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Bilaspur News: नौणी-भराड़ीघाट में मुआवजा मिलने के बावजूद नहीं हटे भवन और दुकानें

Wed, 11 Jun 2025 11:09 PM IST
शिमला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर Updated Wed, 11 Jun 2025 11:09 PM IST
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Despite receiving compensation, buildings and shops were not removed in Nauni-Bharadighat
नौणी भराड़ीघाट फोरलेन के लिए अधिग्रहीत किए गए भवन। संवाद
एक साल पहले हुआ था टेंडर अवार्ड, अब तक शुरू नहीं हुआ निर्माण
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प्रशासन सख्त : बिजली-पानी के कनेक्शन काटने के दिए हैं आदेश
प्रभावितों की आपत्ति : नहीं मिला पेड़ों का मुआवजा, बाउंड्री पिलर भी गायब

गोपाल शर्मा
जुखाला (बिलासपुर)। शिमला-मटौर राष्ट्रीय राजमार्ग पर बनने वाले फोरलेन के पैकेज नंबर 2 नौणी से भराड़ीघाट में निर्माण कार्य एक बार फिर बाधित हो गया है। मुआवजा मिलने के बावजूद प्रभावितों द्वारा अपने भवन और दुकानों को अधिकृत क्षेत्र से नहीं हटाया गया। इससे नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। प्रबंधन का कहना है इस कारण फोरलेन के निर्माण में देरी हो रही है और समय सीमा में काम पूरा करना मुश्किल होगा।
इस पैच का टेंडर करीब एक वर्ष पहले अवार्ड हो गया था। लेकिन केंद्रीय वन मंत्रालय से आवश्यक अनुमति न मिलने के कारण निर्माण कार्य आरंभ होने में साल भर की देरी हो गई। अब जब वन स्वीकृति मिल चुकी है और निर्माण का रास्ता साफ हुआ है, तो प्रभावित लोगों द्वारा भूमि खाली न करने से काम दोबारा लटक गया है। 17.5 किलोमीटर लंबा यह फोरलेन खंड लगभग 640 करोड़ रुपये की लागत से तैयार होना है। एनएचएआई ने निर्माण कार्य दो साल में पूरा करने का लक्ष्य रखा था, लेकिन अब तक अधिग्रहित जमीन पर निर्माण कार्य शुरू नहीं हो सका है। परियोजना निदेशक विक्रम मीणा ने कहा कि फोरलेन के दायरे में आने वाले सभी प्रभावितों को मुआवजा पहले ही दिया जा चुका है। इसके बावजूद कई स्थानों पर भवन और दुकानें अब तक नहीं हटाई गई हैं, जिससे परियोजना में अनावश्यक विलंब हो रहा है। इस परियोजना के तहत 4600 पेड़ काटे जाएंगे, जिनमें से 400 पेड़ फलदार और 4200 बिना फल वाले हैं।
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वहीं, दूसरी ओर शिमला-मटौर फोरलेन विस्थापित एवं प्रभावित समिति के उपप्रधान कमलेश नड्डा ने प्रशासन और एनएचएआई पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि निहारखन से विनायक घाट तक कई प्रभावितों को अब तक पेड़ों का मुआवजा नहीं मिला है। कुछ को मकान और जमीन का उचित मूल्य नहीं दिया गया है। आरोप लगाया कि भवनों की सीमा चिन्हित करने के लिए बाउंड्री पिलर तक नहीं लगाए गए हैं। समिति का दावा है कि प्रशासन से कई बार मुलाकात करने और ज्ञापन सौंपने के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई।
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कोट
एसडीएम सदर राजदीप सिंह खैरिया ने बताया कि प्रशासन ने इस संबंध में सभी औपचारिकताएं पूरी कर ली हैं। प्रभावितों को पर्याप्त समय और नोटिस दिया गया है। उन्होंने कहा कि जिन भवनों और दुकानों के निर्माण में बाधा पैदा की है, उनके बिजली व पानी के कनेक्शन काटने के निर्देश जारी किए जा चुके हैं। एक सप्ताह पहले अतिक्रमण हटाने के लिए मुहिम चलाई गई थी और अगले सप्ताह फिर से अभियान चलाया जाएगा। प्रशासन का दावा है कि लोगों की वाजिब मांगों का समाधान भी किया गया है।
संवाद
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