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समझौते के बावजूद एनटीपीसी से 35 कामगारों को निकाला
ब्यूरो/ अमर उजाला, बरमाणा(बिलासपुर)।
Updated Mon, 01 Aug 2016 11:41 PM IST
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tension
पिछले महीने 21 दिनों के आंदोलन के बाद कोल बांध परियोजना ने कामगारों के साथ हुए समझौते के बावजूद एनटीपीसी से 35 कामगारों को बाहर का रास्ता निकाल दिया गया। ठेकेदार के अधीन कार्यरत इन मजदूरों को हड़ताल के दौरान काम न आने का लिखित कारण न बताने पर यह कार्रवाई की है।
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हैरानी इस बात की है कि प्रशासन की मध्यस्थता में हुए समझौते के बावजूद यह कार्रवाई अमल में लाई है। इससे देश को रोशन करने के लिए सब कुछ गंवा देने वाले विस्थापित आज फिर सड़क पर आ गए है। इससे कामगारों और कंपनी के बीच विवाद एक बार फिर बढ़ गया है।
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एनटीपीसी मनमानी जारी : वर्कर यूनियन प्रधान अनूप कुमार ने कहा कि स्थानीय पंचायत हरनोड़ा के प्रधान, उपप्रधान, ग्रामीण सुधार कमेटियां, सदर विधायक बंबर ठाकुर और बिलासपुर प्रशासन के हस्तक्षेप के पश्चात भी एनटीपीसी प्रबंधन अपने अड़ियल रवैये पर कायम है। समझौते के अनुसार सभी मजदूरों को काम पर रखने की बात हुई थी। मगर काम पर तो किसी को रखा नहीं।
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इसके उल्टा सोमवार को 35 कामगारों को बाहर का रास्ता दिखा दिया गया है। पंकज ठाकुर, आशीष गौतम, सुमन कुमार , विवेक, शशिपाल, अरुण कुमार, पवन, दीपक, अनूप, मुख्तयार, जस्सी , सुनील, नरेश और विक्रम आदि मजदूरों ने विधायक और जिला प्रशासन से मांग की है कि मजदूरों के भविष्य को ध्यान में रखते हुए उचित कदम उठाए जाएं। वहीं विधायक से भी मांग की गई है कि एनटीपीसी प्रबंधन के खिलाफ वर्करों का प्रतिनिधित्व करें और उन्हें उनका हक दिलवाएं।
लिखित में जवाब न देने पर निकाले कामगार
इस संबंध में एनटीपीसी के लोक संपर्क अधिकारी प्रवीण रंजन भारती का कहना है कि कर्मचारियों ने ठेकेदार को हड़ताल के दौरान काम से बाहर करने के बारे में लिखित में कारण नहीं बताया। इस कारण उन्हें बाहर निकाला गया है।
मैं खुद मजदूरों के साथ उतरूंगा सड़कों पर: बंबर
सदर के विधायक बंबर ठाकुर का कहना है कि कंपनी ने अगर मजदूरों के साथ किए समझौते को नहीं माना तो वह भी मजदूरों के साथ आंदोलन में उनके साथ सड़कों पर उतर जाएंगे।
21 हड़ताल, आमरण अनशन के बाद भी नहीं मानी कंपनी
गौर रहे है कि कोलबांध में विस्थापित कामगारों ने अपने अधिकारों के लिए पिछले महीने 21 दिन की हड़ताल के साथ 5 दिन का आमरण अनशन किया था। इसके बाद एनटीपीसी प्रबंधन ने मजदूरों की शर्तें मानकर उनके साथ 13 सूत्रीय समझौता किया था। एनटीपीसी ने समझौते में यह माना था कि जितने भी मजदूर हड़ताल पर बैठे थे, उन्हें बिना किसी शर्त काम पर वापस लिया जाएगा। मगर कंपनी ने इसमें कोई भी शर्त नहीं मानी है। इससे साफ है कि एनटीपीसी स्थानीय लोगों को उनके हक देने के पक्ष में नहीं है।