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Bilaspur News: एम्स बिलासपुर में दुर्लभ रक्त वाहिका कैंसर की जटिल सर्जरी सफल
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ट्यूमर निकालकर आईवीसी का किया पुनर्निर्माण
-मरीज को स्वस्थ होने पर अस्पताल से छुट्टी
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। हिमाचल प्रदेश में गंभीर और दुर्लभ बीमारियों के इलाज की दिशा में एम्स बिलासपुर ने एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। संस्थान के कार्डियोथोरेसिक एवं वैस्कुलर सर्जरी विभाग ने इन्फीरियर वेना कावा (आईवीसी) लियोमायोसारकोमा जैसे बेहद दुर्लभ रक्त वाहिका कैंसर की जटिल सर्जरी सफलतापूर्वक की है। इस ऑपरेशन से अब ऐसे मरीजों को इलाज के लिए चंडीगढ़, दिल्ली या देश के दूसरे बड़े चिकित्सा संस्थानों का रुख करने की जरूरत कम होगी।
मरीज के पेट में करीब 10×8 सेंटीमीटर का ट्यूमर था, जो शरीर की सबसे बड़ी शिराओं में शामिल आईवीसी से उत्पन्न हुआ था। ट्यूमर एब्डॉमिनल एओर्टा से भी मजबूती से चिपका हुआ था। ऐसे में ऑपरेशन के दौरान दोनों प्रमुख रक्त वाहिकाओं को नुकसान पहुंचाए बिना कैंसर को निकालना बड़ी चुनौती थी। सर्जरी के दौरान ट्यूमर को एओर्टा से सावधानीपूर्वक अलग कर पूरी तरह निकाल दिया गया। इसके बाद आईवीसी के प्रभावित हिस्से का प्रोस्थेटिक वैस्कुलर ग्राफ्ट की मदद से पुनर्निर्माण किया गया, जिससे रक्त का प्रवाह सामान्य रूप से बहाल किया जा सके। इस पूरी प्रक्रिया में विशेषज्ञ सर्जनों के साथ एनेस्थीसियोलॉजी, क्रिटिकल केयर और ट्रॉमा एवं इमरजेंसी मेडिसिन की टीम ने समन्वय से काम किया।
आईवीसी लियोमायोसारकोमा को बेहद दुर्लभ और आक्रामक कैंसर माना जाता है। चिकित्सा क्षेत्र में इसके अब तक 450 से भी कम मामले दर्ज होने की जानकारी है। इसकी दुर्लभता और सर्जरी की जटिलता के कारण इसका उपचार सीमित उन्नत चिकित्सा केंद्रों में ही संभव हो पाता है। इस उपलब्धि का सबसे बड़ा फायदा हिमाचल और आसपास के राज्यों के मरीजों को होगा। प्रमुख रक्त वाहिकाओं से जुड़ी जटिल सर्जरी के लिए मरीजों और उनके परिजनों को अब हर मामले में बड़े महानगरों के अस्पतालों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। इससे इलाज के दौरान होने वाला अतिरिक्त यात्रा खर्च, समय और मरीज को दूर ले जाने की परेशानी भी कम होगी।
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-मरीज को स्वस्थ होने पर अस्पताल से छुट्टी
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। हिमाचल प्रदेश में गंभीर और दुर्लभ बीमारियों के इलाज की दिशा में एम्स बिलासपुर ने एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। संस्थान के कार्डियोथोरेसिक एवं वैस्कुलर सर्जरी विभाग ने इन्फीरियर वेना कावा (आईवीसी) लियोमायोसारकोमा जैसे बेहद दुर्लभ रक्त वाहिका कैंसर की जटिल सर्जरी सफलतापूर्वक की है। इस ऑपरेशन से अब ऐसे मरीजों को इलाज के लिए चंडीगढ़, दिल्ली या देश के दूसरे बड़े चिकित्सा संस्थानों का रुख करने की जरूरत कम होगी।
मरीज के पेट में करीब 10×8 सेंटीमीटर का ट्यूमर था, जो शरीर की सबसे बड़ी शिराओं में शामिल आईवीसी से उत्पन्न हुआ था। ट्यूमर एब्डॉमिनल एओर्टा से भी मजबूती से चिपका हुआ था। ऐसे में ऑपरेशन के दौरान दोनों प्रमुख रक्त वाहिकाओं को नुकसान पहुंचाए बिना कैंसर को निकालना बड़ी चुनौती थी। सर्जरी के दौरान ट्यूमर को एओर्टा से सावधानीपूर्वक अलग कर पूरी तरह निकाल दिया गया। इसके बाद आईवीसी के प्रभावित हिस्से का प्रोस्थेटिक वैस्कुलर ग्राफ्ट की मदद से पुनर्निर्माण किया गया, जिससे रक्त का प्रवाह सामान्य रूप से बहाल किया जा सके। इस पूरी प्रक्रिया में विशेषज्ञ सर्जनों के साथ एनेस्थीसियोलॉजी, क्रिटिकल केयर और ट्रॉमा एवं इमरजेंसी मेडिसिन की टीम ने समन्वय से काम किया।
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आईवीसी लियोमायोसारकोमा को बेहद दुर्लभ और आक्रामक कैंसर माना जाता है। चिकित्सा क्षेत्र में इसके अब तक 450 से भी कम मामले दर्ज होने की जानकारी है। इसकी दुर्लभता और सर्जरी की जटिलता के कारण इसका उपचार सीमित उन्नत चिकित्सा केंद्रों में ही संभव हो पाता है। इस उपलब्धि का सबसे बड़ा फायदा हिमाचल और आसपास के राज्यों के मरीजों को होगा। प्रमुख रक्त वाहिकाओं से जुड़ी जटिल सर्जरी के लिए मरीजों और उनके परिजनों को अब हर मामले में बड़े महानगरों के अस्पतालों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। इससे इलाज के दौरान होने वाला अतिरिक्त यात्रा खर्च, समय और मरीज को दूर ले जाने की परेशानी भी कम होगी।
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