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Bilaspur News: 65 साल बाद भी नहीं मिला हक, भाखड़ा विस्थापितों की उम्मीदें अधूरी

Sun, 15 Feb 2026 11:34 PM IST
शिमला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर Updated Sun, 15 Feb 2026 11:34 PM IST
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65 years later, Bhakra displaced people's hopes remain unfulfilled
सरकारें बदलीं, वादे हुए लेकिन देश को रोशन करने वालों की समस्या जस की तस
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चुनावों के समय प्लॉट देने की घोषणाएं, मगर धरातल पर नहीं उतरे फैसले
बिना सुविधाओं के ही विदा हुए कई विस्थापित, तीसरी पीढ़ी को अब भी इंतजार

संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। साठ के दशक में देश की पहली बड़ी पनबिजली परियोजनाओं में शामिल भाखड़ा नांगल बांध के निर्माण के लिए बिलासपुर जिले के 205 राजस्व गांवों के हजारों परिवारों ने अपनी जमीन और घर देशहित में न्योछावर कर दिए थे, लेकिन विस्थापन के 65 साल बाद भी इन परिवारों का पुनर्वास अधूरा है। सरकारी घोषणाएं और वादे कागजों तक ही सीमित रह गए हैं, जबकि करीब 245 परिवार आज भी प्लॉट आवंटन की प्रतीक्षा में हैं।
जिन लोगों ने देश को बिजली देने के लिए अपना सब कुछ गंवाया, वे आज भी मूलभूत सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रहे हैं। कई विस्थापित बिना उचित पुनर्वास पाए ही दुनिया से विदा हो गए, जबकि जो परिवार बचे हैं, वे पानी, सड़क, सीवरेज और मालिकाना हक जैसी बुनियादी जरूरतों से भी वंचित हैं। विस्थापितों का कहना है कि पौंग बांध प्रभावितों को जहां एफआरए में छूट देकर प्लॉट दिए गए, वहीं भाखड़ा विस्थापितों के साथ दोहरा मापदंड अपनाया जा रहा है।विस्थापित परिवारों ने प्रदेश सरकार से मांग की थी कि निहाल क्षेत्र में उद्यान विभाग की लगभग 14 बीघा जमीन पर प्लॉट विकसित कर उन्हें आवंटित किए जाएं। साथ ही वनाधिकार कानून (एफआरए) के तहत उन्हें मालिकाना हक दिया जाए। हालांकि इस दिशा में अब तक कोई ठोस प्रगति नहीं हुई। साढ़े छह दशक में कई बार पुनर्वास योजनाओं के प्रयास हुए, लेकिन वे धरातल पर नहीं उतर पाए। सरकारें बदलती रहीं, लेकिन विस्थापितों की पीड़ा जस की तस बनी रही। विस्थापितों का कहना है कि चुनावों के समय प्लॉट देने की घोषणाएं जरूर होती हैं, लेकिन बाद में मामले ठंडे बस्ते में डाल दिए जाते हैं। अब तीसरी पीढ़ी भी अपने अधिकार के लिए संघर्ष कर रही है।
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इनसेट

सरकार ने कई बार प्लॉट देने की घोषणाएं कीं, लेकिन वे कभी अमल में नहीं आईं। निहाल क्षेत्र में उद्यान विभाग के पास 14 बीघा जमीन उपलब्ध है, जिसे विकसित कर विस्थापितों को दिया जा सकता है। प्रस्ताव कई बार पारित हुए, मगर प्रशासनिक उदासीनता के कारण मामला आगे नहीं बढ़ा।
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देश राज शर्मा, प्रधान, जिला ग्रामीण भाखड़ा विस्थापित सुधार समिति

इनसेट

भाखड़ा विस्थापितों को मूलभूत सुविधाएं मुहैया कराना और प्लॉट देना हमारी प्राथमिकताओं में है। हमारी सरकार के समय में कई निर्णय ऐसे लिए गए जिनसे विस्थापितों को राहत मिली। जिन परिवारों को अब भी प्लॉट नहीं मिले हैं, उनके लिए प्रशासन से बैठक कर उचित कदम उठाए जाएंगे।

त्रिलोक जमवाल, विधायक सदर बिलासपुर
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