{"_id":"5d1650978ebc3e3c6a51eaa6","slug":"156174349118-bilaspur-news173","type":"story","status":"publish","title_hn":"नाके की सूचना मिलते ही बस से उतार दिए जाते हैं लोग","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
नाके की सूचना मिलते ही बस से उतार दिए जाते हैं लोग
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विज्ञापन
बरमाणा(बिलासपुर)। बंजार बस हादसे के बाद ओवरलोडिंग पर कसे गए शिकंजे के बाद आम लोगों का सफर करना मुश्किल हो गया है। चालान से बचने के लिए निजी बसों के चालक पुलिस नाके की सूचना मिलते ही लोगों को बस से उतार देते हैं और उन्हें नाका पैदल क्रास करने को कहा जाता है। बस के नाका क्रास करने के बाद फिर से बसों मेें ओवरलोडिंग कर लोगों को बैठाया जा रहा है। इस कारण आम लोगों को भारी परेशानियों से दो चार होना पड़ रहा है। जबकि ओवरलोडिंग से हादसे का खतरा लगातार बना हुआ है।
बरमाणा के तहत आने वाले कई गांव को बस सुविधा नाम मात्र की है। लोगों को बिलासपुर आने के लिए या तो निजी वाहनों का सहारा लेना पड़ता है या फिर भीड़भाड़ वाली बस में बैठने के लिए मजबूर होना पड़ता है। वहीं जब सरकार ने बसों में ओवरलोडिंग को लेकर पूर्णता रोक लगा दी है तो आम ग्रामीणों की परेशानी और भी बढ़ गई है।
बरमाणा क्षेत्र के तहत आने वाले गांव हरनोड़ा, बाहोट कसोल, जमथल, नहर, बरमाणा, बैरी, बागा, मलोखर, खारसी, पंजगाई, धार-टटोह, मानर, कनौण से रोजाना सैकड़ों लोग बसों में सफर कर जिला मुख्यालय बिलासपुर में अपने कामों को लेकर पहुंचते हैं लेकिन इन गांवों के लिए पर्याप्त मात्रा में बसें नहीं है। कुछ ऐसे भी गांव हैं जहां पर दिन में केवल सुबह व शाम के समय ही बस आती जाती है।
विज्ञापन
ग्रामीणों का कहना है सरकार ने ओवरलोडिंग पर जो सख्ती की है वह सराहनीय है, लेकिन सरकार को यह भी चाहिए कि वह ग्रामीण क्षेत्रों में 2 से 3 रूटों पर बसें भेजें ताकि लोगों को परेशानी का सामना न करना पड़े।
उधर, आरटीओ बिलासपुर सिद्धार्थ आचार्य का कहना है की बसों की कमी रूटों को लेकर सरकार को अवगत कराया गया है। जिस तरह से आगामी आदेश होंगे उसी तरह से कार्य किए जाएंगे।
बरमाणा के तहत आने वाले कई गांव को बस सुविधा नाम मात्र की है। लोगों को बिलासपुर आने के लिए या तो निजी वाहनों का सहारा लेना पड़ता है या फिर भीड़भाड़ वाली बस में बैठने के लिए मजबूर होना पड़ता है। वहीं जब सरकार ने बसों में ओवरलोडिंग को लेकर पूर्णता रोक लगा दी है तो आम ग्रामीणों की परेशानी और भी बढ़ गई है।
विज्ञापन
बरमाणा क्षेत्र के तहत आने वाले गांव हरनोड़ा, बाहोट कसोल, जमथल, नहर, बरमाणा, बैरी, बागा, मलोखर, खारसी, पंजगाई, धार-टटोह, मानर, कनौण से रोजाना सैकड़ों लोग बसों में सफर कर जिला मुख्यालय बिलासपुर में अपने कामों को लेकर पहुंचते हैं लेकिन इन गांवों के लिए पर्याप्त मात्रा में बसें नहीं है। कुछ ऐसे भी गांव हैं जहां पर दिन में केवल सुबह व शाम के समय ही बस आती जाती है।
विज्ञापन
ग्रामीणों का कहना है सरकार ने ओवरलोडिंग पर जो सख्ती की है वह सराहनीय है, लेकिन सरकार को यह भी चाहिए कि वह ग्रामीण क्षेत्रों में 2 से 3 रूटों पर बसें भेजें ताकि लोगों को परेशानी का सामना न करना पड़े।
उधर, आरटीओ बिलासपुर सिद्धार्थ आचार्य का कहना है की बसों की कमी रूटों को लेकर सरकार को अवगत कराया गया है। जिस तरह से आगामी आदेश होंगे उसी तरह से कार्य किए जाएंगे।