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Bilaspur News: बस हादसे में कंडक्टर की मौत पर परिवार को 13.17 लाख मुआवजा

Wed, 18 Feb 2026 10:32 PM IST
शिमला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर Updated Wed, 18 Feb 2026 10:32 PM IST
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13.17 lakh compensation to the family of the conductor who died in the bus accident
अदालत से
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चालक की लापरवाही साबित, एचआरटीसी पर तय हुई भुगतान की जिम्मेदारी
पत्नी को 50 फीसदी, बच्चों को 20-20 फीसदी और मां को 10 फीसदी हिस्सा
मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण घुमारवीं ने सुनाया मामले पर फैसला

संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण घुमारवीं ने एचआरटीसी बस हादसे में कंडक्टर की मौत के मामले में मृतक के परिवार को 13,17,800 मुआवजा देने के आदेश दिए हैं। यह राशि 7.5 प्रतिशत वार्षिक ब्याज सहित याचिका दायर करने की तारीख से अदा करनी होगी। अधिकरण ने हादसे के लिए बस चालक की लापरवाही को जिम्मेदार ठहराते हुए मुआवजा देने की जिम्मेदारी हिमाचल पथ परिवहन निगम (एचआरटीसी) पर तय की है।

मामले की सुनवाई मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण घुमारवीं के न्यायाधीश डॉ. मोहित बंसल की अदालत में हुई। अदालत में दायर याचिका के अनुसार, मृतक विनोद कुमार एचआरटीसी नालागढ़ डिपो में बतौर कंडक्टर कार्यरत थे। 26 दिसंबर 2018 को वह बस में ड्यूटी पर नालागढ़ से जयनगर जा रहे थे। जब बस बिलासपुर के जामली क्षेत्र के पास पहुंची तो चालक द्वारा कथित तेज व लापरवाही से वाहन चलाने के कारण बस सड़क से नीचे गिर गई। हादसे में करीब 25-26 यात्री घायल हुए और कुछ की मौत भी हुई। विनोद कुमार गंभीर रूप से घायल हो गए थे, जिन्हें अस्पताल ले जाया गया, लेकिन 5 जनवरी 2019 को उन्होंने दम तोड़ दिया। मामले में पुलिस थाना सदर बिलासपुर में आईपीसी की धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज हुई थी। चालक ने अदालत में यह दलील दी कि हादसा वाहन में यांत्रिक खराबी के कारण हुआ, लेकिन वह इसे साबित करने के लिए कोई ठोस साक्ष्य या मैकेनिकल रिपोर्ट पेश नहीं कर सका। अधिकरण ने कहा कि जब वाहन सड़क से नीचे गिरा तो सामान्य परिस्थितियों में यह चालक की लापरवाही की ओर संकेत करता है।
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अदालत ने सुप्रीम कोर्ट और उच्च न्यायालय के विभिन्न निर्णयों का हवाला देते हुए माना कि दुर्घटना चालक की लापरवाही से हुई और उसी के कारण कंडक्टर की मौत हुई। अदालत के समक्ष प्रस्तुत रिकॉर्ड के अनुसार मृतक की मासिक आय 5,500 रुपये मानी गई। मृतक की उम्र 35 वर्ष होने के कारण भविष्य की आय में 40 प्रतिशत वृद्धि जोड़कर गणना की गई। चार आश्रित होने के कारण व्यक्तिगत खर्च के लिए 1/4 कटौती की गई और 16 का मल्टीप्लायर लागू किया गया। इसके अलावा अंतिम संस्कार खर्च, संपत्ति हानि और पारिवारिक स्नेह (कंसोर्टियम) के मद में भी अलग-अलग राशि जोड़ी गई। मुआवजा मृतक की पत्नी उमा देवी, दो नाबालिग बेटों और मां को दिया जाएगा। अदालत ने आदेश दिया कि पत्नी को 50 प्रतिशत राशि, दोनों बेटों को 20-20 प्रतिशत और मां को 10 प्रतिशत दिया जाएगा। नाबालिग बच्चों की राशि राष्ट्रीयकृत बैंक में एफडी के रूप में उनकी बालिग होने तक जमा रहेगी। अदालत ने स्पष्ट किया कि एचआरटीसी को पूरी मुआवजा राशि 7.5 प्रतिशत वार्षिक ब्याज सहित जमा करनी होगी। अंतरिम मुआवजा (यदि पहले दिया गया हो) अंतिम राशि में समायोजित किया जाएगा।
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