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समय पर सही काउंसलिंग, चिकित्सा से नशे से बाहर आ सकते हैं बच्चे : डॉ. अंकुर
Thu, 20 Feb 2025 11:58 PM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर
Updated Thu, 20 Feb 2025 11:58 PM IST
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-बच्चों को नशे की लत से बचाने के लिए माता-पिता का मार्गदर्शन जरूरी
-माता-पिता घर में रखें सकारात्मक माहौल, गतिविधियों पर रखें नजर
-सख्ती की बजाय बच्चों से अभिभावक रखें दोस्ती का वातावरण
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। आधुनिक दौर में बच्चों के बीच नशे की बढ़ती प्रवृत्ति गंभीर चिंता का विषय बन गई है। नशे की गिरफ्त में आने वाले बच्चे न केवल शारीरिक और मानसिक रूप से प्रभावित होते हैं, बल्कि उनका भविष्य भी अंधकारमय हो जाता है। ऐसे में माता-पिता की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण हो जाती है। बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. अंकुर धर्माणी ने कहा कि सही मार्गदर्शन, प्रेम और सतर्कता से माता-पिता अपने बच्चों को इस बुरी लत से बचा सकते हैं।
उन्होंने कहा कि बच्चों को नशे से दूर रखने के लिए माता-पिता घर में सकारात्मक माहौल बनाएं। बच्चे जिस वातावरण में बड़े होते हैं, वही उनके व्यक्तित्व को आकार देता है। यदि घर में प्रेम, समझ और सहयोग का माहौल होगा, तो बच्चे अपने मन की बात खुलकर कह सकेंगे और गलत संगत में पड़ने की संभावना कम होगी। बच्चों को नशे से बचाने के लिए जरूरी है कि माता-पिता उनके साथ समय बिताएं और उनकी चिंताओं को समझें। उनसे नशे के दुष्प्रभावों के बारे में स्पष्ट रूप से बात करें ताकि वे जान सकें कि यह उनके जीवन को कैसे बर्बाद कर सकता है। बच्चे वही सीखते हैं जो वे अपने माता-पिता को करते हुए देखते हैं। यदि माता-पिता खुद शराब, सिगरेट या अन्य नशीले पदार्थों का सेवन करेंगे, तो बच्चों पर भी इसका गलत प्रभाव पड़ेगा। बच्चों को खेल, संगीत, नृत्य, पेंटिंग या अन्य सकारात्मक गतिविधियों से बच्चों को जोड़ें। इससे उनका ध्यान नशे जैसी गलत चीजों से हटेगा, वो मानसिक रूप से मजबूत भी बनेंगे। अभिभावक बच्चों के प्रति सख्त रवैया अपनाएंगे तो वे अपनी बातें छिपाने लगेंगे। उनसे मित्रवत व्यवहार करें, जिससे वे अपनी समस्याओं को साझा करने में संकोच न करें। बच्चों के दोस्त कौन हैं, वे किसके साथ समय बिता रहे हैं, इस पर नजर रखना बहुत जरूरी है। गलत संगत अकसर बच्चों को नशे की ओर धकेलती है। यदि कोई दोस्त संदिग्ध लगे, तो बच्चे को समझाने का प्रयास करें और सही मार्गदर्शन दें।
उन्होंने कहा कि माता-पिता ऑनलाइन और ऑफलाइन तरीकों से ड्रग्स की उपलब्धता के बारे में जानकारी रखें और बच्चों को समय-समय पर इसके प्रति जागरूक करें। जरूरत पड़ने पर काउंसलिंग लें। यदि किसी बच्चे में नशे की लत के लक्षण दिखने लगे तो तुरंत विशेषज्ञ से संपर्क करें। बच्चों को नशे से बचाने की जिम्मेदारी केवल माता-पिता की नहीं, बल्कि पूरे समाज और सरकार की भी है। स्कूलों, कॉलेजों और सामाजिक संगठनों को मिलकर नशे के खिलाफ अभियान चलाने चाहिए। साथ ही, सरकार को सख्त कानून लागू करने चाहिए ताकि ड्रग्स बेचने वालों पर कड़ी कार्रवाई हो सके। सही मार्गदर्शन, मजबूत पारिवारिक संबंध और सकारात्मक माहौल बच्चों को एक उज्ज्वल भविष्य की ओर ले जा सकते हैं।
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-माता-पिता घर में रखें सकारात्मक माहौल, गतिविधियों पर रखें नजर
-सख्ती की बजाय बच्चों से अभिभावक रखें दोस्ती का वातावरण
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। आधुनिक दौर में बच्चों के बीच नशे की बढ़ती प्रवृत्ति गंभीर चिंता का विषय बन गई है। नशे की गिरफ्त में आने वाले बच्चे न केवल शारीरिक और मानसिक रूप से प्रभावित होते हैं, बल्कि उनका भविष्य भी अंधकारमय हो जाता है। ऐसे में माता-पिता की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण हो जाती है। बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. अंकुर धर्माणी ने कहा कि सही मार्गदर्शन, प्रेम और सतर्कता से माता-पिता अपने बच्चों को इस बुरी लत से बचा सकते हैं।
उन्होंने कहा कि बच्चों को नशे से दूर रखने के लिए माता-पिता घर में सकारात्मक माहौल बनाएं। बच्चे जिस वातावरण में बड़े होते हैं, वही उनके व्यक्तित्व को आकार देता है। यदि घर में प्रेम, समझ और सहयोग का माहौल होगा, तो बच्चे अपने मन की बात खुलकर कह सकेंगे और गलत संगत में पड़ने की संभावना कम होगी। बच्चों को नशे से बचाने के लिए जरूरी है कि माता-पिता उनके साथ समय बिताएं और उनकी चिंताओं को समझें। उनसे नशे के दुष्प्रभावों के बारे में स्पष्ट रूप से बात करें ताकि वे जान सकें कि यह उनके जीवन को कैसे बर्बाद कर सकता है। बच्चे वही सीखते हैं जो वे अपने माता-पिता को करते हुए देखते हैं। यदि माता-पिता खुद शराब, सिगरेट या अन्य नशीले पदार्थों का सेवन करेंगे, तो बच्चों पर भी इसका गलत प्रभाव पड़ेगा। बच्चों को खेल, संगीत, नृत्य, पेंटिंग या अन्य सकारात्मक गतिविधियों से बच्चों को जोड़ें। इससे उनका ध्यान नशे जैसी गलत चीजों से हटेगा, वो मानसिक रूप से मजबूत भी बनेंगे। अभिभावक बच्चों के प्रति सख्त रवैया अपनाएंगे तो वे अपनी बातें छिपाने लगेंगे। उनसे मित्रवत व्यवहार करें, जिससे वे अपनी समस्याओं को साझा करने में संकोच न करें। बच्चों के दोस्त कौन हैं, वे किसके साथ समय बिता रहे हैं, इस पर नजर रखना बहुत जरूरी है। गलत संगत अकसर बच्चों को नशे की ओर धकेलती है। यदि कोई दोस्त संदिग्ध लगे, तो बच्चे को समझाने का प्रयास करें और सही मार्गदर्शन दें।
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उन्होंने कहा कि माता-पिता ऑनलाइन और ऑफलाइन तरीकों से ड्रग्स की उपलब्धता के बारे में जानकारी रखें और बच्चों को समय-समय पर इसके प्रति जागरूक करें। जरूरत पड़ने पर काउंसलिंग लें। यदि किसी बच्चे में नशे की लत के लक्षण दिखने लगे तो तुरंत विशेषज्ञ से संपर्क करें। बच्चों को नशे से बचाने की जिम्मेदारी केवल माता-पिता की नहीं, बल्कि पूरे समाज और सरकार की भी है। स्कूलों, कॉलेजों और सामाजिक संगठनों को मिलकर नशे के खिलाफ अभियान चलाने चाहिए। साथ ही, सरकार को सख्त कानून लागू करने चाहिए ताकि ड्रग्स बेचने वालों पर कड़ी कार्रवाई हो सके। सही मार्गदर्शन, मजबूत पारिवारिक संबंध और सकारात्मक माहौल बच्चों को एक उज्ज्वल भविष्य की ओर ले जा सकते हैं।
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