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Bilaspur News: सीमेंट-क्लिंकर की डिमांड घटी, चार हजार ट्रक ऑपरेटर परिवारों पर रोजी-रोटी का संकट
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एसीसी बरमाणा में चार महीने से ढुलाई संकट, बीडीटीएस ने उपायुक्त से मांगा हस्तक्षेप
पहले 10 से 15 हजार मीट्रिक टन प्रतिदिन मिलती थी डिमांड, अब 2 से 3 हजार टन पर सिमटी
संवाद न्यूज एजेंसी
बरमाणा (बिलासपुर)। एसीसी बरमाणा में सीमेंट और क्लिंकर की ढुलाई करने वाले ट्रक ऑपरेटरों के सामने पिछले करीब चार महीने से रोजी-रोटी का संकट खड़ा है। सीमेंट और क्लिंकर की डिमांड में भारी कमी आने से करीब चार हजार परिवार प्रभावित हो रहे हैं। ट्रक ऑपरेटरों के अनुसार पहले प्रतिदिन 10 से 15 हजार मीट्रिक टन तक डिमांड रहती थी, जो अब घटकर महज दो से तीन हजार मीट्रिक टन रह गई है। डिमांड में कमी के चलते बड़ी संख्या में ट्रकों को पर्याप्त ढुलाई का काम नहीं मिल रहा है।
ऑपरेटरों का कहना है कि काम कम होने के बावजूद ट्रकों के खर्च लगातार बने हुए हैं। बैंक की किस्त, बीमा, मरम्मत, टायर, चालक-परिचालकों का वेतन और अन्य खर्चों का भुगतान करना पड़ रहा है। वहीं, ढुलाई का काम कम होने से आमदनी काफी घट गई है। इससे परिवारों का खर्च चलाना मुश्किल हो रहा है। बरमाणा क्षेत्र में बड़ी संख्या में परिवार प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से ट्रांसपोर्ट कारोबार से जुड़े हैं। बीडीटीएस के प्रधान जीत राम गौतम और महासचिव प्रदीप ठाकुर ने बताया कि दि बिलासपुर जिला ट्रक ऑपरेटर सहकारी सभा सीमित बरमाणा पिछले 42 वर्षों से एसीसी बरमाणा से सीमेंट, क्लिंकर और अन्य सामग्री की ढुलाई का काम कर रही है। उन्होंने कहा कि इतने लंबे समय से ट्रांसपोर्टर इस कारोबार से जुड़े हैं और हजारों परिवारों की आजीविका इसी पर निर्भर है। ऐसे में डिमांड में आई भारी कमी ने पूरे ट्रांसपोर्ट क्षेत्र को प्रभावित किया है। उन्होंने बताया कि डिमांड बढ़ाने के लिए एसीसी अदाणी प्रबंधन के समक्ष लगातार मामला उठाया जा रहा है। सभा प्रबंधक समिति ने 17 जुलाई को प्रबंधन को पत्र भेजकर डिमांड बढ़ाने का आग्रह किया। इसके बाद 10 और 21 अगस्त को भी लिखित पत्र दिए गए। दूरभाष के माध्यम से भी प्रबंधन से डिमांड बढ़ाने का आग्रह किया जाता रहा। बैठकों में भी यह मुद्दा प्रमुखता से उठाया गया। बीडीटीएस पदाधिकारियों ने कहा कि यह केवल ट्रक ऑपरेटरों की समस्या नहीं है। ढुलाई का काम कम होने का असर चालक-परिचालकों, मैकेनिकों, स्पेयर पार्ट्स कारोबारियों, ढाबा संचालकों और अन्य छोटे कारोबारियों पर भी पड़ रहा है। इससे बरमाणा क्षेत्र की आर्थिक गतिविधियां प्रभावित हो रही हैं। उन्होंने प्रशासन से मामले को गंभीरता से लेते हुए जल्द हस्तक्षेप करने की मांग की है।
आश्वासन के बाद भी नहीं बढ़ी डिमांड
बीडीटीएस प्रबंधन समिति और एसीसी अदाणी प्रबंधन के बीच 26 अगस्त और दो सितंबर को बैठक हुई। इन बैठकों में ट्रक ऑपरेटरों की समस्या और डिमांड बढ़ाने का मुद्दा उठाया गया। सभा के अनुसार प्रबंधन ने पांच सितंबर तक डिमांड बढ़ाने का आश्वासन दिया था, लेकिन तय समय तक डिमांड में कोई बढ़ोतरी नहीं हुई। इससे ऑपरेटरों की चिंता और बढ़ गई है। अब बीडीटीएस ने उपायुक्त बिलासपुर से मामले में हस्तक्षेप की मांग की है। सभा प्रबंधक समिति ने प्रशासन से एसीसी अदाणी प्रबंधन को सीमेंट और क्लिंकर की डिमांड बढ़ाने के निर्देश देने का आग्रह किया है। ऑपरेटरों का कहना है कि नियमित और पर्याप्त ढुलाई मिलने से ही ट्रकों का संचालन और परिवारों की आजीविका सुचारु रह सकती है।
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चाबी सौंपने और अनशन की चेतावनी
बीडीटीएस ने चेतावनी दी है कि समस्या का जल्द समाधान नहीं हुआ तो ट्रक ऑपरेटर आंदोलन का रास्ता अपनाएंगे। सभा के अनुसार सभी ऑपरेटर अपने-अपने ट्रकों की चाबियां प्रशासन को सौंप सकते हैं। इसके साथ ही परिवार सहित एसीसी अदाणी प्रबंधन के खिलाफ अनशन करने की चेतावनी भी दी गई है।
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पहले 10 से 15 हजार मीट्रिक टन प्रतिदिन मिलती थी डिमांड, अब 2 से 3 हजार टन पर सिमटी
संवाद न्यूज एजेंसी
बरमाणा (बिलासपुर)। एसीसी बरमाणा में सीमेंट और क्लिंकर की ढुलाई करने वाले ट्रक ऑपरेटरों के सामने पिछले करीब चार महीने से रोजी-रोटी का संकट खड़ा है। सीमेंट और क्लिंकर की डिमांड में भारी कमी आने से करीब चार हजार परिवार प्रभावित हो रहे हैं। ट्रक ऑपरेटरों के अनुसार पहले प्रतिदिन 10 से 15 हजार मीट्रिक टन तक डिमांड रहती थी, जो अब घटकर महज दो से तीन हजार मीट्रिक टन रह गई है। डिमांड में कमी के चलते बड़ी संख्या में ट्रकों को पर्याप्त ढुलाई का काम नहीं मिल रहा है।
ऑपरेटरों का कहना है कि काम कम होने के बावजूद ट्रकों के खर्च लगातार बने हुए हैं। बैंक की किस्त, बीमा, मरम्मत, टायर, चालक-परिचालकों का वेतन और अन्य खर्चों का भुगतान करना पड़ रहा है। वहीं, ढुलाई का काम कम होने से आमदनी काफी घट गई है। इससे परिवारों का खर्च चलाना मुश्किल हो रहा है। बरमाणा क्षेत्र में बड़ी संख्या में परिवार प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से ट्रांसपोर्ट कारोबार से जुड़े हैं। बीडीटीएस के प्रधान जीत राम गौतम और महासचिव प्रदीप ठाकुर ने बताया कि दि बिलासपुर जिला ट्रक ऑपरेटर सहकारी सभा सीमित बरमाणा पिछले 42 वर्षों से एसीसी बरमाणा से सीमेंट, क्लिंकर और अन्य सामग्री की ढुलाई का काम कर रही है। उन्होंने कहा कि इतने लंबे समय से ट्रांसपोर्टर इस कारोबार से जुड़े हैं और हजारों परिवारों की आजीविका इसी पर निर्भर है। ऐसे में डिमांड में आई भारी कमी ने पूरे ट्रांसपोर्ट क्षेत्र को प्रभावित किया है। उन्होंने बताया कि डिमांड बढ़ाने के लिए एसीसी अदाणी प्रबंधन के समक्ष लगातार मामला उठाया जा रहा है। सभा प्रबंधक समिति ने 17 जुलाई को प्रबंधन को पत्र भेजकर डिमांड बढ़ाने का आग्रह किया। इसके बाद 10 और 21 अगस्त को भी लिखित पत्र दिए गए। दूरभाष के माध्यम से भी प्रबंधन से डिमांड बढ़ाने का आग्रह किया जाता रहा। बैठकों में भी यह मुद्दा प्रमुखता से उठाया गया। बीडीटीएस पदाधिकारियों ने कहा कि यह केवल ट्रक ऑपरेटरों की समस्या नहीं है। ढुलाई का काम कम होने का असर चालक-परिचालकों, मैकेनिकों, स्पेयर पार्ट्स कारोबारियों, ढाबा संचालकों और अन्य छोटे कारोबारियों पर भी पड़ रहा है। इससे बरमाणा क्षेत्र की आर्थिक गतिविधियां प्रभावित हो रही हैं। उन्होंने प्रशासन से मामले को गंभीरता से लेते हुए जल्द हस्तक्षेप करने की मांग की है।
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आश्वासन के बाद भी नहीं बढ़ी डिमांड
बीडीटीएस प्रबंधन समिति और एसीसी अदाणी प्रबंधन के बीच 26 अगस्त और दो सितंबर को बैठक हुई। इन बैठकों में ट्रक ऑपरेटरों की समस्या और डिमांड बढ़ाने का मुद्दा उठाया गया। सभा के अनुसार प्रबंधन ने पांच सितंबर तक डिमांड बढ़ाने का आश्वासन दिया था, लेकिन तय समय तक डिमांड में कोई बढ़ोतरी नहीं हुई। इससे ऑपरेटरों की चिंता और बढ़ गई है। अब बीडीटीएस ने उपायुक्त बिलासपुर से मामले में हस्तक्षेप की मांग की है। सभा प्रबंधक समिति ने प्रशासन से एसीसी अदाणी प्रबंधन को सीमेंट और क्लिंकर की डिमांड बढ़ाने के निर्देश देने का आग्रह किया है। ऑपरेटरों का कहना है कि नियमित और पर्याप्त ढुलाई मिलने से ही ट्रकों का संचालन और परिवारों की आजीविका सुचारु रह सकती है।
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चाबी सौंपने और अनशन की चेतावनी
बीडीटीएस ने चेतावनी दी है कि समस्या का जल्द समाधान नहीं हुआ तो ट्रक ऑपरेटर आंदोलन का रास्ता अपनाएंगे। सभा के अनुसार सभी ऑपरेटर अपने-अपने ट्रकों की चाबियां प्रशासन को सौंप सकते हैं। इसके साथ ही परिवार सहित एसीसी अदाणी प्रबंधन के खिलाफ अनशन करने की चेतावनी भी दी गई है।