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अब ग्रामीण बंद करेंगे माइनिंग क्षेत्र में काम
Updated Sat, 21 Jul 2018 12:16 AM IST
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दूसरे दिन भी चला बुलडोजर, साइट आफिस सहित अन्य निर्माण ध्वस्त
- फोटो : अमर उजाला
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सरोज पाठक
बरमाणा(बिलासपुर)। एसीसी माइनिंग क्षेत्र में जद्द में आए पांच गांव के लोग अब आंदोलन करने जा रहे हैं। प्रभावित 26 जुलाई से माइनिंग क्षेत्र में आंदोलन कर काम को बंद करेंगे। लोगों ने साफ कर दिया है कि जिला प्रशासन की बार-बार अनदेखी के कारण आज लोग जाग कर रातें काटने को मजबूर हैं। हालांकि निरीक्षण करने पहुंची टीम ने भी सर्वे में पाया है कि गांव माइनिंग की जद्द में हैं लेकिन इसके बाद भी जिला प्रशासन इस संबंध में कोई कदम नहीं उठा रहा है।
गौर रहे कि दो महीने पहले एडीएम बिलासपुर की अध्यक्षता में क्षेत्र का निरीक्षण किया था जिसकी रिपोर्ट तैयार कर उपायुक्त को सौंपी गई थी। उसके बाद भी अभी तक उक्त गांव के लोगों की सुरक्षा के लिए प्रशासन की ओर से कोई कदम नहीं उठाए जा सके हैं।
प्रशासन की अनदेखी पर ग्रामीणों ने 15 दिन पहले एसडीएम बिलापसुर को ज्ञापन सौंपा था। उसमें ग्रामीणों ने प्रशासन को 26 जुलाई तक का अल्टीमेटम देकर समस्याओं के स्थायी समाधान की मांग की थी। एसडीएम ने भी समस्या को लेकर कोई कदम नहीं उठाए।
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उल्लेखनीय है कि एसीसी के माइनिंग एरिया कुनणु, धौन कोठी, बलोह और बरयाही में हुई प्रशासन की संयुक्त स्पॉट विजिट में पाया गया था कि माइनिंग के कारण उक्त गांव खतरे में हैं लेकिन रिपोर्ट बने दो महीने का समय हो चुका है। लोगों के बार-बार मांग के बाद भी प्रशासन कुंभकर्णी की नींद सो रहा है।
एसीसी प्रभावित एवं विस्थापित सभा के अध्यक्ष भगत सिंह वर्मा का कहना है कि जांच भी हुई और उचित रिपोर्ट भी स्पॉट विजिट पर बनी। यह रिपोर्ट उपायुक्त को दे दी गई लेकिन उससे आगे प्रशासन इस पर कोई कार्रवाई करने को तैयार नहीं। कहा कि भारी ब्लास्टिंग से न केवल वहां के लोगों के घर टूट रहे हैं, बल्कि उससे होने वाले प्रदूषण का शिकार भी लोग हो रहे हैं।
वार्ड सदस्य सुनील गौतम, बीडीसी भुवनेश गौतम और भगत सिंह वर्मा सहित अन्य ग्रामीणों ने बताया कि 26 जुलाई से प्रशासन को दिए अल्टीमेटम के अनुसार वो एसीसी के माइनिंग क्षेत्र को बंद कर देंगे। उन्होंने कहा कि प्रशासन और सरकारें जनता की सुरक्षा के लिए होती हैं लेकिन यहां जनता अनाथों की तरह सड़कों पर है और प्रशासनिक अधिकारी आंखें बंद करके बैठे हैं।
इधर, इस बाबत एसडीएम को फोन किया गया तो उनके पीए ने चार बजे यह कह कर बात करवाने से मना कर दिया कि मैडम कोर्ट में है। जबकि उपायुक्त कार्यालय में भी फोन काल नहीं उठाई गई।
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बरमाणा(बिलासपुर)। एसीसी माइनिंग क्षेत्र में जद्द में आए पांच गांव के लोग अब आंदोलन करने जा रहे हैं। प्रभावित 26 जुलाई से माइनिंग क्षेत्र में आंदोलन कर काम को बंद करेंगे। लोगों ने साफ कर दिया है कि जिला प्रशासन की बार-बार अनदेखी के कारण आज लोग जाग कर रातें काटने को मजबूर हैं। हालांकि निरीक्षण करने पहुंची टीम ने भी सर्वे में पाया है कि गांव माइनिंग की जद्द में हैं लेकिन इसके बाद भी जिला प्रशासन इस संबंध में कोई कदम नहीं उठा रहा है।
गौर रहे कि दो महीने पहले एडीएम बिलासपुर की अध्यक्षता में क्षेत्र का निरीक्षण किया था जिसकी रिपोर्ट तैयार कर उपायुक्त को सौंपी गई थी। उसके बाद भी अभी तक उक्त गांव के लोगों की सुरक्षा के लिए प्रशासन की ओर से कोई कदम नहीं उठाए जा सके हैं।
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प्रशासन की अनदेखी पर ग्रामीणों ने 15 दिन पहले एसडीएम बिलापसुर को ज्ञापन सौंपा था। उसमें ग्रामीणों ने प्रशासन को 26 जुलाई तक का अल्टीमेटम देकर समस्याओं के स्थायी समाधान की मांग की थी। एसडीएम ने भी समस्या को लेकर कोई कदम नहीं उठाए।
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उल्लेखनीय है कि एसीसी के माइनिंग एरिया कुनणु, धौन कोठी, बलोह और बरयाही में हुई प्रशासन की संयुक्त स्पॉट विजिट में पाया गया था कि माइनिंग के कारण उक्त गांव खतरे में हैं लेकिन रिपोर्ट बने दो महीने का समय हो चुका है। लोगों के बार-बार मांग के बाद भी प्रशासन कुंभकर्णी की नींद सो रहा है।
एसीसी प्रभावित एवं विस्थापित सभा के अध्यक्ष भगत सिंह वर्मा का कहना है कि जांच भी हुई और उचित रिपोर्ट भी स्पॉट विजिट पर बनी। यह रिपोर्ट उपायुक्त को दे दी गई लेकिन उससे आगे प्रशासन इस पर कोई कार्रवाई करने को तैयार नहीं। कहा कि भारी ब्लास्टिंग से न केवल वहां के लोगों के घर टूट रहे हैं, बल्कि उससे होने वाले प्रदूषण का शिकार भी लोग हो रहे हैं।
वार्ड सदस्य सुनील गौतम, बीडीसी भुवनेश गौतम और भगत सिंह वर्मा सहित अन्य ग्रामीणों ने बताया कि 26 जुलाई से प्रशासन को दिए अल्टीमेटम के अनुसार वो एसीसी के माइनिंग क्षेत्र को बंद कर देंगे। उन्होंने कहा कि प्रशासन और सरकारें जनता की सुरक्षा के लिए होती हैं लेकिन यहां जनता अनाथों की तरह सड़कों पर है और प्रशासनिक अधिकारी आंखें बंद करके बैठे हैं।
इधर, इस बाबत एसडीएम को फोन किया गया तो उनके पीए ने चार बजे यह कह कर बात करवाने से मना कर दिया कि मैडम कोर्ट में है। जबकि उपायुक्त कार्यालय में भी फोन काल नहीं उठाई गई।