फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Himachal Pradesh ›   Bilaspur News ›   Doubt over 6 houses in Kiratpur-Nerchowk four-lane project

Bilaspur News: मुआवजा दे दिया फिर भी फोरलेन से नहीं हटाए छह मकान

Fri, 24 Apr 2026 11:58 PM IST
शिमला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर Updated Fri, 24 Apr 2026 11:58 PM IST
विज्ञापन
Doubt over 6 houses in Kiratpur-Nerchowk four-lane project
विस्थापितों, प्रभावितों को मुआवजा मिलने के बाद भी नहीं हटी हैं संरचनाएं
विज्ञापन

उच्च न्यायालय के निर्देशों का हवाला देते हुए जिला प्रशासन से मांगी रिपोर्ट
एनएचएआई के तहसीलदार पहले ही इन मकानों के अस्तित्व की कर चुके हैं पुष्टि
कीरतपुर-नेरचौक फोरलेन परियोजना में 6 मकानों पर संशय

संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। कीरतपुर-नेरचौक फोरलेन विवाद को लेकर फोरलेन विस्थापित एवं प्रभावित समिति ने उच्च न्यायालय के निर्देशों का हवाला देते हुए जिला प्रशासन से छह मकानों की मौके की स्थिति पर विस्तृत स्टेटस रिपोर्ट मांगी है। समिति ने उपायुक्त बिलासपुर और एसडीएम सदर से स्पष्ट करने को कहा है कि जिन मकानों का मुआवजा दिया जा चुका है, क्या उन्हें ध्वस्त कर जमीन का कब्जा एनएचएआई को सौंपा गया है या नहीं।
समिति के अनुसार मौजा पट्टा के खसरा नंबर 38/1, 103, भटेड़ उपरली के खसरा नंबर 396/30/13 और 435/10 में बने छह मकान अभी भी मौके पर मौजूद हैं। जबकि एनएचएआई के तहसीलदार पहले ही इन मकानों के अस्तित्व की पुष्टि कर चुके हैं। इसके बावजूद यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि इन भवनों को हटाकर जमीन परियोजना को सौंपी गई या नहीं। जानकारी के मुताबिक संबंधित मकानों के मालिकों को मुआवजा आवंटित किया जा चुका है और नोटिस के तहत 60 दिनों के भीतर भूमि खाली करने के निर्देश भी दिए गए थे। इसके बावजूद आज तक न तो मकान ध्वस्त किए गए और न ही एनएचएआई ने कब्जा लिया। इस बीच कई बार कमेटियां भी गठित की गईं, लेकिन स्थिति जस की तस बनी हुई है। एक चार मंजिला भवन को लेकर भी सवाल उठे हैं, जिसका मुआवजा मिलने के बाद मालिक ने उसे अपने बेटे के नाम कर दिया और नए सिरे से बिजली कनेक्शन भी लगवा लिया। समिति ने सवाल उठाया है कि जब यह भवन सड़क की जद में था, तो फिर नए कनेक्शन की अनुमति कैसे दी गई। समिति ने कहा कि विभिन्न पटवार सर्कलों की जांच रिपोर्ट में भी विरोधाभास सामने आ रहा है। कुछ क्षेत्रों में मकानों और संरचनाओं की पुष्टि हुई है, जबकि कुछ मामलों में रिपोर्ट लंबित है। बकरोआ क्षेत्र में एक मकान को लेकर पहले “बेकार सामान” होने की रिपोर्ट दी गई थी, लेकिन बाद की जांच में उसमें कीमती सामान होने की पुष्टि हुई। बताया कि कई मामलों में तीन महीने से अधिक समय से जांच रिपोर्ट लंबित है, जिससे पूरे प्रकरण पर संदेह और गहरा गया है।
विज्ञापन

समिति के महासचिव मदन लाल शर्मा ने कहा कि जिन मकानों और जमीनों का सड़क निर्माण से कोई सीधा संबंध नहीं है, उन्हें भी करोड़ों रुपये का मुआवजा दिया गया। उन्होंने खुद का उदाहरण देते हुए कहा कि उनकी संपत्ति सड़क की जद में न होने के बावजूद करीब 3 करोड़ रुपये का मुआवजा आवंटित कर दिया गया। समिति का कहना है कि यह पूरा मामला टैक्सपेयर्स के पैसे से जुड़ा है, इसलिए इसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। स्पष्ट किया कि उनका किसी व्यक्ति विशेष से कोई निजी विवाद नहीं है। उनका उद्देश्य केवल एनएचएआई और प्रशासन की कार्यप्रणाली में पारदर्शिता लाना और कथित अनियमितताओं को उजागर करना है। मांग की है कि जिन भवनों को ध्वस्त नहीं किया जाना है, उनकी स्थिति भी स्पष्ट की जाए, ताकि बार-बार नाम उजागर होने से संबंधित लोगों को अनावश्यक परेशानी न हो। साथ ही प्रशासन से पूरे मामले में स्पष्ट और समयबद्ध कार्रवाई की अपेक्षा जताई गई है।
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed