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एम्स में स्थानीय लोगों को रोजगार न मिलने पर धरना-प्रदर्शन
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बिलासपुर के एम्स में स्थानीय लोगों को रोजगार न देने पर धरने पर बैठे ग्रामीण। संवाद
- फोटो : BILASPUR
बिलासपुर। बिलासपुर के कोठीपुरा में बन रहे एम्स में एनसीसी कंपनी पर स्थानीय ग्रामीणों ने रोजगार के नाम पर अनदेखी करने का आरोप लगाया। एम्स परिसर में पहुंचकर ग्रामीणों ने जमकर नारेबाजी की। एम्स में सुरक्षा कर्मी, सफाई कर्मी, चपरासी सहित अन्य पदों पर प्रभावित परिवारों को रोजगार देने के वादे के बावजूद अन्य राज्यों के लोगों की नियुक्ति की जा रही है। इस पर एम्स के साथ लगती तीन पंचायतों के लोगों का ग्रामीणों का गुस्सा फूट पड़ा।
राजपुरा, कोठीपुरा और नोवा पंचायत के ग्रामीणों ने एकजुट होकर एम्स अस्पताल के गेट नंबर एक की सड़क पर एनसीसी प्रबंधन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और सड़क पर धरना दे दिया। ग्रामीणों ने प्रभावित लोगों को रोजगार देने की मांग की।
स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि प्रभावित परिवारों के सदस्यों को चतुर्थ श्रेणी पदों पर रोजगार देने का कंपनी और सरकार ने वादा किया था। लेकिन ऐसा नहीं हो रहा है। चतुर्थ श्रेणी पदों पर अन्य राज्यों के लोगों को रोजगार दिया जा रहा है जो कि सरासर गलत है। एम्स बिलासपुर के लोगों के लिए सौगात है। अगर प्रभावित लोगों को ही रोजगार नहीं दिया जाएगा तो स्थानीय लोगों को इस एम्स से कोई फायदा नहीं होगा। एम्स की इस जमीन से पहले अपने पशुओं के लिए चारा लाते थे। एम्स निर्माण कार्य से उड़ने वाली धूल के कारण लोगों की फसलें प्रभावित हुई हैं। लोगों के पास आय का कोई और साधन नहीं बचा है।
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उन्होंने कहा कि एम्स में स्थानीय लोगों को भी कार्य दें ताकि वे अपने परिवार का पालन-पोषण कर सकें। कहा कि जब तक प्रभावित परिवारों के सदस्यों को रोजगार नहीं मिल जाता तब तक धरना जारी रहेगा। चार घंटे तक चले ग्रामीणों के प्रदर्शन के बाद एनसीसी कंपनी के अधिकारी मौके पर पहुंचे और प्रभावित परिवारों को रोजगार देने का आश्वासन दिया। इसके बाद ग्रामीणों का धरना खत्म हुआ। इस मौके पर राजपुरा पंचायत के उपप्रधान सतदेव, पूर्व प्रधान राजपुरा कुलदीप, पूर्व प्रधान कोठीपुरा नंदलाल ठाकुर, कचौली पंचायत उपप्रधान रोशन लाल और स्थानीय महिलाओं सहित अन्य लोग मौजूद रहे।
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राजपुरा, कोठीपुरा और नोवा पंचायत के ग्रामीणों ने एकजुट होकर एम्स अस्पताल के गेट नंबर एक की सड़क पर एनसीसी प्रबंधन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और सड़क पर धरना दे दिया। ग्रामीणों ने प्रभावित लोगों को रोजगार देने की मांग की।
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स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि प्रभावित परिवारों के सदस्यों को चतुर्थ श्रेणी पदों पर रोजगार देने का कंपनी और सरकार ने वादा किया था। लेकिन ऐसा नहीं हो रहा है। चतुर्थ श्रेणी पदों पर अन्य राज्यों के लोगों को रोजगार दिया जा रहा है जो कि सरासर गलत है। एम्स बिलासपुर के लोगों के लिए सौगात है। अगर प्रभावित लोगों को ही रोजगार नहीं दिया जाएगा तो स्थानीय लोगों को इस एम्स से कोई फायदा नहीं होगा। एम्स की इस जमीन से पहले अपने पशुओं के लिए चारा लाते थे। एम्स निर्माण कार्य से उड़ने वाली धूल के कारण लोगों की फसलें प्रभावित हुई हैं। लोगों के पास आय का कोई और साधन नहीं बचा है।
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उन्होंने कहा कि एम्स में स्थानीय लोगों को भी कार्य दें ताकि वे अपने परिवार का पालन-पोषण कर सकें। कहा कि जब तक प्रभावित परिवारों के सदस्यों को रोजगार नहीं मिल जाता तब तक धरना जारी रहेगा। चार घंटे तक चले ग्रामीणों के प्रदर्शन के बाद एनसीसी कंपनी के अधिकारी मौके पर पहुंचे और प्रभावित परिवारों को रोजगार देने का आश्वासन दिया। इसके बाद ग्रामीणों का धरना खत्म हुआ। इस मौके पर राजपुरा पंचायत के उपप्रधान सतदेव, पूर्व प्रधान राजपुरा कुलदीप, पूर्व प्रधान कोठीपुरा नंदलाल ठाकुर, कचौली पंचायत उपप्रधान रोशन लाल और स्थानीय महिलाओं सहित अन्य लोग मौजूद रहे।