{"_id":"6361688b50d3c923ac38e1b7","slug":"agricultural-bilaspur-news-sml4265548161","type":"story","status":"publish","title_hn":"कोटधार में मक्की की पैदावार में 50 फीसदी तक गिरावट","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
कोटधार में मक्की की पैदावार में 50 फीसदी तक गिरावट
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
झंडूता (बिलासपुर)। उपमंडल झंडूता के कोटधार क्षेत्र में इस बार मक्की फसल की पैदावार में गिरावट आई है। पिछली बार की तुलना में इस बार 50 प्रतिशत कम पैदावार हुई है। किसानों की मेहनत के बाद भी पैदावार कम हो रही है। इसका मुख्य कारण लावारिस पशुओं की ओर से फसल को उजाड़ना है।
किसानों के अनुसार जंगली जानवरों और लावारिस पशुओं की बढ़ती तादाद फसल कम होने का मुख्य कारण है। इससे किसानों को परेशानी झेलनी पड़ रही है। इस बार पशुओं ने फसल को काफी नुकसान पहुंचाया। किसानों की आर्थिक स्थिति कमजोर होती जा रही है।
क्षेत्र के किसानों श्याम सिंह, प्रेम सिंह, रमेश कुमार, बलबीर सिंह, सुरेश कुमार ने बताया कि पिछले साल उन्हें पांच से सात क्विंटल मक्की की पैदावार हुई थी, जो इस बार दो से तीन क्विंटल तक सिमट गई है। बीज और बिजाई के पैसे तक भी पूरे नहीं हो रहे हैं। उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि लावारिस पशुओं की समस्या से छुटकारा दिलाया जाए अन्यथा मजबूरन खेतीबाड़ी छोड़नी पड़ेगी।
विज्ञापन
विज्ञापन
किसानों के अनुसार जंगली जानवरों और लावारिस पशुओं की बढ़ती तादाद फसल कम होने का मुख्य कारण है। इससे किसानों को परेशानी झेलनी पड़ रही है। इस बार पशुओं ने फसल को काफी नुकसान पहुंचाया। किसानों की आर्थिक स्थिति कमजोर होती जा रही है।
विज्ञापन
क्षेत्र के किसानों श्याम सिंह, प्रेम सिंह, रमेश कुमार, बलबीर सिंह, सुरेश कुमार ने बताया कि पिछले साल उन्हें पांच से सात क्विंटल मक्की की पैदावार हुई थी, जो इस बार दो से तीन क्विंटल तक सिमट गई है। बीज और बिजाई के पैसे तक भी पूरे नहीं हो रहे हैं। उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि लावारिस पशुओं की समस्या से छुटकारा दिलाया जाए अन्यथा मजबूरन खेतीबाड़ी छोड़नी पड़ेगी।
विज्ञापन