कार्य पूरे किए और 395 लाख कार्य दिवस अर्जित किए, जो निर्धारित लक्ष्य से 136 प्रतिशत अधिक हैं। इसके बावजूद, राज्य को अब तक 31 मार्च 2025 तक की मजदूरी का भुगतान नहीं मिला है। पिछले पांच वर्ष में प्रदेश ने औसतन हर वर्ष 350 लाख कार्य दिवस सृजित किए हैं, जो उसकी कार्य क्षमता को दर्शाता है। हालांकि, केंद्र सरकार ने वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए हिमाचल प्रदेश के द्वारा प्रस्तावित 417 लाख कार्य दिवसों को घटाकर मात्र 250 लाख कार्य दिवस कर दिया है। इस कटौती का विरोध करते हुए केंद्र से इसे फिर से बढ़ाने की मांग की है। कहा कि प्रदेश सरकार के आग्रह के बाद भी केंद्र ने यह राशि जारी नहीं की। आग्रह किया कि इस राशि को जल्द जारी किया जाए, ताकि मनरेगा कार्यों में आ रहीं रुकावटों को दूर किया जा सके। अगर यह राशि समय पर जारी नहीं की गई, तो न केवल मनरेगा से जुड़ी परियोजनाओं पर असर पड़ेगा, बल्कि राज्य के ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर भी सीमित हो जाएंगे।
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