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Bilaspur News: ग्राम पंचायत के वार्ड के जातिसूचक नामों को बदलने की उठी मांग

Mon, 13 Apr 2026 11:37 PM IST
शिमला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर Updated Mon, 13 Apr 2026 11:37 PM IST
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Demand raised to change the caste-based names of Gram Panchayat wards
समाजसेवी नरवीर सिंह ठाकुर।
कौड़ावाली पंचायत के वार्ड नंबर पांच और राजस्व रिकॉर्ड पर सवाल
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आजादी के 75 साल बाद भी सरकारी दस्तावेजों में पुराने नाम दर्ज
ग्रामीणों ने प्रशासन से तत्काल संशोधन की उठाई मांग

संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। श्री नयना देवी जी क्षेत्र के स्वारघाट विकास खंड के अंतर्गत ग्राम पंचायत कौड़ावाली में एक वार्ड और राजस्व गांव के नाम को लेकर गंभीर आपत्ति सामने आई है। ग्रामीणों और समाजसेवियों ने आरोप लगाया है कि वार्ड नंबर पांच और एक रेवेन्यू गांव आज भी पुराने और कथित रूप से जातिसूचक पहचान से जुड़े नामों के साथ सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज हैं, जो सामाजिक समानता की भावना के खिलाफ है।

समाजसेवी नरवीर ठाकुर ने इस मामले को गंभीर बताते हुए कहा कि आजादी के 75 वर्ष बीत जाने के बाद भी यदि सरकारी दस्तावेजों में इस तरह के नाम बने रहते हैं, तो यह प्रशासनिक लापरवाही और सामाजिक संवेदनशीलता की कमी को दर्शाता है। लोगों ने इसे सम्मान और समानता के सिद्धांतों के विपरीत बताते हुए तत्काल नाम परिवर्तन की मांग की है। लोगों के अनुसार यह मुद्दा कई वर्ष से चर्चा में रहा है, लेकिन अब तक किसी भी जनप्रतिनिधि या प्रशासनिक स्तर पर ठोस कार्रवाई नहीं हुई। पंचायत, विधानसभा और संसदीय स्तर पर कई प्रतिनिधित्व होने के बावजूद भी यह नाम रिकॉर्ड में यथावत बना हुआ है। बताया कि वार्ड नंबर पांच के साथ एक राजस्व गांव भी पुराने नाम से दर्ज है, जिसे वे सामाजिक दृष्टि से आपत्तिजनक और बदलने योग्य मानते हैं। उनका कहना है कि यह स्थिति क्षेत्र की आधुनिक सामाजिक सोच के अनुरूप नहीं है। कहा कि स्थानीय सरकारी रिकॉर्ड में ऐसे नामों का बने रहना दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने कहा कि उपमंडल स्तर पर तैयार किए गए दस्तावेजों में भी इस ओर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया गया, जिससे यह स्थिति आज तक बनी हुई है। उन्होंने प्रशासन से आग्रह किया कि राजस्व अभिलेखों की समीक्षा कर तत्काल प्रभाव से नामों को संशोधित किया जाए और किसी सम्मानजनक तथा सर्वमान्य नाम को अपनाया जाए।
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ग्रामीणों ने जिला प्रशासन और उपमंडल अधिकारी से मांग की है कि इस मामले की गंभीरता को देखते हुए शीघ्र कार्रवाई की जाए। लोगों का कहना है कि नाम परिवर्तन केवल औपचारिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि सामाजिक सम्मान और समानता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम होगा। स्थानीय निवासियों का मानना है कि यदि प्रशासन इस दिशा में सकारात्मक कदम उठाता है तो यह पूरे क्षेत्र के लिए एक उदाहरण बनेगा। इससे यह संदेश जाएगा कि समाज में सभी वर्गों को समान सम्मान दिया जाता है और पुराने भेदभावपूर्ण प्रतीकों को अब स्थान नहीं दिया जाएगा। उम्मीद जताई है कि प्रशासन इस मुद्दे को गंभीरता से लेते हुए जल्द ही आवश्यक संशोधन करेगा, ताकि क्षेत्र में सामाजिक सौहार्द और समानता को और मजबूती मिल सके।
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