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कीरतपुर-नेरचौक फोरलेन : वन भूमि के सीमांकन को लेकर कार्रवाई शुरू

Tue, 29 Apr 2025 11:57 PM IST
Shimla Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Tue, 29 Apr 2025 11:57 PM IST
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एक्सक्लूसिव
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अरण्यपाल बिलासपुर ने एनएचएआई से 15 दिन में मांगी रिपोर्ट
2022 को केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय ने एनएचएआई को सशर्त दी थी निर्माण की अनुमति
अभी तक पूरी नहीं हो पाई है वन भूमि पर पूरी तरह बाउंड्री पिलर लगाने की प्रक्रिया

संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। कीरतपुर-नेरचौक फोरलेन परियोजना के तहत वन भूमि के सीमांकन को लेकर एनएचएआई की लापरवाही पर वन विभाग ने कड़ा संज्ञान लिया है। वन वृत्त बिलासपुर के अरण्यपाल ने परियोजना निदेशक, एनएचएआई-पीआईयू मंडी को 15 दिन के भीतर जवाब तलब करते हुए शर्त संख्या 18 की अनुपालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।
वन विभाग ने भारत सरकार के पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय, देहरादून के पत्र संख्या 136 दिनांक 8 मार्च 2022 का हवाला देते हुए कहा है कि फोरलेन परियोजना के लिए परिवर्तित की गई वन भूमि पर चार-चार फीट ऊंचे आरसीसी पिलर लगाकर सीमांकन किया जाना अनिवार्य है। इसके साथ ही पिलर-टू-पिलर डिस्टेंस तथा बैक व फ्रंट बियरिंग दर्ज करना भी जरूरी है। वन संरक्षक ने अपने पत्र में 16 जून 2023 को डीएफओ बिलासपुर कार्यालय की ओर से भेजे गए पत्र संख्या 1158 का भी उल्लेख किया है, जिसमें पहले भी यह निर्देश दिए गए थे, लेकिन एनएचएआई ने इस पर कोई कार्रवाई नहीं की। उन्होंने कहा कि यह मामला वर्तमान में उच्च न्यायालय में विचाराधीन है, ऐसे में इसमें तुरंत निजी स्तर पर हस्तक्षेप कर कार्रवाई की जानी चाहिए।
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बता दें कि परियोजना को स्वीकृति मिले 13 वर्ष बीत चुके हैं, लेकिन अब तक भूमि का सीमांकन पूरी तरह से नहीं किया गया है। पूरा सीमांकन किए बिना ही एनएचएआई ने वन भूमि पर अधिग्रहण कर फलदार और गैर-फलदार वृक्षों की गणना और मूल्यांकन कर उन्हें दोहन के लिए वन निगम को सौंप दिया।
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बताते चलें कि एनएचएआई ने केंद्र की अनुमति के बिना ही तहसील श्री नयनादेवी जी और सदर क्षेत्र में करीब 28.36 हेक्टेयर भूमि की मूल अलाइनमेंट को बदल दिया था। जब इसकी जानकारी फोरलेन विस्थापित एवं प्रभावित समिति को मिली, तो उन्होंने पर्यावरण मंत्रालय में शिकायत दर्ज करवाई। जांच में पाया गया कि एनएचएआई की ओर से शर्तों की अवहेलना करते हुए मूल अलाइनमेंट से छेड़छाड़ की गई। मंत्रालय ने इस पर संज्ञान लेते हुए राज्य सरकार से रिपोर्ट तलब की थी और बाद में एक कमेटी गठित कर सीमांकन के लिए सड़क के दोनों ओर कंक्रीट की बुर्जियां लगाने के निर्देश दिए थे। आज तक न तो बुर्जियां लगाई गईं, न ही सीमांकन किया गया, जिससे कई स्थानों पर लोगों ने अवैध कब्जे कर निर्माण कार्य शुरू कर दिए हैं। फोरलेन विस्थापित एवं प्रभावित समिति के महासचिव मदन लाल शर्मा ने कहा कि उन्होंने इस विषय में प्रमाणों सहित अरण्यपाल बिलासपुर को शिकायत सौंपी थी, जिस पर यह कार्रवाई की गई है। वन विभाग ने डीएफओ बिलासपुर को निर्देश दिए हैं कि वे एनएचएआई से संपर्क कर शीघ्र अनुपालन सुनिश्चित करें।
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