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खुद स्वच्छता का बोर्ड लगाकर पेयजल स्रोत के पास फेंक दिया कचरा
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घुमारवीं(बिलासपुर)। नगर परिषद घुमारवीं सफाई के प्रति कितनी सजग है, इसका उदाहरण नंबर 7 दकड़ी में देखने को मिला। जहां पूरे गांव की नालियों के कचरे को इकट्ठा कर पेयजल स्रोत के नजदीक नाले में फेंक दिया गया है।
अगर इस तरह से सफाई व्यवस्था को दरु स्त किया जाता है तो नगर परिषद सफाई के नाम पर जो फीस लेती है, उसका कोई फायदा नहीं है। हैरतअंगेज है कि उसी स्थान पर नप ने लोगों को जागरूक करने के लिए स्वच्छता का बोर्ड लगा रखा है।
इस जगह के नजदीक लोगों के रिहायशी मकान भी हैं और साथ में रास्ता भी है। प्रतिदिन सैकड़ों लोग यहां से गुजरते हैं। अभी सरकार के निर्देशों के अनुसार स्कूल भी खुल गए हैं, इस कारण स्कूली बच्चों का भी आना-जाना यहां से शुरू हो गया है।
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यहां पेयजल स्रोत (बावड़ी) भी है। इसी स्रोत से गांव के लोग पीने के लिए पानी भी ले जाते हैं। ऐसे में अगर कोई गंभीर बीमारी की चपेट में आ गया तो इसकी जिम्मेवारी भी परिषद की बनती है।
स्थानीय लोगों संजू, बिट्टू, अंजना, अनिल, अंजू, प्रकाश चंद और हर्षित ने कहा कि सफाई के नाम पर पर्चियां तो नगर परिषद काट लेती है, लेकिन कूड़े को इस तरह से खुले नाले में फेंक देती है। फिर वह पैसे किस बात के वसूल करती है। नाले के पास जमीन के मालिकों को भी यह बात खटक रही है कि स्वच्छ भारत बनाने का परिषद का यह कौन सा तरीका है। परिषद नालियों में पड़ी पाइपों को तो हटाती नहीं, जिनकी वजह से गंदगी नालियों में फंसी रहती है, लेकिन कूड़े को पेयजल स्रोत के पास फेंक कर सफाई के नाम पर खानापूर्ति कर देती है।
यहां पर एक पहलू यह भी है कि नाले के साथ मे स्वयं नगर परिषद ने कूड़ा न फेंकने के लिए बोर्ड भी लगाया है। लोगों को इस कार्य से रोक कर स्वयं इस तरह का कार्य करना परिषद की गरिमा को ठेस पहुंचा रहा है। इस संबंध में नगर परिषद अध्यक्ष रीता सहगल ने कहा कि सफाई के लिए कर्मचारी उन्होंने नहीं भेजे थे। सफाई कर्मियों से बात की जाएगी कि किसके कहने पर यह कार्य किया गया और वहां से कूड़ा हटा दिया जाएगा।
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अगर इस तरह से सफाई व्यवस्था को दरु स्त किया जाता है तो नगर परिषद सफाई के नाम पर जो फीस लेती है, उसका कोई फायदा नहीं है। हैरतअंगेज है कि उसी स्थान पर नप ने लोगों को जागरूक करने के लिए स्वच्छता का बोर्ड लगा रखा है।
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इस जगह के नजदीक लोगों के रिहायशी मकान भी हैं और साथ में रास्ता भी है। प्रतिदिन सैकड़ों लोग यहां से गुजरते हैं। अभी सरकार के निर्देशों के अनुसार स्कूल भी खुल गए हैं, इस कारण स्कूली बच्चों का भी आना-जाना यहां से शुरू हो गया है।
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यहां पेयजल स्रोत (बावड़ी) भी है। इसी स्रोत से गांव के लोग पीने के लिए पानी भी ले जाते हैं। ऐसे में अगर कोई गंभीर बीमारी की चपेट में आ गया तो इसकी जिम्मेवारी भी परिषद की बनती है।
स्थानीय लोगों संजू, बिट्टू, अंजना, अनिल, अंजू, प्रकाश चंद और हर्षित ने कहा कि सफाई के नाम पर पर्चियां तो नगर परिषद काट लेती है, लेकिन कूड़े को इस तरह से खुले नाले में फेंक देती है। फिर वह पैसे किस बात के वसूल करती है। नाले के पास जमीन के मालिकों को भी यह बात खटक रही है कि स्वच्छ भारत बनाने का परिषद का यह कौन सा तरीका है। परिषद नालियों में पड़ी पाइपों को तो हटाती नहीं, जिनकी वजह से गंदगी नालियों में फंसी रहती है, लेकिन कूड़े को पेयजल स्रोत के पास फेंक कर सफाई के नाम पर खानापूर्ति कर देती है।
यहां पर एक पहलू यह भी है कि नाले के साथ मे स्वयं नगर परिषद ने कूड़ा न फेंकने के लिए बोर्ड भी लगाया है। लोगों को इस कार्य से रोक कर स्वयं इस तरह का कार्य करना परिषद की गरिमा को ठेस पहुंचा रहा है। इस संबंध में नगर परिषद अध्यक्ष रीता सहगल ने कहा कि सफाई के लिए कर्मचारी उन्होंने नहीं भेजे थे। सफाई कर्मियों से बात की जाएगी कि किसके कहने पर यह कार्य किया गया और वहां से कूड़ा हटा दिया जाएगा।