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अच्छा मुल्क तभी बन सकता है, जब बराबरी के उसूल को अपनाया जाए : डॉ. अपूर्वानंद
Mon, 27 Jan 2025 11:30 PM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर
Updated Mon, 27 Jan 2025 11:30 PM IST
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- किसान भवन में संविधान, धर्मनिरपेक्षता एवं सामाजिक न्याय पर संवाद का आयोजन
- गणतंत्र में गण की भूमिका पर वक्ताओं ने रखे विचार
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। गणतंत्र दिवस की 76वीं वर्षगांठ के अवसर पर मुख्यालय स्थित किसान भवन में संविधान, धर्मनिरपेक्षता एवं सामाजिक न्याय पर संवाद का आयोजन किया गया। इसका आयोजन सद्भावना मंच बिलासपुर ने किया। कार्यक्रम में विभिन्न वक्ताओं ने गणतंत्र में गण की भूमिका पर विचार रखे।
कार्यक्रम में प्रसिद्ध विचारक एवं दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रोफेसर डॉ. अपूर्वानंद ने मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत की। विख्यात संस्कृतिकर्मी एवं इप्टा के राष्ट्रीय सचिव शैलेंद्र कुमार विशेष अतिथि के रूप में मौजूद रहे। डॉ. अपूर्वानंद ने कहा कि जब संविधान बनाया जा रहा तो देश के बंटवारे के कारण चारों ओर खून-खराबा हो रहा था। सब एक-दूसरे का मार रहे थे, लेकिन संविधान निर्माता ने उत्तेजना में अपनी कलम को बहकने नहीं दिया। उन्होंने तय किया यह मुल्क ऐसा होगा, जहां सभी का हक बराबर होगा। उन्होंने बराबरी के उसूल को अपनाया और संख्या के उसूल को ठुकराया। उन्होंने कहा कि संख्या ज्यादा होने से कोई भी महान नहीं हो सकता है। अच्छा मुल्क तभी बन सकता है जब उसमें बराबरी के उसूल को अपनाया जाए। उन्होंने कहा कि संविधान निर्माण करने वालों ने विशेष ध्यान रखा कि यह पत्थर की लकीर न बने। उन्होंने अपने बाद की पीढि़यों की अक्ल पर भरोसा किया। वह मानते थे कि आने वाली पीढ़ी देश को बेहतरी की दिशा में ले जाने के लिए वक्त-वक्त पर संविधान में संशोधन करें। उन्होंने यह भी माना कि आने वाली पीढि़यां उनसे बेहतर होंगी। आने वाली पीढ़ी अपनी जुबान में अपनी बात लिखेंगी। इसलिए उन्होंने संविधान में संशोधन का विकल्प रखा। इसके बाद कई संशोधन भी किए गए। लेकिन विचार किया जाना चाहिए कि क्या उनका यह भरोसा ठीक था या ठीक नहीं। क्या हम उस भरोसे की रक्षा कर पाए हैं। क्या भविष्य की पीढ़ी में भी हमारे बारे में ऐसा सोच पाएगी। इस मौके पर सद्भावना मंच के सह संयोजक एवं अधिवक्ता प्रवेश चंदेल, सेवानिवृत्त पुलिस महानिदेशक आईडी भंडारी, एसटीएसएसी संयुक्त मोर्चा के जिलाध्यक्ष सीताराम, पूर्व विधायक केके कौशल, नजाकत अली हाशमी, बिजली महंत आदि उपस्थित रहे।
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- गणतंत्र में गण की भूमिका पर वक्ताओं ने रखे विचार
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। गणतंत्र दिवस की 76वीं वर्षगांठ के अवसर पर मुख्यालय स्थित किसान भवन में संविधान, धर्मनिरपेक्षता एवं सामाजिक न्याय पर संवाद का आयोजन किया गया। इसका आयोजन सद्भावना मंच बिलासपुर ने किया। कार्यक्रम में विभिन्न वक्ताओं ने गणतंत्र में गण की भूमिका पर विचार रखे।
कार्यक्रम में प्रसिद्ध विचारक एवं दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रोफेसर डॉ. अपूर्वानंद ने मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत की। विख्यात संस्कृतिकर्मी एवं इप्टा के राष्ट्रीय सचिव शैलेंद्र कुमार विशेष अतिथि के रूप में मौजूद रहे। डॉ. अपूर्वानंद ने कहा कि जब संविधान बनाया जा रहा तो देश के बंटवारे के कारण चारों ओर खून-खराबा हो रहा था। सब एक-दूसरे का मार रहे थे, लेकिन संविधान निर्माता ने उत्तेजना में अपनी कलम को बहकने नहीं दिया। उन्होंने तय किया यह मुल्क ऐसा होगा, जहां सभी का हक बराबर होगा। उन्होंने बराबरी के उसूल को अपनाया और संख्या के उसूल को ठुकराया। उन्होंने कहा कि संख्या ज्यादा होने से कोई भी महान नहीं हो सकता है। अच्छा मुल्क तभी बन सकता है जब उसमें बराबरी के उसूल को अपनाया जाए। उन्होंने कहा कि संविधान निर्माण करने वालों ने विशेष ध्यान रखा कि यह पत्थर की लकीर न बने। उन्होंने अपने बाद की पीढि़यों की अक्ल पर भरोसा किया। वह मानते थे कि आने वाली पीढ़ी देश को बेहतरी की दिशा में ले जाने के लिए वक्त-वक्त पर संविधान में संशोधन करें। उन्होंने यह भी माना कि आने वाली पीढि़यां उनसे बेहतर होंगी। आने वाली पीढ़ी अपनी जुबान में अपनी बात लिखेंगी। इसलिए उन्होंने संविधान में संशोधन का विकल्प रखा। इसके बाद कई संशोधन भी किए गए। लेकिन विचार किया जाना चाहिए कि क्या उनका यह भरोसा ठीक था या ठीक नहीं। क्या हम उस भरोसे की रक्षा कर पाए हैं। क्या भविष्य की पीढ़ी में भी हमारे बारे में ऐसा सोच पाएगी। इस मौके पर सद्भावना मंच के सह संयोजक एवं अधिवक्ता प्रवेश चंदेल, सेवानिवृत्त पुलिस महानिदेशक आईडी भंडारी, एसटीएसएसी संयुक्त मोर्चा के जिलाध्यक्ष सीताराम, पूर्व विधायक केके कौशल, नजाकत अली हाशमी, बिजली महंत आदि उपस्थित रहे।
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