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शक्ति और बुद्धि का रक्षक आयोडीन नमक : सीएमओ
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-खुले डिब्बे में नमक रखने से खत्म होती है आयोडीन की मात्रा
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। आयोडीन हमारे शरीर की थायराइड ग्रंथि में संग्रहित होता है। आहार का महत्वपूर्ण खनिज तत्व है। जोकि हमारे शरीर के लिए महत्वपूर्ण है। यह रसायन प्रोटीन की चयापचाय में मदद करता है। यह शरीर के सामान्य विकास एवं वृद्धि के लिए महत्वपूर्ण है।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग बिलासपुर के मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉक्टर प्रवीण कुमार ने प्रेसनोट जारी कर बताया कि भारत सरकार ने 1962 में 100 फीसदी केंद्रीय सहायता प्राप्त राष्ट्रीय घेंघा नियंत्रण कार्यक्रम शुरू किया था। 1992 में राष्ट्रीय घेंघा नियंत्रण कार्यक्रम का नाम बदलकर राष्ट्रीय आयोडीन अल्पता नियंत्रण कार्यक्रम रख दिया गया। आयोडीन हमें भोजन एवं अन्य खाद्य पदार्थों जैसे दूध, दही, समुद्री वनस्पति, मछली, अंडे, नमक, सब्जियां, फलों तथा पानी से प्राप्त होता है। प्रत्येक व्यक्ति के लिए रोजाना लगभग 100 माइक्रोग्राम से 150 माइक्रोग्राम अर्थात सुई की नोक के बराबर की औसत मात्रा की जरूरत होती है जो जीवन भर के लिए केवल एक छोटे से आयोडीन युक्त चम्मच के बराबर होती है। इसकी कमी से घेंघा, मानसिक मंदता दृष्टि एवं श्रवण दोष ,मृत शिशु जन्म, गर्भपात आदि हो सकता है। बच्चा गूंगा, बहरा, बौना तथा मंदबुद्वि हो सकता है। आंकड़ों के मुताबिक दुनिया भर में करीब 1.5 बिलियन लोग, भारत में 71 मिलियन लोग आयोडीन अल्पता विकार से पीड़ित हैं। उन्होंने लोगों से अपील की कि नमक खरीदते समय यह सुनिश्चित कर लें कि पैकेट पूरी तरह से बंद हो। नमक को बंद ढक्कन युक्त सूखे डब्बे में रखें। सब्जी या दाल में नमक पकाने के बाद डालें या सुनिश्चित कर लें कि नमक निकालने के बाद पुन: हर बार बंद करें। क्योंकि डिब्बा खुला रखने से आयोडीन खत्म हो जाती है। लोगों को आयोडीन की कमी से होने वाले दुष्प्रभावों के बारे में जागरूक करने के लिए आशा घर-घर जाकर आयोडीन नमक टेस्ट किट से नमक की जांच करेंगी।
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संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। आयोडीन हमारे शरीर की थायराइड ग्रंथि में संग्रहित होता है। आहार का महत्वपूर्ण खनिज तत्व है। जोकि हमारे शरीर के लिए महत्वपूर्ण है। यह रसायन प्रोटीन की चयापचाय में मदद करता है। यह शरीर के सामान्य विकास एवं वृद्धि के लिए महत्वपूर्ण है।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग बिलासपुर के मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉक्टर प्रवीण कुमार ने प्रेसनोट जारी कर बताया कि भारत सरकार ने 1962 में 100 फीसदी केंद्रीय सहायता प्राप्त राष्ट्रीय घेंघा नियंत्रण कार्यक्रम शुरू किया था। 1992 में राष्ट्रीय घेंघा नियंत्रण कार्यक्रम का नाम बदलकर राष्ट्रीय आयोडीन अल्पता नियंत्रण कार्यक्रम रख दिया गया। आयोडीन हमें भोजन एवं अन्य खाद्य पदार्थों जैसे दूध, दही, समुद्री वनस्पति, मछली, अंडे, नमक, सब्जियां, फलों तथा पानी से प्राप्त होता है। प्रत्येक व्यक्ति के लिए रोजाना लगभग 100 माइक्रोग्राम से 150 माइक्रोग्राम अर्थात सुई की नोक के बराबर की औसत मात्रा की जरूरत होती है जो जीवन भर के लिए केवल एक छोटे से आयोडीन युक्त चम्मच के बराबर होती है। इसकी कमी से घेंघा, मानसिक मंदता दृष्टि एवं श्रवण दोष ,मृत शिशु जन्म, गर्भपात आदि हो सकता है। बच्चा गूंगा, बहरा, बौना तथा मंदबुद्वि हो सकता है। आंकड़ों के मुताबिक दुनिया भर में करीब 1.5 बिलियन लोग, भारत में 71 मिलियन लोग आयोडीन अल्पता विकार से पीड़ित हैं। उन्होंने लोगों से अपील की कि नमक खरीदते समय यह सुनिश्चित कर लें कि पैकेट पूरी तरह से बंद हो। नमक को बंद ढक्कन युक्त सूखे डब्बे में रखें। सब्जी या दाल में नमक पकाने के बाद डालें या सुनिश्चित कर लें कि नमक निकालने के बाद पुन: हर बार बंद करें। क्योंकि डिब्बा खुला रखने से आयोडीन खत्म हो जाती है। लोगों को आयोडीन की कमी से होने वाले दुष्प्रभावों के बारे में जागरूक करने के लिए आशा घर-घर जाकर आयोडीन नमक टेस्ट किट से नमक की जांच करेंगी।
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