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Bilaspur News: संयुक्त हस्ताक्षर के बीच उलझी केवी के लिए भूमि हस्तांतरण प्रक्रिया
Mon, 19 May 2025 11:11 PM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर
Updated Mon, 19 May 2025 11:11 PM IST
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घुमारवीं में इस किराए के भवन में चलता है केंद्रीय विद्यालय। संवाद
13 साल से किराये के भवन में चल रहा है केंद्रीय विद्यालय घुमारवीं
स्थायी भवन न होने से विद्यालय में बच्चों की संख्या पर पड़ रहा असर
सीमित संसाधनों में पढ़ाई कर रहे हैं विद्यालय के 333 छात्र
संजीव शामा
घुमारवीं(बिलासपुर)। केंद्रीय विद्यालय घुमारवीं का स्थायी भवन अब भी एक अधूरा सपना बना हुआ है। वर्ष 2012 में स्थापित इस विद्यालय को 13 साल बीत जाने के बावजूद आज तक अपना खुद का भवन नहीं मिल पाया है। भवन निर्माण के लिए आवश्यक भूमि चिन्हित किए जाने और अनेक प्रयासों के बावजूद मामला आज भी सरकारी फाइलों में दबा हुआ है।
हाल ही में अधिकारियों द्वारा यह दावा किया था कि भूमि हस्तांतरण की सभी औपचारिकताएं पूरी कर ली गई हैं और अब कोई रुकावट नहीं है। लेकिन छह माह का वक्त बीत जाने के बाद भी जमीन के नामांतरण की प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी है। जानकारी के मुताबिक अब यह मामला जॉइंट सिग्नेचर के स्तर पर अटका है, जिससे भवन निर्माण की राह एक बार फिर थम गई है। इस समय विद्यालय में मात्र 333 छात्र अध्ययनरत हैं, जो बेहद सीमित संसाधनों में पढ़ाई कर रहे हैं। वर्तमान में विद्यालय सराय के 10 कमरों में चल रहा है, जिनकी हालत भी खस्ता है। स्कूल के पास न खेल मैदान है, न कंप्यूटर लैब और न ही लाइब्रेरी जैसी मूलभूत सुविधाएं। एक ही कमरे में कंप्यूटर लैब और पुस्तकालय चलाया जा रहा है, जबकि अन्य कमरों को कार्यालय और कक्षाओं के रूप में प्रयोग में लाया जा रहा है।
पहले स्कूल के पास एक हॉल हुआ करता था जहां सांस्कृतिक गतिविधियां आयोजित की जाती थीं, लेकिन अब वहां सार्वजनिक पुस्तकालय बन चुका है। वर्ष 2018 में जमा दो की कक्षाएं शुरू करने की योजना थी, परंतु भवन के अभाव में वह भी पूरी नहीं हो सकी। जानकारी के अनुसार घुमारवीं के टकरेड़ा रोड पर कोर्ट परिसर के पास 2.26 एकड़ भूमि भवन निर्माण के लिए चिन्हित की गई है। यहां लगभग 50 करोड़ रुपये की लागत से आधुनिक भवन का निर्माण प्रस्तावित है, जिसमें हर कक्षा के लिए दो कमरे, इंडोर स्टेडियम, खेल का मैदान और आवासीय सुविधाएं शामिल हैं। स्थायी भवन बनने की स्थिति में यहां विद्यार्थियों की संख्या में कई गुना वृद्धि होने की संभावना है और घुमारवीं विधानसभा क्षेत्र शिक्षा के क्षेत्र में एक नई पहचान बना सकता है। लेकिन यह महत्वाकांक्षी योजना एक कार्यालय से दूसरे कार्यालय की दौड़ में उलझी हुई है।
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कोट
अधिकारियों का दावा, जल्द पूरी होगी प्रक्रिया
उपनिदेशक उच्च शिक्षा विभाग बिलासपुर रेनू कौशल ने बताया कि भूमि हस्तांतरण की सभी औपचारिकताएं लगभग पूरी हो चुकी हैं और अब केवल ‘जॉइंट सिग्नेचर’ होना बाकी है। उन्होंने कहा कि उम्मीद है कुछ दिनों में यह प्रक्रिया भी पूरी हो जाएगी, जिसके बाद भवन निर्माण का कार्य जल्द ही शुरू किया जाएगा।
संवाद
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स्थायी भवन न होने से विद्यालय में बच्चों की संख्या पर पड़ रहा असर
सीमित संसाधनों में पढ़ाई कर रहे हैं विद्यालय के 333 छात्र
संजीव शामा
घुमारवीं(बिलासपुर)। केंद्रीय विद्यालय घुमारवीं का स्थायी भवन अब भी एक अधूरा सपना बना हुआ है। वर्ष 2012 में स्थापित इस विद्यालय को 13 साल बीत जाने के बावजूद आज तक अपना खुद का भवन नहीं मिल पाया है। भवन निर्माण के लिए आवश्यक भूमि चिन्हित किए जाने और अनेक प्रयासों के बावजूद मामला आज भी सरकारी फाइलों में दबा हुआ है।
हाल ही में अधिकारियों द्वारा यह दावा किया था कि भूमि हस्तांतरण की सभी औपचारिकताएं पूरी कर ली गई हैं और अब कोई रुकावट नहीं है। लेकिन छह माह का वक्त बीत जाने के बाद भी जमीन के नामांतरण की प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी है। जानकारी के मुताबिक अब यह मामला जॉइंट सिग्नेचर के स्तर पर अटका है, जिससे भवन निर्माण की राह एक बार फिर थम गई है। इस समय विद्यालय में मात्र 333 छात्र अध्ययनरत हैं, जो बेहद सीमित संसाधनों में पढ़ाई कर रहे हैं। वर्तमान में विद्यालय सराय के 10 कमरों में चल रहा है, जिनकी हालत भी खस्ता है। स्कूल के पास न खेल मैदान है, न कंप्यूटर लैब और न ही लाइब्रेरी जैसी मूलभूत सुविधाएं। एक ही कमरे में कंप्यूटर लैब और पुस्तकालय चलाया जा रहा है, जबकि अन्य कमरों को कार्यालय और कक्षाओं के रूप में प्रयोग में लाया जा रहा है।
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पहले स्कूल के पास एक हॉल हुआ करता था जहां सांस्कृतिक गतिविधियां आयोजित की जाती थीं, लेकिन अब वहां सार्वजनिक पुस्तकालय बन चुका है। वर्ष 2018 में जमा दो की कक्षाएं शुरू करने की योजना थी, परंतु भवन के अभाव में वह भी पूरी नहीं हो सकी। जानकारी के अनुसार घुमारवीं के टकरेड़ा रोड पर कोर्ट परिसर के पास 2.26 एकड़ भूमि भवन निर्माण के लिए चिन्हित की गई है। यहां लगभग 50 करोड़ रुपये की लागत से आधुनिक भवन का निर्माण प्रस्तावित है, जिसमें हर कक्षा के लिए दो कमरे, इंडोर स्टेडियम, खेल का मैदान और आवासीय सुविधाएं शामिल हैं। स्थायी भवन बनने की स्थिति में यहां विद्यार्थियों की संख्या में कई गुना वृद्धि होने की संभावना है और घुमारवीं विधानसभा क्षेत्र शिक्षा के क्षेत्र में एक नई पहचान बना सकता है। लेकिन यह महत्वाकांक्षी योजना एक कार्यालय से दूसरे कार्यालय की दौड़ में उलझी हुई है।
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अधिकारियों का दावा, जल्द पूरी होगी प्रक्रिया
उपनिदेशक उच्च शिक्षा विभाग बिलासपुर रेनू कौशल ने बताया कि भूमि हस्तांतरण की सभी औपचारिकताएं लगभग पूरी हो चुकी हैं और अब केवल ‘जॉइंट सिग्नेचर’ होना बाकी है। उन्होंने कहा कि उम्मीद है कुछ दिनों में यह प्रक्रिया भी पूरी हो जाएगी, जिसके बाद भवन निर्माण का कार्य जल्द ही शुरू किया जाएगा।
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