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Himachal News: एम्स बिलासपुर में 22 बीमारियों का पता सिर्फ एक सैंपल से, पांच दिन का इंतजार होगा खत्म; जानें

Fri, 30 Jan 2026 06:00 AM IST
अंकेश डोगरा संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर।
संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर। Published by: अंकेश डोगरा Updated Fri, 30 Jan 2026 06:00 AM IST
सार

एम्स बिलासपुर ने फिल्म ऐरे मल्टीप्लेक्स पीसीआर मशीन स्थापित करने का फैसला लिया है। फिल्म ऐरे मशीन एक ही सैंपल से 22 से ज्यादा संभावित वायरस और बैक्टीरिया को एक साथ स्कैन कर लेती है। पढ़ें पूरी खबर... 

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AIIMS Bilaspur to diagnose 22 diseases with just one sample; the five-day wait will be over
एम्स बिलासपुर - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

एम्स बिलासपुर अब उन गंभीर मरीजों के लिए उम्मीद की नई किरण बनने जा रहा है, जिनकी जान रिपोर्ट में होने वाली देरी के कारण जोखिम में पड़ जाती थी। एम्स प्रशासन ने अस्पताल में फिल्म ऐरे मल्टीप्लेक्स पीसीआर मशीन स्थापित करने का फैसला लिया है। यह मशीन चिकित्सा विज्ञान की वह जादुई छड़ी है, जो शरीर के भीतर छिपे सूक्ष्म से सूक्ष्म जानलेवा वायरस और बैक्टीरिया को महज एक घंटे में ढूंढ निकालेगी। इसके लिए संस्थान ने टेंडर प्रक्रिया शुरू कर दी है, जिसके फरवरी अंत तक पूरा होने की उम्मीद है।

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वर्तमान में हिमाचल के अस्पतालों में किसी गंभीर संक्रमण (जैसे दिमागी बुखार या सेप्सिस) की सटीक पहचान के लिए सैंपल को अक्सर बाहरी लैब या चंडीगढ़ स्थित पीजीआई भेजना पड़ता है। वहां से रिपोर्ट आने में तीन से सात दिन लग जाते हैं। कई बार जब तक रिपोर्ट आती है, संक्रमण मरीज के अंगों को नुकसान पहुंचा चुका होता है। एम्स में यह मशीन लगने के बाद यह पूरी प्रक्रिया कैंपस के अंदर ही सिमट जाएगी। इस मशीन की कार्यप्रणाली को विशेषज्ञों ने सिंड्रोमिक टेस्टिंग का नाम दिया है। इसके मुख्य फायदे यह हैं कि एक ही जांच में 22 बीमारियों का स्कैन होगा।

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अगर किसी मरीज को तेज बुखार है, तो डॉक्टर को यह समझ नहीं आता कि यह मलेरिया है, डेंगू है, स्वाइन फ्लू है या कोई घातक बैक्टीरिया। पुरानी तकनीक में सबके लिए अलग-अलग टेस्ट होते थे। फिल्म ऐरे मशीन एक ही सैंपल से 22 से ज्यादा संभावित वायरस और बैक्टीरिया को एक साथ स्कैन कर लेती है। आईसीयू के मरीजों के लिए वरदान है। सेप्सिस (खून में जहर फैलना) के मामले में हर एक घंटा मरीज की मृत्यु दर को आठ फीसदी तक बढ़ा देता है। यह मशीन मात्र 60 मिनट में बता देगी कि संक्रमण किस कीटाणु से है, जिससे गोल्डन ऑवर में ही सही इलाज शुरू हो सकेगा। आजकल अंदाजे से दवा देने के कारण मरीजों के शरीर में एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस बढ़ रहा है। यह मशीन बताएगी कि मरीज को एंटी-वायरल चाहिए या एंटी-बैक्टीरियल। इससे मरीज को बेवजह की भारी भरकम दवाइयां नहीं खानी पड़ेंगी, जिससे लीवर और किडनी सुरक्षित रहेंगे।

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अब स्मार्ट होगी डायग्नोसिस, किसे होगा फायदा
गंभीर निमोनिया, दिमागी बुखार, दस्त और रक्त संक्रमण के मरीजों को। अलग-अलग दर्जनों टेस्ट कराने के बजाय एक ही टेस्ट से पूरी तस्वीर साफ होगी। बाहर की निजी लैब में यह टेस्ट महंगी दरों पर होता है, एम्स में यह रियायती दरों पर उपलब्ध होगा। एम्स बिलासपुर के अनुसार, अस्पताल के माइक्रोबायोलॉजी विभाग को इस मशीन से लैस किया जा रहा है।
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