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मत्स्य उत्पादन बढ़ाने के लिए वैज्ञानिक टीम पहुंची बिलासपुर: सतपाल मैहता
Updated Thu, 01 Nov 2018 11:18 PM IST
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मत्स्य उत्पादन बढ़ाने के लिए बिलासपुर पहुंचे वैज्ञानिक : मेहता
वैज्ञानिकों की टीम ने किया गोबिंदसागर झील और कोलबांध का निरीक्षण
अमर उजाला ब्यूरो
बिलासपुर। गोबिंदसागर में मछली उत्पादन बढ़ाने के लिए एक टीम ने मौके पर निरीक्षण किया। निदेशक एवं प्रारक्षी मत्स्य विभाग सतपाल मेहता ने बताया कि हिमाचल प्रदेश के बिलासपुर में मानव निर्मित गोबिंदसागर झील में मत्स्य उत्पादन को कैसे बढ़ाया जाए, इस पर वैज्ञानिक अध्ययन करने के उद्देश्य से एक टीम डॉ. सलीम सुल्तान, पशुपालन, डेयरी और मत्स्य पालन विभाग नई दिल्ली के नेतृत्व में दो दिवसीय दौरे पर मत्स्य निदेशालय बिलासपुर पहुंची है। टीम में डॉ. यूके सरकार प्रभारी जलाशय वैटलैंड मत्स्य प्रभाग आईसीएआर सिफरी बैरकपुर कोलकाता और डॉ. मिशाल पी आईसीएआर सिफरी बैरकपुर कोलकाता शामिल हैं।
निदेशक एवं प्रारक्षी मत्स्य सतपाल मेहता ने टीम के साथ गोबिंदसागर झील से घटते मत्स्य उत्पादन को बढ़ाने के उपायों पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि मत्स्य उत्पादन के घटने का जो मुख्य कारण विभाग के सामने आया है। उसमें मूलत: नवनिर्मित कोल बांध से अकारण पानी का छोड़ना, अवैध खनन के कारण उसका मलबा झील और उसकी सहायक नदियों में डालने से मत्स्य धन के प्रजनन स्थलों का प्रभावित होना मुख्य कारण माने गए हैं।
विभाग की दर्शाई गई कमियों के मध्यनजर सिफरी के वैज्ञानिक डॉ. यूके सरकार ने सुझाया कि इस जलाशय से संबंधित मछली का पूरा ब्योरा प्रजाति और उसके भार से संबंधित विभाग को उपलब्ध करवाना होगा और खत्म हो रहे मछली प्रजनन स्थलों को पुनर्जीवित करना भी होगा। इसके अतिरिक्त मत्स्य बीज संग्रहण की 70 एमएम आकार से कम की मछली का बच्चा संग्रहित न किया जाए।
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मेहता ने मछुआरों को आ रही अन्य कठिनाइयों का उल्लेख करते हुए कहा कि विभाग का मुख्य उद्देश्य उनके मछुआरों को लंबे समय तक मछली उपलब्ध करवाना तो है ही, लेकिन निरंतर मछली की उपलब्धता भी विभाग का वास्तविक उद्देश्य है। वैज्ञानिकों ने अपने दूसरे दिन के प्रवास पर भाखड़ा मत्स्य अवतारण केंद्र का प्रवास किया। कहा कि मत्स्य कृषि अनुसंधान संस्थान कोलकाता के वैज्ञानिकों ने एक माह के भीतर गोबिंदसागर से जुड़े इस अध्ययन की योजना तैयार कर विभाग को उपलब्ध करवाने का आश्वासन दिया है।
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वैज्ञानिकों की टीम ने किया गोबिंदसागर झील और कोलबांध का निरीक्षण
अमर उजाला ब्यूरो
बिलासपुर। गोबिंदसागर में मछली उत्पादन बढ़ाने के लिए एक टीम ने मौके पर निरीक्षण किया। निदेशक एवं प्रारक्षी मत्स्य विभाग सतपाल मेहता ने बताया कि हिमाचल प्रदेश के बिलासपुर में मानव निर्मित गोबिंदसागर झील में मत्स्य उत्पादन को कैसे बढ़ाया जाए, इस पर वैज्ञानिक अध्ययन करने के उद्देश्य से एक टीम डॉ. सलीम सुल्तान, पशुपालन, डेयरी और मत्स्य पालन विभाग नई दिल्ली के नेतृत्व में दो दिवसीय दौरे पर मत्स्य निदेशालय बिलासपुर पहुंची है। टीम में डॉ. यूके सरकार प्रभारी जलाशय वैटलैंड मत्स्य प्रभाग आईसीएआर सिफरी बैरकपुर कोलकाता और डॉ. मिशाल पी आईसीएआर सिफरी बैरकपुर कोलकाता शामिल हैं।
निदेशक एवं प्रारक्षी मत्स्य सतपाल मेहता ने टीम के साथ गोबिंदसागर झील से घटते मत्स्य उत्पादन को बढ़ाने के उपायों पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि मत्स्य उत्पादन के घटने का जो मुख्य कारण विभाग के सामने आया है। उसमें मूलत: नवनिर्मित कोल बांध से अकारण पानी का छोड़ना, अवैध खनन के कारण उसका मलबा झील और उसकी सहायक नदियों में डालने से मत्स्य धन के प्रजनन स्थलों का प्रभावित होना मुख्य कारण माने गए हैं।
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विभाग की दर्शाई गई कमियों के मध्यनजर सिफरी के वैज्ञानिक डॉ. यूके सरकार ने सुझाया कि इस जलाशय से संबंधित मछली का पूरा ब्योरा प्रजाति और उसके भार से संबंधित विभाग को उपलब्ध करवाना होगा और खत्म हो रहे मछली प्रजनन स्थलों को पुनर्जीवित करना भी होगा। इसके अतिरिक्त मत्स्य बीज संग्रहण की 70 एमएम आकार से कम की मछली का बच्चा संग्रहित न किया जाए।
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मेहता ने मछुआरों को आ रही अन्य कठिनाइयों का उल्लेख करते हुए कहा कि विभाग का मुख्य उद्देश्य उनके मछुआरों को लंबे समय तक मछली उपलब्ध करवाना तो है ही, लेकिन निरंतर मछली की उपलब्धता भी विभाग का वास्तविक उद्देश्य है। वैज्ञानिकों ने अपने दूसरे दिन के प्रवास पर भाखड़ा मत्स्य अवतारण केंद्र का प्रवास किया। कहा कि मत्स्य कृषि अनुसंधान संस्थान कोलकाता के वैज्ञानिकों ने एक माह के भीतर गोबिंदसागर से जुड़े इस अध्ययन की योजना तैयार कर विभाग को उपलब्ध करवाने का आश्वासन दिया है।