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कीरतपुर-नेरचौक फोरलेन के अप्रूवड रोड अलाइनमेंट प्लान पर डीएफओ ने मांगी रिपोर्ट
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बिलासपुर। अतिरिक्त मुख्य सचिव वन विभाग के आदेशों पर वनमंडलाधिकारी बिलासपुर ने कीरतपुर-नेरचौक फोरलेन भूमि अधिग्रहण की विशेष इकाई से उक्त फोरलेन के अप्रूवड रोड अलाइनमेंट प्लान में किए गए आंशिक और बड़े स्तर के बदलाव पर रिपोर्ट मांगी है।
डीएफओ बिलासपुर ने अपने कार्यालय के पत्र संख्या क्रमांक 3770 में 27 अगस्त को यह आदेश जारी किए हैं। विभाग ने उक्त प्लान में एनएचएआई द्वारा किए गए मनमर्जी के बदलाव पर विशेष इकाई से रिपोर्ट तैयार करने को कहा है। डीएफओ बिलासपुर ने अपने आदेशों में कहा है कि 16 नबंवर 2018 को तहसील श्री नयना देवी जी स्थित स्वारघाट व सदर के करीब सात गांवों में हुए बदलाव की पुष्टि आपके द्वारा की गई है। इसलिए उपरोक्त मुहालों में जो बदलाव हुआ है। उन मुहालों में कितना आंशिक और कितना बड़ा बदलाव हुआघ है। इसके बारे में समिति और इस कार्यालय को तुरंत रिपोर्ट उपलब्ध करवाना सुनिश्चित करें व इस पत्र पर कार्रवाई करना सुनिश्चित करें।
गौरतलब है कि साल 2018 में फोरलेन विस्थापित एवं प्रभावित की शिकायत पर वनमंडलाधिकारी बिलासपुर के आग्रह पर उपायुक्त जिला बिलासपुर ने एक कमेटी का गठन किया। जिसे उक्त परियोजना के अप्रूवड रोड अलाइनमेंट प्लान में हुए बदलाव की जांच के आदेश जारी किए थे। जिसमें गठित कमेटी ने डडनाल, जंगल, थापना, टाली, तुन्नु, पट्टा, ढलयार आदि मुहालों में उक्त प्लान में हुए बदलाव की नियमानुसार पुष्टि की थी। लेकिन यह पुष्टि नहीं की थी कि उपरोक्त खसरा नंबरों में कहां कितना आंशिक और कहां कितना बड़ा बदलाव हुआ है व इस संदर्भ में समिति ने पर्यावरण वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय देहरादून, परियोजना निदेशक एनएचएआई मंडी अतिरिक्त मुख्य सचिव वन सरकार हिमाचल प्रदेश शिमला आदि कुल 15 विभागों को स्पीड पोस्ट के माध्यम से शिकायत भेजी थी। जिस पर अब यह कार्रवाई की जा रही है।
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इनसेट
फोरलेन विस्थापित एवं प्रभावित समिति के उपप्रधान अशोक कुमार, राकेश कुमार, चिंता देवी, बलदेव, श्री नयना देवी गांव मेहलां के सीता राम, रतन लाल, जगदीश राम, सेवानिवृत्त अध्यापक जगत राम आदि ने कहा कि फोरलेन में बरती जा रही अनियमितताओं को लेकर कार्रवाई सिर्फ कागजों में ही की जा रही है। जबकि जमीनी स्तर पर इनका कोई पालन नहीं किया जा रहा है।
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डीएफओ बिलासपुर ने अपने कार्यालय के पत्र संख्या क्रमांक 3770 में 27 अगस्त को यह आदेश जारी किए हैं। विभाग ने उक्त प्लान में एनएचएआई द्वारा किए गए मनमर्जी के बदलाव पर विशेष इकाई से रिपोर्ट तैयार करने को कहा है। डीएफओ बिलासपुर ने अपने आदेशों में कहा है कि 16 नबंवर 2018 को तहसील श्री नयना देवी जी स्थित स्वारघाट व सदर के करीब सात गांवों में हुए बदलाव की पुष्टि आपके द्वारा की गई है। इसलिए उपरोक्त मुहालों में जो बदलाव हुआ है। उन मुहालों में कितना आंशिक और कितना बड़ा बदलाव हुआघ है। इसके बारे में समिति और इस कार्यालय को तुरंत रिपोर्ट उपलब्ध करवाना सुनिश्चित करें व इस पत्र पर कार्रवाई करना सुनिश्चित करें।
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गौरतलब है कि साल 2018 में फोरलेन विस्थापित एवं प्रभावित की शिकायत पर वनमंडलाधिकारी बिलासपुर के आग्रह पर उपायुक्त जिला बिलासपुर ने एक कमेटी का गठन किया। जिसे उक्त परियोजना के अप्रूवड रोड अलाइनमेंट प्लान में हुए बदलाव की जांच के आदेश जारी किए थे। जिसमें गठित कमेटी ने डडनाल, जंगल, थापना, टाली, तुन्नु, पट्टा, ढलयार आदि मुहालों में उक्त प्लान में हुए बदलाव की नियमानुसार पुष्टि की थी। लेकिन यह पुष्टि नहीं की थी कि उपरोक्त खसरा नंबरों में कहां कितना आंशिक और कहां कितना बड़ा बदलाव हुआ है व इस संदर्भ में समिति ने पर्यावरण वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय देहरादून, परियोजना निदेशक एनएचएआई मंडी अतिरिक्त मुख्य सचिव वन सरकार हिमाचल प्रदेश शिमला आदि कुल 15 विभागों को स्पीड पोस्ट के माध्यम से शिकायत भेजी थी। जिस पर अब यह कार्रवाई की जा रही है।
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फोरलेन विस्थापित एवं प्रभावित समिति के उपप्रधान अशोक कुमार, राकेश कुमार, चिंता देवी, बलदेव, श्री नयना देवी गांव मेहलां के सीता राम, रतन लाल, जगदीश राम, सेवानिवृत्त अध्यापक जगत राम आदि ने कहा कि फोरलेन में बरती जा रही अनियमितताओं को लेकर कार्रवाई सिर्फ कागजों में ही की जा रही है। जबकि जमीनी स्तर पर इनका कोई पालन नहीं किया जा रहा है।