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सितंबर 2022 में बनकर तैयार हो जाएगा 330 मीटर लंबा बागछाल पुल
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झंडुता उपमंडल में निर्माणाधीन बागछाल पुल।
- फोटो : BILASPUR
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बिलासपुर/झंडूता (बिलासपुर)। निर्माणाधीन बागछाल पुल जिले के पिछड़े क्षेत्र कोटधार के लिए विकास का नया सवेरा लेकर आएगा। गोबिंदसागर झील के उस पार बसा झंडूता हलके का कोटधार क्षेत्र आज भी पूरी तरह विकसित नहीं है।
क्षेत्र में सड़कों की संख्या तो बढ़ी है लेकिन, बिलासपुर और स्वारघाट पहुंचने के लिए यहां के लोग अभी भी कई किलोमीटर का सफर तय कर रहे हैं। अब बागछाल पुल तैयार होने से कोटधार के लोगों की सबसे बडी समस्या का समाधान हो जाएगा। इस पुल को सितंबर 2022 तक तैयार कर लिया जाएगा। पुल का 70 फीसदी कार्य पूरा हो चुका है।
लगभग 45 करोड़ रुपये की लागत निर्मित किए जा रहे 330 मीटर लंबे बागछाल पुल के बनने से झंडूता और श्री नयना देवी जी विस क्षेत्र की हजारों की आबादी लाभान्वित होगी। दोनों विस क्षेत्र के लोगों को बिलासपुर पहुंचने के लिए वर्तमान में 60 से 80 किलोमीटर का सफर तय करना पड़ता है। लेकिन जब पुल बनकर तैयार हो जाएगा तो यह दूरी कम होकर आधी रह जाएगी। पुल के निर्मित हो जाने से विधानसभा क्षेत्र झंडूता के लोगों को चंडीगढ़, दिल्ली, पंजाब जाने के लिए कम दूरी तय करनी पड़ेगी। जिससे धन और समय दोनों की बचत होगी।
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कोर्ट के आदेश पर फिर शुरू हुआ था कार्य
वर्ष 2010 के बंद हुआ पुल का कार्य कोर्ट के आदेशों पर 2016 में फिर शुरू हुआ। काम बंद होने से पहले लोक निर्माण विभाग ने इस पर 18.46 करोड़ रुपये खर्च भी कर दिए थे। पुल के निर्माण को लेकर लोग कई बार सरकारों और राजनेताओं के चक्कर काटते रहे। लेकिन इससे भी मामला हल नहीं हुआ तो 14 पंचायतों ने ग्राम सभाओं में प्रस्ताव पारित कर इस मसले को हाईकोर्ट के सामने रखने का फैसला लिया था। सलवाड़ पंचायत के पूर्व प्रधान कांशी राम ने हाईकोर्ट में इस बारे में जनहित याचिका दायर की थी और हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को पुल का काम जल्द पूरा करने के आदेश दिए थे। 2016 में गैमन इंडिया को फिर से पुल का काम करने का जिम्मा सौंपा गया था। गोबिंदसागर झील पर बन रहे इस पुल के दो पिल्लर बन चुके हैं। 70 फीसदी कार्य भी पूरा हो चुका है।
वीरभद्र सिंह ने 2005 में किया था शिलान्यास
बागछाल पुल का शिलान्यास करीब 16 साल पहले दिवंगत पूर्व सीएम वीरभद्र सिंह ने किया था। विधानसभा क्षेत्र झंडूता में ज्यादातर गांव पिछड़े क्षेत्र में आते हैं उन लोगों को कश्ती में सवार होकर दरिया पार करनी पड़ती है। पैदल चलकर पंजाब की सीमा तक पहुंचने के बाद यहां के ग्रामीण बस पकड़ते हैं। गर्मियों के दिनों में उन लोगों को सैकड़ों किलोमीटर घूम के वाया बिलासपुर आना पड़ता है। इस पुल के बन जाने के बाद दोनों विधानसभा क्षेत्रों के लोगों को आरपार जाना आसान हो जाएगा।
पिछड़े क्षेत्र की 14 पंचायतें होंगी विकसित
कोटधार क्षेत्र की 14 पंचायतों समेत झंडूता विस क्षेत्र की 42 ग्राम पंचायतों को इस पुल का लाभ मिलेगा। यहां से जिला मुख्यालय बिलासपुर जाने के लिए करीब 100 किलोमीटर की दूरी तय करनी पड़ती है। जबकि गोविंदसागर झील के उस पार बिलासपुर सामने दिखता है। इस पुल के बनने के बाद कोटधार से बिलासपुर की दूरी करीब 30 किलोमीटर ही रह जाएगी। पुल के बनने से हमीरपुर, ऊना और बिलासपुर के सवा लाख लोगों को लाभ होगा। कोटधार की पिछड़ी पंचायतों कलोल, भड़ोली कलां, जेजवीं, सलवाड़, धनी, पपलोआ, डूडियां, मलरावं, जड्डू, कोसरियां, बड़गांव गलू, नघ्यार, घराण, सनीहरा को सीधे इससे फायदा मिलेगा। वर्तमान में कीरतपुर की दूरी झंडूता से करीब 100 किलोमीटर है। लेकिन पुल बनने से यह दूरी आधी रहर जाएगी।
विधानसभा के पिछड़े क्षेत्र को विकसित करने के लिए लगातार प्रयासरत हूं। बागछाल पुल का काम जल्द से जल्द पूरा कराने की कोशिश है। पुल के तैयार होने हलके की 70 हजार के करीब की आबादी सीधे लाभान्वित होगी। लोग जिला मुख्यालय से सीधे जुड़ जाएंगे। कनेक्टिविटी बढ़ने से विकास को गति मिलेगी।
- जीत राम कटवाल, विधायक झंडूता विस क्षेत्र
पुल का सत्तर फीसदी कार्य पूरा हो चुका है। निर्माण कार्य तेजी से आगे बढ़ाया जा रहा है। सितंबर 2022 में निर्माण कार्य पूरा हो जाने की संभावना है।
- अच्छर सिंह चौहान, एसडीओ लोनिवि
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क्षेत्र में सड़कों की संख्या तो बढ़ी है लेकिन, बिलासपुर और स्वारघाट पहुंचने के लिए यहां के लोग अभी भी कई किलोमीटर का सफर तय कर रहे हैं। अब बागछाल पुल तैयार होने से कोटधार के लोगों की सबसे बडी समस्या का समाधान हो जाएगा। इस पुल को सितंबर 2022 तक तैयार कर लिया जाएगा। पुल का 70 फीसदी कार्य पूरा हो चुका है।
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लगभग 45 करोड़ रुपये की लागत निर्मित किए जा रहे 330 मीटर लंबे बागछाल पुल के बनने से झंडूता और श्री नयना देवी जी विस क्षेत्र की हजारों की आबादी लाभान्वित होगी। दोनों विस क्षेत्र के लोगों को बिलासपुर पहुंचने के लिए वर्तमान में 60 से 80 किलोमीटर का सफर तय करना पड़ता है। लेकिन जब पुल बनकर तैयार हो जाएगा तो यह दूरी कम होकर आधी रह जाएगी। पुल के निर्मित हो जाने से विधानसभा क्षेत्र झंडूता के लोगों को चंडीगढ़, दिल्ली, पंजाब जाने के लिए कम दूरी तय करनी पड़ेगी। जिससे धन और समय दोनों की बचत होगी।
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कोर्ट के आदेश पर फिर शुरू हुआ था कार्य
वर्ष 2010 के बंद हुआ पुल का कार्य कोर्ट के आदेशों पर 2016 में फिर शुरू हुआ। काम बंद होने से पहले लोक निर्माण विभाग ने इस पर 18.46 करोड़ रुपये खर्च भी कर दिए थे। पुल के निर्माण को लेकर लोग कई बार सरकारों और राजनेताओं के चक्कर काटते रहे। लेकिन इससे भी मामला हल नहीं हुआ तो 14 पंचायतों ने ग्राम सभाओं में प्रस्ताव पारित कर इस मसले को हाईकोर्ट के सामने रखने का फैसला लिया था। सलवाड़ पंचायत के पूर्व प्रधान कांशी राम ने हाईकोर्ट में इस बारे में जनहित याचिका दायर की थी और हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को पुल का काम जल्द पूरा करने के आदेश दिए थे। 2016 में गैमन इंडिया को फिर से पुल का काम करने का जिम्मा सौंपा गया था। गोबिंदसागर झील पर बन रहे इस पुल के दो पिल्लर बन चुके हैं। 70 फीसदी कार्य भी पूरा हो चुका है।
वीरभद्र सिंह ने 2005 में किया था शिलान्यास
बागछाल पुल का शिलान्यास करीब 16 साल पहले दिवंगत पूर्व सीएम वीरभद्र सिंह ने किया था। विधानसभा क्षेत्र झंडूता में ज्यादातर गांव पिछड़े क्षेत्र में आते हैं उन लोगों को कश्ती में सवार होकर दरिया पार करनी पड़ती है। पैदल चलकर पंजाब की सीमा तक पहुंचने के बाद यहां के ग्रामीण बस पकड़ते हैं। गर्मियों के दिनों में उन लोगों को सैकड़ों किलोमीटर घूम के वाया बिलासपुर आना पड़ता है। इस पुल के बन जाने के बाद दोनों विधानसभा क्षेत्रों के लोगों को आरपार जाना आसान हो जाएगा।
पिछड़े क्षेत्र की 14 पंचायतें होंगी विकसित
कोटधार क्षेत्र की 14 पंचायतों समेत झंडूता विस क्षेत्र की 42 ग्राम पंचायतों को इस पुल का लाभ मिलेगा। यहां से जिला मुख्यालय बिलासपुर जाने के लिए करीब 100 किलोमीटर की दूरी तय करनी पड़ती है। जबकि गोविंदसागर झील के उस पार बिलासपुर सामने दिखता है। इस पुल के बनने के बाद कोटधार से बिलासपुर की दूरी करीब 30 किलोमीटर ही रह जाएगी। पुल के बनने से हमीरपुर, ऊना और बिलासपुर के सवा लाख लोगों को लाभ होगा। कोटधार की पिछड़ी पंचायतों कलोल, भड़ोली कलां, जेजवीं, सलवाड़, धनी, पपलोआ, डूडियां, मलरावं, जड्डू, कोसरियां, बड़गांव गलू, नघ्यार, घराण, सनीहरा को सीधे इससे फायदा मिलेगा। वर्तमान में कीरतपुर की दूरी झंडूता से करीब 100 किलोमीटर है। लेकिन पुल बनने से यह दूरी आधी रहर जाएगी।
विधानसभा के पिछड़े क्षेत्र को विकसित करने के लिए लगातार प्रयासरत हूं। बागछाल पुल का काम जल्द से जल्द पूरा कराने की कोशिश है। पुल के तैयार होने हलके की 70 हजार के करीब की आबादी सीधे लाभान्वित होगी। लोग जिला मुख्यालय से सीधे जुड़ जाएंगे। कनेक्टिविटी बढ़ने से विकास को गति मिलेगी।
- जीत राम कटवाल, विधायक झंडूता विस क्षेत्र
पुल का सत्तर फीसदी कार्य पूरा हो चुका है। निर्माण कार्य तेजी से आगे बढ़ाया जा रहा है। सितंबर 2022 में निर्माण कार्य पूरा हो जाने की संभावना है।
- अच्छर सिंह चौहान, एसडीओ लोनिवि