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Bilaspur News: मिड-डे मील वर्कर्स के मानदेय में बढ़ोतरी और नियमितीकरण की मांग
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एटक ने की बैठक, 12 फरवरी को प्रदेशभर के स्कूलों में नहीं बनेगा मिड-डे मील
बिलासपुर लक्ष्मी नारायण मंदिर से निकलेगी प्रदर्शन रैली
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। एटक की जिला परिषद की बैठक में मिड-डे मील वर्कर्स यूनियन ने केंद्र व प्रदेश सरकार की नीतियों के खिलाफ मोर्चा खोलने का एलान किया है। बैठक में नेताओं ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार ने हालिया बजट में मिड-डे मील वर्कर्स के मानदेय में कोई बढ़ोतरी नहीं की है और न ही उन्हें नियमित करने के लिए कोई ठोस नीति बनाई है।
बैठक में मिड-डे मील वर्कर्स यूनियन एटक की राज्य अध्यक्ष कमलेश ठाकुर ने कहा कि वर्षों से बेहद कम मानदेय पर काम कर रही इन महिला कर्मियों की अनदेखी की जा रही है, जबकि स्कूलों में बच्चों को पौष्टिक आहार उपलब्ध कराने में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका है। बैठक में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि 12 फरवरी को प्रदेश के किसी भी स्कूल में मिड-डे मील नहीं बनेगा। सभी मिड-डे मील वर्कर्स राष्ट्रीय हड़ताल में शामिल होकर किसानों और मजदूरों के समर्थन में प्रदर्शन करेंगे। प्रदर्शन 12 फरवरी को सुबह 10 बजे लक्ष्मी नारायण मंदिर परिसर से शुरू होगा। यूनियन पदाधिकारियों ने सभी मिड-डे मील वर्कर्स से आह्वान किया है कि वे तय समय पर मंदिर प्रांगण में एकत्रित होकर मांगों के समर्थन में आवाज बुलंद करें। प्रदर्शन के बाद राज्य व केंद्र सरकार को ज्ञापन भेजा जाएगा।
एटक नेताओं ने नए लेबर कोड और भारत-अमेरिका ट्रेड एग्रीमेंट का भी विरोध किया। उनका कहना है कि ये नीतियां किसानों और मजदूरों के हित में नहीं हैं। यूनियन का आरोप है कि विदेशी उत्पादों के बाजार में आने से महंगाई और बेरोजगारी बढ़ेगी तथा देश के किसानों को नुकसान होगा। पहले से ही किसानों को पर्याप्त सब्सिडी नहीं मिल रही, जिससे उनकी लागत बढ़ रही है।
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मिड-डे मील वर्कर्स ने कहा कि उन्हें किसी प्रकार की नियमित छुट्टी का प्रावधान नहीं है, जो सीधे तौर पर श्रमिक अधिकारों का हनन है। लंबे समय से वे सामाजिक सुरक्षा, न्यूनतम वेतन और नियमितीकरण की मांग उठा रही हैं, लेकिन सरकार की ओर से ठोस कदम नहीं उठाए गए। यूनियन ने यह भी आरोप लगाया कि प्रदेश सरकार ने मिड-डे मील वर्कर्स के लिए 4500 रुपये मानदेय की घोषणा की थी, लेकिन आज तक किसी कर्मी को यह राशि एकमुश्त नहीं मिली। कई कर्मियों को समय पर मानदेय भी नहीं मिल पा रहा है, जिससे उनके सामने आर्थिक संकट खड़ा हो रहा है। उन्होंने कहा कि 12 फरवरी की हड़ताल के माध्यम से सरकार को श्रमिकों की एकजुटता का संदेश दिया। एटक के राज्य सचिव कामरेड प्रवेश चंदेल, जिला अध्यक्ष रेखा ठाकुर, घुमारवीं ब्लॉक अध्यक्ष उर्मिला संख्यान, झंडूता की अध्यक्ष माला चंदेल आदि मौजूद रहे।
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बिलासपुर लक्ष्मी नारायण मंदिर से निकलेगी प्रदर्शन रैली
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। एटक की जिला परिषद की बैठक में मिड-डे मील वर्कर्स यूनियन ने केंद्र व प्रदेश सरकार की नीतियों के खिलाफ मोर्चा खोलने का एलान किया है। बैठक में नेताओं ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार ने हालिया बजट में मिड-डे मील वर्कर्स के मानदेय में कोई बढ़ोतरी नहीं की है और न ही उन्हें नियमित करने के लिए कोई ठोस नीति बनाई है।
बैठक में मिड-डे मील वर्कर्स यूनियन एटक की राज्य अध्यक्ष कमलेश ठाकुर ने कहा कि वर्षों से बेहद कम मानदेय पर काम कर रही इन महिला कर्मियों की अनदेखी की जा रही है, जबकि स्कूलों में बच्चों को पौष्टिक आहार उपलब्ध कराने में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका है। बैठक में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि 12 फरवरी को प्रदेश के किसी भी स्कूल में मिड-डे मील नहीं बनेगा। सभी मिड-डे मील वर्कर्स राष्ट्रीय हड़ताल में शामिल होकर किसानों और मजदूरों के समर्थन में प्रदर्शन करेंगे। प्रदर्शन 12 फरवरी को सुबह 10 बजे लक्ष्मी नारायण मंदिर परिसर से शुरू होगा। यूनियन पदाधिकारियों ने सभी मिड-डे मील वर्कर्स से आह्वान किया है कि वे तय समय पर मंदिर प्रांगण में एकत्रित होकर मांगों के समर्थन में आवाज बुलंद करें। प्रदर्शन के बाद राज्य व केंद्र सरकार को ज्ञापन भेजा जाएगा।
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एटक नेताओं ने नए लेबर कोड और भारत-अमेरिका ट्रेड एग्रीमेंट का भी विरोध किया। उनका कहना है कि ये नीतियां किसानों और मजदूरों के हित में नहीं हैं। यूनियन का आरोप है कि विदेशी उत्पादों के बाजार में आने से महंगाई और बेरोजगारी बढ़ेगी तथा देश के किसानों को नुकसान होगा। पहले से ही किसानों को पर्याप्त सब्सिडी नहीं मिल रही, जिससे उनकी लागत बढ़ रही है।
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मिड-डे मील वर्कर्स ने कहा कि उन्हें किसी प्रकार की नियमित छुट्टी का प्रावधान नहीं है, जो सीधे तौर पर श्रमिक अधिकारों का हनन है। लंबे समय से वे सामाजिक सुरक्षा, न्यूनतम वेतन और नियमितीकरण की मांग उठा रही हैं, लेकिन सरकार की ओर से ठोस कदम नहीं उठाए गए। यूनियन ने यह भी आरोप लगाया कि प्रदेश सरकार ने मिड-डे मील वर्कर्स के लिए 4500 रुपये मानदेय की घोषणा की थी, लेकिन आज तक किसी कर्मी को यह राशि एकमुश्त नहीं मिली। कई कर्मियों को समय पर मानदेय भी नहीं मिल पा रहा है, जिससे उनके सामने आर्थिक संकट खड़ा हो रहा है। उन्होंने कहा कि 12 फरवरी की हड़ताल के माध्यम से सरकार को श्रमिकों की एकजुटता का संदेश दिया। एटक के राज्य सचिव कामरेड प्रवेश चंदेल, जिला अध्यक्ष रेखा ठाकुर, घुमारवीं ब्लॉक अध्यक्ष उर्मिला संख्यान, झंडूता की अध्यक्ष माला चंदेल आदि मौजूद रहे।