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आयुर्वेदिक अस्पतालों में नहीं मिल रही दवाइयां
मंगल ठाकुर/ अमर उजाला, बरठीं (बिलासपुर)।
Updated Sun, 28 Feb 2016 06:34 PM IST
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आप बीमार हैं और इलाज के लिए आयुर्वेदिक अस्पतालों में जा रहे हैं तो वहां जाकर मायूसी ही हाथ लगेगी। अस्पतालों में आपकी नब्ज तो टटोल ली जाएगी। लेकिन, दवाई मिलेगी या नहीं, इसकी कोई गारंटी नहीं है। ज्यादातर अस्पतालों से आपको खाली हाथ बैरंग लौटना पड़ेगा।
जिला के आयुर्वेदिक स्वास्थ्य केंद्रों में पिछले कुछ महीनों से दवाई नहीं मिल रही है। विभागीय सूत्रों की मानें तो दवाइयों की सप्लाई नहीं आने की वजह से यह समस्या पेश आई है।
कई अस्पतालों में तो पिछले आठ महीने से कई दवाइयों की सप्लाई नहीं पहुंची। कई अस्पतालों में एक भी दवाई उपलब्ध नहीं है।
आयुर्वेदिक अस्पतालों की में बेहतर सुविधा मुहैया करवाने के सरकारी दावे धरातल पर खोखले साबित हो रहे हैं। जिले के आयुर्वेदिक स्वास्थ्य केंद्रों में चल रही दवाइयों की से स्वास्थ्य विभाग और सरकार की पोल खुल गई है।
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जिले में कुल 67 आयुर्वेदिक स्वास्थ्य केंद्र हैं। इनमें से अधिकतर अस्पतालों में अधिकतर दवाइयां उपलब्ध नहीं है। सरकार और विभाग इस दिशा में कोई कदम नहीं उठा रहे हैं।
मदन लाल, नरेश कुमार, प्रवीण कुमार, वासुदेव, राजेश कुमार, बलदेव दास, कृष्ण चंद, सुशील कुमार, नंदकिशोर, देशराज, विशाल ठाकुर, संजय कुमार, जितेंद्र गौतम, बाबू राम, राजेंद्र गौतम सहित अन्य ग्रामीणों ने बताया कि वह स्वास्थ्य केन्द्र में अपने इलाज के लिए गए थे, लेकिन केंद्र पर कोई भी दवाई उपलब्ध नहीं थी।
इस कारण उन्हें निजी मेडिकल स्टोर से दवाइयां खरीदनी पड़ी। उन्होंने सरकार से मांग की है कि आयुर्वेदिक स्वास्थ्य केन्द्रों में दवाइयों का प्रबंध शीघ्र किया जाए।
इन दवाइयों का चल रहा टोटा
स्वास्थ्य केंद्रों में जहां मरीजों को विभिन्न बीमारियों के इलाज के लिए अश्वगंधा, कृमिहर वटी, कामदुधा रस, आनंद भैरव रस, पाईलैक्स, सिस्टोन, एकांगवीर रस, योगराज गुगल, कैसोर गूगल, त्रयोदसांग गूगल, अशोक रिष्ट, दसमुला, अरगुणारिष्ट, अव्यरिष्ट, रासनादि क्वाथ, मधुशष्टि, तुलसीयादि और वरुणादि सहित पट्टियों का टोटा चल रहा है। जानकारी के अनुसार कई बार आयुर्वेदिक स्वास्थ्य केंद्रों से दवाइयां खत्म होने की सूचना उच्चाधिकारियों को भेजी गई है। लेकिन अभी तक स्टॉक नहीं पहुंच रहा।
दस मार्च तक हो जाएगी सप्लाई: रमेश
जिला आयुर्वेदिक अधिकारी डा. रमेश कुमार ने बताया कि सप्लाई नहीं आने की वजह से यह दिक्कत हुई है। जल्द ही दवाइयां मुहैया करवा दी जाएगी। दस मार्च तक सभी स्वास्थ्य केंद्रों में दवाइयों का स्टॉक पहुंच जाएगा।
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जिला के आयुर्वेदिक स्वास्थ्य केंद्रों में पिछले कुछ महीनों से दवाई नहीं मिल रही है। विभागीय सूत्रों की मानें तो दवाइयों की सप्लाई नहीं आने की वजह से यह समस्या पेश आई है।
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कई अस्पतालों में तो पिछले आठ महीने से कई दवाइयों की सप्लाई नहीं पहुंची। कई अस्पतालों में एक भी दवाई उपलब्ध नहीं है।
आयुर्वेदिक अस्पतालों की में बेहतर सुविधा मुहैया करवाने के सरकारी दावे धरातल पर खोखले साबित हो रहे हैं। जिले के आयुर्वेदिक स्वास्थ्य केंद्रों में चल रही दवाइयों की से स्वास्थ्य विभाग और सरकार की पोल खुल गई है।
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जिले में कुल 67 आयुर्वेदिक स्वास्थ्य केंद्र हैं। इनमें से अधिकतर अस्पतालों में अधिकतर दवाइयां उपलब्ध नहीं है। सरकार और विभाग इस दिशा में कोई कदम नहीं उठा रहे हैं।
मदन लाल, नरेश कुमार, प्रवीण कुमार, वासुदेव, राजेश कुमार, बलदेव दास, कृष्ण चंद, सुशील कुमार, नंदकिशोर, देशराज, विशाल ठाकुर, संजय कुमार, जितेंद्र गौतम, बाबू राम, राजेंद्र गौतम सहित अन्य ग्रामीणों ने बताया कि वह स्वास्थ्य केन्द्र में अपने इलाज के लिए गए थे, लेकिन केंद्र पर कोई भी दवाई उपलब्ध नहीं थी।
इस कारण उन्हें निजी मेडिकल स्टोर से दवाइयां खरीदनी पड़ी। उन्होंने सरकार से मांग की है कि आयुर्वेदिक स्वास्थ्य केन्द्रों में दवाइयों का प्रबंध शीघ्र किया जाए।
इन दवाइयों का चल रहा टोटा
स्वास्थ्य केंद्रों में जहां मरीजों को विभिन्न बीमारियों के इलाज के लिए अश्वगंधा, कृमिहर वटी, कामदुधा रस, आनंद भैरव रस, पाईलैक्स, सिस्टोन, एकांगवीर रस, योगराज गुगल, कैसोर गूगल, त्रयोदसांग गूगल, अशोक रिष्ट, दसमुला, अरगुणारिष्ट, अव्यरिष्ट, रासनादि क्वाथ, मधुशष्टि, तुलसीयादि और वरुणादि सहित पट्टियों का टोटा चल रहा है। जानकारी के अनुसार कई बार आयुर्वेदिक स्वास्थ्य केंद्रों से दवाइयां खत्म होने की सूचना उच्चाधिकारियों को भेजी गई है। लेकिन अभी तक स्टॉक नहीं पहुंच रहा।
दस मार्च तक हो जाएगी सप्लाई: रमेश
जिला आयुर्वेदिक अधिकारी डा. रमेश कुमार ने बताया कि सप्लाई नहीं आने की वजह से यह दिक्कत हुई है। जल्द ही दवाइयां मुहैया करवा दी जाएगी। दस मार्च तक सभी स्वास्थ्य केंद्रों में दवाइयों का स्टॉक पहुंच जाएगा।