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Bilaspur News: भीम ने एक ही रात में किया था बागा का निर्माण
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प्रसिद्ध पर्यटन स्थल बागासराहन । संवाद
मूलभूत सुविधाओं की कमी, पर्यटन की व्यापक संभावनाएं
मुख्यमंत्री के दौरे से क्षेत्रवासियों को जगी उम्मीद
सर्पनुमा नहर और कल-कल झरनों से सजी रमणीय घाटी
पांडवों और कौरवों की ऐतिहासिक कथाओं से जुड़ा है स्थल
आज भी मौजूद हैं पांडवकालीन कथाओं के चिह्न
राकेश बिनी शर्मा
निरमंड( कुल्लू)। प्राकृतिक सौंदर्य से भरपूर बागासराहन, विश्लेऊ जोत की गोद में बसा एक रमणीय स्थल है। लगभग 2 किलोमीटर लंबे विस्तृत मैदान में मखमली हरी घास फैली है। यहां पर्यटन की अपार संभावनाएं हैं। मुख्यमंत्री के प्रस्तावित दौरे से लोगों को उम्मीद है कि इस क्षेत्र को विकास की कुछ सौगातें अवश्य मिलेंगी।
बागासराहन में मैदान के बीच से सर्पनुमा बहती बागा नहर इसकी सुंदरता में चार चांद लगाती है। चारों ओर ऊंचे-ऊंचे पहाड़, घने जंगल और पास ही कल-कल करता निर्मल झरना पर्यटकों को आकर्षित करता है।
यह क्षेत्र पौराणिक मान्यताओं से भी जुड़ा है। मान्यता है कि अज्ञातवास के दौरान पांडव कुछ समय यहां रुके थे। कहा जाता है कि भीम ने एक ही रात में विशाल बागा (नहर) का निर्माण किया और इसके मलबे को इधर-उधर फेंक दिया। इसके साक्ष्य बड़ी-बड़ी चट्टानों के रूप में यहां दिखाई देते हैं। पांडवों की उपस्थिति के बाद कौरव भी उनकी खोज में यहां देउगी नामक स्थान तक पहुंचे और वहां पीली सरसों उगाई, जो आज भी वहां देखी जा सकती है।
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बागासराहन पंचायत के प्रधान प्रेम ठाकुर ने बताया कि यहां के देवता शाणऋषि मानसरोवर से आए हैं और वे राजनीति में भी विशेष निपुण माने जाते हैं। सराहन, झलेहर, नोर, चायल सहित आसपास के गांवों में इनके प्रति गहरी आस्था है।
बागासराहन में पर्यटन की अपार संभावनाएं हैं। यहां ब्रिटिश काल का बना एक रास्ता और विश्रामगृह भी मौजूद है, लेकिन आज भी यह क्षेत्र मूलभूत सुविधाओं की कमी से जूझ रहा है। सड़कों की हालत दयनीय है। स्थानीय युवाओं का कहना है कि यदि सरकार इस स्थल पर ध्यान दे तो यहां पर्यटकों की संख्या में भारी वृद्धि हो सकती है।
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मुख्यमंत्री के दौरे से क्षेत्रवासियों को जगी उम्मीद
सर्पनुमा नहर और कल-कल झरनों से सजी रमणीय घाटी
पांडवों और कौरवों की ऐतिहासिक कथाओं से जुड़ा है स्थल
आज भी मौजूद हैं पांडवकालीन कथाओं के चिह्न
राकेश बिनी शर्मा
निरमंड( कुल्लू)। प्राकृतिक सौंदर्य से भरपूर बागासराहन, विश्लेऊ जोत की गोद में बसा एक रमणीय स्थल है। लगभग 2 किलोमीटर लंबे विस्तृत मैदान में मखमली हरी घास फैली है। यहां पर्यटन की अपार संभावनाएं हैं। मुख्यमंत्री के प्रस्तावित दौरे से लोगों को उम्मीद है कि इस क्षेत्र को विकास की कुछ सौगातें अवश्य मिलेंगी।
बागासराहन में मैदान के बीच से सर्पनुमा बहती बागा नहर इसकी सुंदरता में चार चांद लगाती है। चारों ओर ऊंचे-ऊंचे पहाड़, घने जंगल और पास ही कल-कल करता निर्मल झरना पर्यटकों को आकर्षित करता है।
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यह क्षेत्र पौराणिक मान्यताओं से भी जुड़ा है। मान्यता है कि अज्ञातवास के दौरान पांडव कुछ समय यहां रुके थे। कहा जाता है कि भीम ने एक ही रात में विशाल बागा (नहर) का निर्माण किया और इसके मलबे को इधर-उधर फेंक दिया। इसके साक्ष्य बड़ी-बड़ी चट्टानों के रूप में यहां दिखाई देते हैं। पांडवों की उपस्थिति के बाद कौरव भी उनकी खोज में यहां देउगी नामक स्थान तक पहुंचे और वहां पीली सरसों उगाई, जो आज भी वहां देखी जा सकती है।
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बागासराहन पंचायत के प्रधान प्रेम ठाकुर ने बताया कि यहां के देवता शाणऋषि मानसरोवर से आए हैं और वे राजनीति में भी विशेष निपुण माने जाते हैं। सराहन, झलेहर, नोर, चायल सहित आसपास के गांवों में इनके प्रति गहरी आस्था है।
बागासराहन में पर्यटन की अपार संभावनाएं हैं। यहां ब्रिटिश काल का बना एक रास्ता और विश्रामगृह भी मौजूद है, लेकिन आज भी यह क्षेत्र मूलभूत सुविधाओं की कमी से जूझ रहा है। सड़कों की हालत दयनीय है। स्थानीय युवाओं का कहना है कि यदि सरकार इस स्थल पर ध्यान दे तो यहां पर्यटकों की संख्या में भारी वृद्धि हो सकती है।