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Bilaspur News: जमीन पर दोनों पक्षों को यथास्थिति बनाए रखने के आदेश
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घुमारवीं सिविल कोर्ट का फैसला, वसीयत और गिफ्ट डीड को लेकर विवाद
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। घुमारवीं की सिविल जज कोर्ट नंबर-3 ने थंडोरा गांव की 12-08 बीघा जमीन से जुड़े विवाद में दोनों पक्षों को यथास्थिति बनाए रखने के आदेश दिए हैं। अदालत ने स्पष्ट किया कि मुख्य वाद के लंबित रहने तक जमीन की प्रकृति और कब्जे में बदलाव नहीं किया जाएगा और न ही जमीन का हस्तांतरण किया जा सकेगा। अदालत ने प्रथम दृष्टया मामला, अपूरणीय क्षति की आशंका और सुविधा के संतुलन को देखते हुए यह आदेश पारित किया है।
मामला दो पक्षों के बीच जमीन के स्वामित्व और हस्तांतरण को लेकर चल रहे विवाद से संबंधित है। सिविल जज कोर्ट नंबर-3 घुमारवीं की अदालत ने 14 अगस्त 2026 को आदेश सुनाया। आवेदकों ने अदालत में दायर आवेदन में दावा किया था कि थंडोरा में स्थित 12-08 बीघा जमीन संयुक्त हिंदू परिवार की पैतृक और सहदायिक संपत्ति है। यह जमीन खाता/खतौनी नंबर 8/8 और खसरा नंबर 53, 93, 110 व 142 में दर्ज है। आवेदकों का कहना था कि इस संपत्ति पर परिवार के सदस्यों का जन्म से ही अधिकार है। प्रतिवादियों ने आवेदकों के दावे को खारिज करते हुए कहा कि विवादित जमीन संयुक्त पैतृक संपत्ति नहीं है। उनका कहना था कि पूर्व स्वामी के पिता ने 11 सितंबर 1970 की वसीयत के माध्यम से संपत्ति उन्हें दी थी। इसलिए उनके हाथ में यह स्व-अर्जित संपत्ति थी। प्रतिवादियों के अनुसार 22 अगस्त 2025 की वसीयत में अलग-अलग संपत्तियां विभिन्न लाभार्थियों के पक्ष में की गई थीं। इसके साथ ही 1 सितंबर 2025 को पौत्र के पक्ष में गिफ्ट डीड भी की गई थी। उन्होंने वसीयत और गिफ्ट डीड को वैध बताते हुए आवेदकों की ओर से लगाए गए आरोपों को गलत बताया। मामले में दो अन्य प्रतिवादियों ने आवेदकों के आवेदन में कही गई बातों को सही माना और उनके पक्ष का समर्थन किया। उन्होंने भी अदालत से आवेदन मंजूर करने का आग्रह किया। अदालत ने अपने आदेश में कहा कि दोनों पक्षों के बीच यह विवाद है कि जमीन संयुक्त स्वामित्व और कब्जे वाली पैतृक सहदायिक संपत्ति है या पूर्व स्वामी की स्व-अर्जित संपत्ति। वसीयत, गिफ्ट डीड और उनके आधार पर हुई राजस्व प्रविष्टियों की वैधता को लेकर भी विवाद है। अदालत ने कहा कि इन दावों और प्रतिदावों का अंतिम निर्णय दोनों पक्षों की ओर से प्रस्तुत किए जाने वाले ठोस और विश्वसनीय साक्ष्यों के आधार पर मुख्य वाद में किया जाएगा। इस स्तर पर विवाद के अंतिम गुण-दोष पर कोई निष्कर्ष नहीं दिया जा रहा है। अदालत ने कहा कि विवादित संपत्ति अचल है और मामले का फैसला होने में समय लग सकता है। ऐसी स्थिति में संपत्ति की स्थिति सुरक्षित रखना और आगे होने वाले विवाद तथा मुकदमेबाजी की संभावना को रोकना आवश्यक है। अदालत ने प्रथम दृष्टया मामला, अपूरणीय नुकसान की आशंका और सुविधा के संतुलन को देखते हुए आवेदन स्वीकार कर लिया। इसके तहत दोनों पक्षों को मुख्य वाद के अंतिम निपटारे तक विवादित जमीन की प्रकृति, कब्जे और हस्तांतरण के संबंध में यथास्थिति बनाए रखने के निर्देश दिए गए हैं। आवेदन का निपटारा करते हुए इसे मुख्य मामले की फाइल के साथ संलग्न करने के आदेश भी दिए गए।
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संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। घुमारवीं की सिविल जज कोर्ट नंबर-3 ने थंडोरा गांव की 12-08 बीघा जमीन से जुड़े विवाद में दोनों पक्षों को यथास्थिति बनाए रखने के आदेश दिए हैं। अदालत ने स्पष्ट किया कि मुख्य वाद के लंबित रहने तक जमीन की प्रकृति और कब्जे में बदलाव नहीं किया जाएगा और न ही जमीन का हस्तांतरण किया जा सकेगा। अदालत ने प्रथम दृष्टया मामला, अपूरणीय क्षति की आशंका और सुविधा के संतुलन को देखते हुए यह आदेश पारित किया है।
मामला दो पक्षों के बीच जमीन के स्वामित्व और हस्तांतरण को लेकर चल रहे विवाद से संबंधित है। सिविल जज कोर्ट नंबर-3 घुमारवीं की अदालत ने 14 अगस्त 2026 को आदेश सुनाया। आवेदकों ने अदालत में दायर आवेदन में दावा किया था कि थंडोरा में स्थित 12-08 बीघा जमीन संयुक्त हिंदू परिवार की पैतृक और सहदायिक संपत्ति है। यह जमीन खाता/खतौनी नंबर 8/8 और खसरा नंबर 53, 93, 110 व 142 में दर्ज है। आवेदकों का कहना था कि इस संपत्ति पर परिवार के सदस्यों का जन्म से ही अधिकार है। प्रतिवादियों ने आवेदकों के दावे को खारिज करते हुए कहा कि विवादित जमीन संयुक्त पैतृक संपत्ति नहीं है। उनका कहना था कि पूर्व स्वामी के पिता ने 11 सितंबर 1970 की वसीयत के माध्यम से संपत्ति उन्हें दी थी। इसलिए उनके हाथ में यह स्व-अर्जित संपत्ति थी। प्रतिवादियों के अनुसार 22 अगस्त 2025 की वसीयत में अलग-अलग संपत्तियां विभिन्न लाभार्थियों के पक्ष में की गई थीं। इसके साथ ही 1 सितंबर 2025 को पौत्र के पक्ष में गिफ्ट डीड भी की गई थी। उन्होंने वसीयत और गिफ्ट डीड को वैध बताते हुए आवेदकों की ओर से लगाए गए आरोपों को गलत बताया। मामले में दो अन्य प्रतिवादियों ने आवेदकों के आवेदन में कही गई बातों को सही माना और उनके पक्ष का समर्थन किया। उन्होंने भी अदालत से आवेदन मंजूर करने का आग्रह किया। अदालत ने अपने आदेश में कहा कि दोनों पक्षों के बीच यह विवाद है कि जमीन संयुक्त स्वामित्व और कब्जे वाली पैतृक सहदायिक संपत्ति है या पूर्व स्वामी की स्व-अर्जित संपत्ति। वसीयत, गिफ्ट डीड और उनके आधार पर हुई राजस्व प्रविष्टियों की वैधता को लेकर भी विवाद है। अदालत ने कहा कि इन दावों और प्रतिदावों का अंतिम निर्णय दोनों पक्षों की ओर से प्रस्तुत किए जाने वाले ठोस और विश्वसनीय साक्ष्यों के आधार पर मुख्य वाद में किया जाएगा। इस स्तर पर विवाद के अंतिम गुण-दोष पर कोई निष्कर्ष नहीं दिया जा रहा है। अदालत ने कहा कि विवादित संपत्ति अचल है और मामले का फैसला होने में समय लग सकता है। ऐसी स्थिति में संपत्ति की स्थिति सुरक्षित रखना और आगे होने वाले विवाद तथा मुकदमेबाजी की संभावना को रोकना आवश्यक है। अदालत ने प्रथम दृष्टया मामला, अपूरणीय नुकसान की आशंका और सुविधा के संतुलन को देखते हुए आवेदन स्वीकार कर लिया। इसके तहत दोनों पक्षों को मुख्य वाद के अंतिम निपटारे तक विवादित जमीन की प्रकृति, कब्जे और हस्तांतरण के संबंध में यथास्थिति बनाए रखने के निर्देश दिए गए हैं। आवेदन का निपटारा करते हुए इसे मुख्य मामले की फाइल के साथ संलग्न करने के आदेश भी दिए गए।
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