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Bilaspur News: युवती की मौत के मामले में 60 वर्षीय महिला को जमानत
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पारिवारिक कहासुनी के बाद जहरीला पदार्थ खाने से हुई थी मौत
सत्र न्यायालय ने शर्तों के साथ दी राहत, तलाई थाने में दर्ज है मामला
महिला 22 जुलाई से न्यायिक हिरासत में थी, जांच में भी हुई शामिल
अदालत ने एक लाख रुपये के निजी मुचलके पर जमानत की मंजूर
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। तलाई थाना क्षेत्र में जहरीला पदार्थ खाने से युवती की मौत के मामले में गिरफ्तार करीब 60 वर्षीय महिला को बिलासपुर की सत्र अदालत ने जमानत दे दी है। सत्र न्यायालय ने महिला की जमानत याचिका स्वीकार करते हुए एक लाख रुपये के निजी मुचलके और इतनी ही राशि की एक जमानत पेश करने के निर्देश दिए हैं। अदालत ने जमानत के साथ कई शर्तें भी लगाई हैं। मामला पुलिस थाना तलाई में दर्ज एफआईआर से जुड़ा है। जमानत याचिका पर सत्र न्यायालय ने 14 अगस्त को फैसला सुनाया।
पुलिस के अनुसार 20 जुलाई को युवती ने जहरीला पदार्थ खा लिया था। उसे पहले सीएचसी बरठीं ले जाया गया, जहां से हालत गंभीर होने पर एम्स बिलासपुर रेफर किया गया। उपचार के दौरान 21 जुलाई को उसकी मौत हो गई। पोस्टमार्टम के बाद विसरा जांच के लिए सुरक्षित रखा गया था। पुलिस ने मृतका के परिजन के बयान के आधार पर मामला दर्ज किया। अभियोजन के अनुसार घटना से पहले परिवार के सदस्यों के बीच बुजुर्ग मां की देखभाल और जमीन संबंधी मामलों को लेकर विवाद चल रहा था। आरोप है कि घटना से कुछ समय पहले महिला ने मृतका के साथ गाली-गलौज की थी, जिसके बाद वह रोते हुए अपने कमरे में चली गई और बाद में जहरीला पदार्थ खा लिया। जमानत याचिका में महिला ने आरोपों को बढ़ा-चढ़ाकर पेश करने की बात कही। बचाव पक्ष का कहना था कि परिवार में लंबे समय से विवाद चल रहा था और घटना भी इसी पारिवारिक विवाद के दौरान हुई कहासुनी का परिणाम थी। महिला ने यह भी कहा कि उस पर मृतका को जहर देने, मारपीट करने या प्रत्यक्ष रूप से आत्महत्या के लिए उकसाने का आरोप नहीं है।
याचिका में यह भी बताया गया कि मृतका के कमरे और सामान की तलाशी के बावजूद कोई सुसाइड नोट बरामद नहीं हुआ। महिला 22 जुलाई को अपने बेटे के साथ पुलिस के समक्ष पेश होकर जांच में शामिल हुई थी। अदालत ने कहा कि जमानत के स्तर पर साक्ष्यों की विस्तृत जांच कर आरोपी के दोषी या निर्दोष होने का अंतिम निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता। उपलब्ध सामग्री में पारिवारिक विवाद और घटना से पहले कहासुनी का उल्लेख है, लेकिन यह तय करना कि कथित शब्द और आचरण बीएनएस की धारा 108 के तहत आत्महत्या के लिए उकसाने के दायरे में आते हैं या नहीं, ट्रायल के दौरान साक्ष्यों के आधार पर तय होगा। अदालत ने यह भी ध्यान में रखा कि महिला करीब 60 वर्ष की है, बिलासपुर की स्थायी निवासी है, जांच में शामिल हो चुकी है और 22 जुलाई से न्यायिक हिरासत में थी। पुलिस की ओर से महिला के फरार होने या साक्ष्यों से छेड़छाड़ करने की कोई विशिष्ट घटना नहीं बताई गई। अदालत ने जमानत मंजूर करते हुए महिला को एक लाख रुपये के निजी मुचलके और इतनी ही राशि की एक जमानत पेश करने के निर्देश दिए। उसे हर तारीख पर अदालत में उपस्थित होना होगा और जांच में सहयोग जारी रखना होगा। इसके अलावा महिला को गवाहों को धमकाने या प्रभावित करने, इसी तरह के अपराध में शामिल होने और थाना तलाई के अधिकार क्षेत्र से बाहर जाने पर प्रतिबंध लगाया गया है। उसे प्रत्येक माह की 10 तारीख को चालान पेश होने तक थाना तलाई के एसएचओ के समक्ष रिपोर्ट करना होगा। अदालत ने स्पष्ट किया कि जमानत आदेश में की गई टिप्पणियां केवल जमानत याचिका के निस्तारण तक सीमित हैं और मामले के गुण-दोष पर इनका कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा।
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सत्र न्यायालय ने शर्तों के साथ दी राहत, तलाई थाने में दर्ज है मामला
महिला 22 जुलाई से न्यायिक हिरासत में थी, जांच में भी हुई शामिल
अदालत ने एक लाख रुपये के निजी मुचलके पर जमानत की मंजूर
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। तलाई थाना क्षेत्र में जहरीला पदार्थ खाने से युवती की मौत के मामले में गिरफ्तार करीब 60 वर्षीय महिला को बिलासपुर की सत्र अदालत ने जमानत दे दी है। सत्र न्यायालय ने महिला की जमानत याचिका स्वीकार करते हुए एक लाख रुपये के निजी मुचलके और इतनी ही राशि की एक जमानत पेश करने के निर्देश दिए हैं। अदालत ने जमानत के साथ कई शर्तें भी लगाई हैं। मामला पुलिस थाना तलाई में दर्ज एफआईआर से जुड़ा है। जमानत याचिका पर सत्र न्यायालय ने 14 अगस्त को फैसला सुनाया।
पुलिस के अनुसार 20 जुलाई को युवती ने जहरीला पदार्थ खा लिया था। उसे पहले सीएचसी बरठीं ले जाया गया, जहां से हालत गंभीर होने पर एम्स बिलासपुर रेफर किया गया। उपचार के दौरान 21 जुलाई को उसकी मौत हो गई। पोस्टमार्टम के बाद विसरा जांच के लिए सुरक्षित रखा गया था। पुलिस ने मृतका के परिजन के बयान के आधार पर मामला दर्ज किया। अभियोजन के अनुसार घटना से पहले परिवार के सदस्यों के बीच बुजुर्ग मां की देखभाल और जमीन संबंधी मामलों को लेकर विवाद चल रहा था। आरोप है कि घटना से कुछ समय पहले महिला ने मृतका के साथ गाली-गलौज की थी, जिसके बाद वह रोते हुए अपने कमरे में चली गई और बाद में जहरीला पदार्थ खा लिया। जमानत याचिका में महिला ने आरोपों को बढ़ा-चढ़ाकर पेश करने की बात कही। बचाव पक्ष का कहना था कि परिवार में लंबे समय से विवाद चल रहा था और घटना भी इसी पारिवारिक विवाद के दौरान हुई कहासुनी का परिणाम थी। महिला ने यह भी कहा कि उस पर मृतका को जहर देने, मारपीट करने या प्रत्यक्ष रूप से आत्महत्या के लिए उकसाने का आरोप नहीं है।
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याचिका में यह भी बताया गया कि मृतका के कमरे और सामान की तलाशी के बावजूद कोई सुसाइड नोट बरामद नहीं हुआ। महिला 22 जुलाई को अपने बेटे के साथ पुलिस के समक्ष पेश होकर जांच में शामिल हुई थी। अदालत ने कहा कि जमानत के स्तर पर साक्ष्यों की विस्तृत जांच कर आरोपी के दोषी या निर्दोष होने का अंतिम निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता। उपलब्ध सामग्री में पारिवारिक विवाद और घटना से पहले कहासुनी का उल्लेख है, लेकिन यह तय करना कि कथित शब्द और आचरण बीएनएस की धारा 108 के तहत आत्महत्या के लिए उकसाने के दायरे में आते हैं या नहीं, ट्रायल के दौरान साक्ष्यों के आधार पर तय होगा। अदालत ने यह भी ध्यान में रखा कि महिला करीब 60 वर्ष की है, बिलासपुर की स्थायी निवासी है, जांच में शामिल हो चुकी है और 22 जुलाई से न्यायिक हिरासत में थी। पुलिस की ओर से महिला के फरार होने या साक्ष्यों से छेड़छाड़ करने की कोई विशिष्ट घटना नहीं बताई गई। अदालत ने जमानत मंजूर करते हुए महिला को एक लाख रुपये के निजी मुचलके और इतनी ही राशि की एक जमानत पेश करने के निर्देश दिए। उसे हर तारीख पर अदालत में उपस्थित होना होगा और जांच में सहयोग जारी रखना होगा। इसके अलावा महिला को गवाहों को धमकाने या प्रभावित करने, इसी तरह के अपराध में शामिल होने और थाना तलाई के अधिकार क्षेत्र से बाहर जाने पर प्रतिबंध लगाया गया है। उसे प्रत्येक माह की 10 तारीख को चालान पेश होने तक थाना तलाई के एसएचओ के समक्ष रिपोर्ट करना होगा। अदालत ने स्पष्ट किया कि जमानत आदेश में की गई टिप्पणियां केवल जमानत याचिका के निस्तारण तक सीमित हैं और मामले के गुण-दोष पर इनका कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा।
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