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मोक्ष प्राप्ति के लिए कथा को जीवन उतारना आवश्यक : गर्ग
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- शिव महापुराण कथा में सुनाई माता सती की कथा
संवाद न्यूज एजेंसी
झंडूता (बिलासपुर)। झंडूता की ग्राम पंचायत बलघाड़ में आयोजित शिव महापुराण कथा में प्रसिद्ध कथावाचक आचार्य ईश्वर दत्त गर्ग अपने मुखारविंद से प्रवचनों की गंगा बहा रहे हैं। कथा के चौथे दिन उन्होंने माता सती और भगवान शिव शंकर की कथा सुनाई।
उन्होंने कहा कि गृहस्थ आश्रम में सुखी जीवन व्यतीत करने और जीवन के अंत समय में मोक्ष की प्राप्ति के लिए व्यक्ति को अपने जीवन में भगवान की कथा को उतारना परम आवश्यक है। माता सती के देह त्याग की कथा का वर्णन करते हुए कहा कि जिन-जिन स्थानों पर माता सती के शरीर के अंग गिरे उन स्थानों पर शक्तिपीठों की उत्पत्ति हुई है। जहां पर माता सती के नयन गिरे वहां माता श्री नयना देवी जी, जहां चरण गिरे वहां पर माता चिंतपूर्णी, जहां पर धड़ गिरा वहां माता ब्रजेश्वरी और जहां पर माता सती का नूर गिरा वहां माता ज्वालामुखी सहित अन्य अंगों के 52 शक्तिपीठों की स्थापना हुई है। कलियुग में माता सती के सभी शक्तिपीठों पर भक्तजनों की मनोकामना पूर्ण होने पर साल भर मंदिरों में भक्तों का आना जाना लगा रहता है। इस अवसर पर संत राम राणा, राम लाल राणा, कर्म सिंह, प्रकाश चंद, बिशन दास गौतम और जोगेंद्र मौजूद रहे।
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संवाद न्यूज एजेंसी
झंडूता (बिलासपुर)। झंडूता की ग्राम पंचायत बलघाड़ में आयोजित शिव महापुराण कथा में प्रसिद्ध कथावाचक आचार्य ईश्वर दत्त गर्ग अपने मुखारविंद से प्रवचनों की गंगा बहा रहे हैं। कथा के चौथे दिन उन्होंने माता सती और भगवान शिव शंकर की कथा सुनाई।
उन्होंने कहा कि गृहस्थ आश्रम में सुखी जीवन व्यतीत करने और जीवन के अंत समय में मोक्ष की प्राप्ति के लिए व्यक्ति को अपने जीवन में भगवान की कथा को उतारना परम आवश्यक है। माता सती के देह त्याग की कथा का वर्णन करते हुए कहा कि जिन-जिन स्थानों पर माता सती के शरीर के अंग गिरे उन स्थानों पर शक्तिपीठों की उत्पत्ति हुई है। जहां पर माता सती के नयन गिरे वहां माता श्री नयना देवी जी, जहां चरण गिरे वहां पर माता चिंतपूर्णी, जहां पर धड़ गिरा वहां माता ब्रजेश्वरी और जहां पर माता सती का नूर गिरा वहां माता ज्वालामुखी सहित अन्य अंगों के 52 शक्तिपीठों की स्थापना हुई है। कलियुग में माता सती के सभी शक्तिपीठों पर भक्तजनों की मनोकामना पूर्ण होने पर साल भर मंदिरों में भक्तों का आना जाना लगा रहता है। इस अवसर पर संत राम राणा, राम लाल राणा, कर्म सिंह, प्रकाश चंद, बिशन दास गौतम और जोगेंद्र मौजूद रहे।
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