{"_id":"67a0cfb8deca2dd5340c0955","slug":"accs-kiln-number-two-closed-after-ngt-investigation-begins-bilaspur-news-c-92-1-ssml1001-131451-2025-02-03","type":"story","status":"publish","title_hn":"Bilaspur News: एनजीटी की जांच शुरू होने के बाद एसीसी के किल्लन नंबर दो बंद","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Bilaspur News: एनजीटी की जांच शुरू होने के बाद एसीसी के किल्लन नंबर दो बंद
Mon, 03 Feb 2025 07:47 PM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर
Updated Mon, 03 Feb 2025 07:47 PM IST
विज्ञापन
-बरमाणा के कश्मीर सिंह प्रदूषण मामले को लेकर की है एनजीटी ने कार्रवाई
-शिकायत मिलने के बाद राष्ट्रीय हरित अधिकरण ने जांच के लिए गठित की है समिति
-प्रबंधन ने संयुक्त जांच समिति को दिया किल्लन बंद करने को लेकर मरम्मत का हवाला
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। बरमाणा स्थित आदाणी समूह के एसीसी सीमेंट संयंत्र के खिलाफ पर्यावरण नियमों का उल्लंघन करने की शिकायत के बाद प्रबंधन ने फैक्ट्री के किल्लन नंबर दो को बंद कर दिया है। बरमाणा के कश्मीर सिंह ठाकुर फैक्ट्री से होने वाले प्रदूषण के मामले को लेकर एनजीटी गए हैं।
कश्मीर सिंह की शिकायत पर राष्ट्रीय हरित अधिकरण ने मामले की जांच के लिए संयुक्त जांच समिति का गठन किया है। लेकिन खास बात यह है कि जबसे जांच शुरू हुई तभी से ही कंपनी ने किल्लन की मरम्मत का हवाला देकर शटडाउन कर दिया है। बताया जा रहा है कि फैक्ट्री के किल्लन नंबर दो के इलेक्ट्रोस्टैटिक प्रेसिपिटेटर (ईएसपी) जिसे हाई वोल्टेज इलेक्ट्रोस्टैटिक प्रेसिपिटेटर इलेक्ट्रोस्टैटिक डस्ट कलेक्टर के रूप में भी जाना जाता है। यह विद्युत शक्ति का उपयोग करके धूल कणों को कम करते हैं। ईएसपी में डिस्चार्ज इलेक्ट्रोड और कलेक्शन प्लेट्स होते हैं। ये इलेक्ट्रोड धूल को हटाने का काम करते हैं जो काफी समय से खराब चल रहे थे। इसके बावजूद किल्लन को बंद नहीं किया गया था। इलेक्ट्रोड के काम न करने से इससे प्रदूषण ज्यादा फैल रहा था। जिसके बाद स्थानीय व्यक्ति कश्मीर सिंह की ओर से इसकी शिकायत एनजीटी को की गई। लेकिन जैसे ही एनजीटी से जांच समिति का गठन हुआ वैसे ही इसे शट डाउन कर दिया गया। बताया जा रहा है कि किल्लन 15 जनवरी के आसपास से बंद है। यह इलेक्ट्रोड जर्मनी से आएंगे। इसके बाद ही इस किल्लन से सीमेंट उत्पादन होगा।
वहीं एनजीटी द्वारा गठित जांच समिति ने भी फैक्ट्री का निरीक्षण किया है। इस समिति की अध्यक्षता एसडीएम सदर अभिषेक कुमार गर्ग कर रहे हैं। इसमें वैज्ञानिक डॉ. नरेंद्र शर्मा और एचपीपीसीबी क्षेत्रीय अधिकारी पवन शर्मा भी शामिल हैं।
विज्ञापन
शिकायत में आरोप है कि फैक्ट्री से निकलने वाली धूल का प्रभाव आसपास के आवासीय क्षेत्रों और पर्यावरण पर पड़ रहा है। एसडीएम सदर अभिषेक कुमार गर्ग ने कहा कि उन्होंने 18 जनवरी को फैक्ट्री का निरीक्षण किया था। शिकायतकर्ता कश्मीर सिंह भी वहां उपस्थित थे। निरीक्षण के दौरान किल्लन के रखरखाव और मरम्मत कार्य चल रहा था, और कुछ गतिविधियां, जैसे खनन कार्य बंद थीं। शिकायतकर्ता ने सुझाव दिया कि प्रदूषण स्तर का सही आकलन करने के लिए फैक्ट्री के किल्लन चलना जरूरी हैं। तभी इससे निकलने वाले प्रदूषण का सही आकलन किया जा सकेगा। कहा कि फैक्ट्री से प्रदूषण की शिकायत की अंतिम जांच तब पूरी होगी जब फैक्ट्री पूरी तरह से संचालित हो जाए। इसके लिए समिति ने एनजीटी से रिपोर्ट सबमिट करने के लिए और समय लिया है।
इनसेट
समिति ने फैक्ट्री में वायु प्रदूषण नियंत्रण प्रणालियों, जैसे धूल निवारण प्रणाली, वायु प्रदूषण नियंत्रण यंत्र, और टायर धोने की प्रणाली का परीक्षण किया। इस दौरान कुछ कमियां पाई गई। इनमें फैक्ट्री ने अपनी संचालन अनुमति (सीटीओ) के तहत वायु और ध्वनि प्रदूषण को कम करने के लिए तीन-स्तरीय पौधरोपण पूरी तरह से लागू नहीं किया है। कुछ स्थानों पर धूल का उत्सर्जन देखा गया और शिकायतकर्ता के घर के पास स्थित वायु अवरोधक अपर्याप्त पाए गए। टायरों से तेल और ग्रीस हटाने की व्यवस्था का अभाव था और ट्रक टायर धोने की प्रणाली को सीमेंट फैक्ट्री के निकासी बिंदु पर स्थापित करना बाकी था।
इनसेट
संयुक्त समिति ने फैक्ट्री से की कुछ दस्तावेजों की मांग
समिति ने फैक्ट्री प्रबंधन से पूर्व में एनजीटी द्वारा लगाए गए 50 लाख रुपये के पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति भुगतान की स्थिति, सीमेंट उद्योग से संबंधित स्वास्थ्य जोखिम मूल्यांकन रिपोर्ट, पर्यावरणीय मंजूरी दस्तावेज़, खनन योजनाएं और अनुपालन रिपोर्ट भी मांगी है।
विज्ञापन
-शिकायत मिलने के बाद राष्ट्रीय हरित अधिकरण ने जांच के लिए गठित की है समिति
-प्रबंधन ने संयुक्त जांच समिति को दिया किल्लन बंद करने को लेकर मरम्मत का हवाला
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। बरमाणा स्थित आदाणी समूह के एसीसी सीमेंट संयंत्र के खिलाफ पर्यावरण नियमों का उल्लंघन करने की शिकायत के बाद प्रबंधन ने फैक्ट्री के किल्लन नंबर दो को बंद कर दिया है। बरमाणा के कश्मीर सिंह ठाकुर फैक्ट्री से होने वाले प्रदूषण के मामले को लेकर एनजीटी गए हैं।
कश्मीर सिंह की शिकायत पर राष्ट्रीय हरित अधिकरण ने मामले की जांच के लिए संयुक्त जांच समिति का गठन किया है। लेकिन खास बात यह है कि जबसे जांच शुरू हुई तभी से ही कंपनी ने किल्लन की मरम्मत का हवाला देकर शटडाउन कर दिया है। बताया जा रहा है कि फैक्ट्री के किल्लन नंबर दो के इलेक्ट्रोस्टैटिक प्रेसिपिटेटर (ईएसपी) जिसे हाई वोल्टेज इलेक्ट्रोस्टैटिक प्रेसिपिटेटर इलेक्ट्रोस्टैटिक डस्ट कलेक्टर के रूप में भी जाना जाता है। यह विद्युत शक्ति का उपयोग करके धूल कणों को कम करते हैं। ईएसपी में डिस्चार्ज इलेक्ट्रोड और कलेक्शन प्लेट्स होते हैं। ये इलेक्ट्रोड धूल को हटाने का काम करते हैं जो काफी समय से खराब चल रहे थे। इसके बावजूद किल्लन को बंद नहीं किया गया था। इलेक्ट्रोड के काम न करने से इससे प्रदूषण ज्यादा फैल रहा था। जिसके बाद स्थानीय व्यक्ति कश्मीर सिंह की ओर से इसकी शिकायत एनजीटी को की गई। लेकिन जैसे ही एनजीटी से जांच समिति का गठन हुआ वैसे ही इसे शट डाउन कर दिया गया। बताया जा रहा है कि किल्लन 15 जनवरी के आसपास से बंद है। यह इलेक्ट्रोड जर्मनी से आएंगे। इसके बाद ही इस किल्लन से सीमेंट उत्पादन होगा।
विज्ञापन
वहीं एनजीटी द्वारा गठित जांच समिति ने भी फैक्ट्री का निरीक्षण किया है। इस समिति की अध्यक्षता एसडीएम सदर अभिषेक कुमार गर्ग कर रहे हैं। इसमें वैज्ञानिक डॉ. नरेंद्र शर्मा और एचपीपीसीबी क्षेत्रीय अधिकारी पवन शर्मा भी शामिल हैं।
विज्ञापन
शिकायत में आरोप है कि फैक्ट्री से निकलने वाली धूल का प्रभाव आसपास के आवासीय क्षेत्रों और पर्यावरण पर पड़ रहा है। एसडीएम सदर अभिषेक कुमार गर्ग ने कहा कि उन्होंने 18 जनवरी को फैक्ट्री का निरीक्षण किया था। शिकायतकर्ता कश्मीर सिंह भी वहां उपस्थित थे। निरीक्षण के दौरान किल्लन के रखरखाव और मरम्मत कार्य चल रहा था, और कुछ गतिविधियां, जैसे खनन कार्य बंद थीं। शिकायतकर्ता ने सुझाव दिया कि प्रदूषण स्तर का सही आकलन करने के लिए फैक्ट्री के किल्लन चलना जरूरी हैं। तभी इससे निकलने वाले प्रदूषण का सही आकलन किया जा सकेगा। कहा कि फैक्ट्री से प्रदूषण की शिकायत की अंतिम जांच तब पूरी होगी जब फैक्ट्री पूरी तरह से संचालित हो जाए। इसके लिए समिति ने एनजीटी से रिपोर्ट सबमिट करने के लिए और समय लिया है।
इनसेट
समिति ने फैक्ट्री में वायु प्रदूषण नियंत्रण प्रणालियों, जैसे धूल निवारण प्रणाली, वायु प्रदूषण नियंत्रण यंत्र, और टायर धोने की प्रणाली का परीक्षण किया। इस दौरान कुछ कमियां पाई गई। इनमें फैक्ट्री ने अपनी संचालन अनुमति (सीटीओ) के तहत वायु और ध्वनि प्रदूषण को कम करने के लिए तीन-स्तरीय पौधरोपण पूरी तरह से लागू नहीं किया है। कुछ स्थानों पर धूल का उत्सर्जन देखा गया और शिकायतकर्ता के घर के पास स्थित वायु अवरोधक अपर्याप्त पाए गए। टायरों से तेल और ग्रीस हटाने की व्यवस्था का अभाव था और ट्रक टायर धोने की प्रणाली को सीमेंट फैक्ट्री के निकासी बिंदु पर स्थापित करना बाकी था।
इनसेट
संयुक्त समिति ने फैक्ट्री से की कुछ दस्तावेजों की मांग
समिति ने फैक्ट्री प्रबंधन से पूर्व में एनजीटी द्वारा लगाए गए 50 लाख रुपये के पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति भुगतान की स्थिति, सीमेंट उद्योग से संबंधित स्वास्थ्य जोखिम मूल्यांकन रिपोर्ट, पर्यावरणीय मंजूरी दस्तावेज़, खनन योजनाएं और अनुपालन रिपोर्ट भी मांगी है।