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मरीजों को अस्पतालों में नहीं मिल रही निशुल्क जेनेरिक दवाइयां
Updated Tue, 30 Oct 2018 11:20 PM IST
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मरीजों को अस्पतालों में नहीं मिल रही निशुल्क जेनेरिक दवाइयां
जिले के अस्पतालों में डॉक्टरों की लिखी दवाइयां उपलब्ध नहीं
मरीज बाजारों से महंगी दवाइयां खरीदने को मजबूर
‘अमर उजाला’ टीम के औचक निरीक्षण के बाद हुआ खुलासा
शुभम राही
बिलासपुर। लोगों को अस्पताल से निशुल्क दवाइयां मुहैया करवाने के आदेश के बाद भी डॉक्टर मरीजों को जेनेरिक दवाइयां नहीं लिख रहे हैं। इस कारण जिला अस्पताल में आने वाले अधिकांश मरीजों को अस्पताल के बाहर दुकानों से मजबूरी में दवाइयां खरीदनी पड़ रही है जिसका खुलासा मंगलवार को ‘अमर उजाला’ टीम द्वारा की गई पड़ताल में हुआ है। हालांकि स्वास्थ्य विभाग का दावा है कि मरीजों को अस्पताल से निशुल्क दवाइयां मुहैया करवाई जा रही है लेकिन वास्तव में जमीनी हकीकत कुछ और है।
‘अमर उजाला’ टीम ने मंगलवार को बिलासपुर अस्पताल में चिकित्सकों द्वारा जेनेरिक दवाइयां लिखे जाने की पड़ताल की। पड़ताल में चौकाने वाली स्थिति सामने आईं जिसमें अधिकतर चिकित्सक एक पर्ची पर दो जेनेरिक तो बाकी की सारी दवाइयां बाहरी और महंगी लिख रहे हैं।
वहीं, अस्पताल में आई सोमा देवी, ब्यासा देवी, प्रदीप कुमार व अन्य दर्जनों मरीजों ने बताया कि यहां अस्पताल में उन्हें दवाइयां नहीं मिली। जब उन्होंने यहां पर बैठे कर्मचारियों से पूछा कि दवाई क्यों नहीं है तो उन्होंने बताया कि ये दवाइयां बाहर मिलेंगी जिससे अनुमान लगा सकते हैं कि यहां पर चिकित्सक मरीजों को लेकर कितने सजग है।
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वहीं, हैरान करने वाली बात तो यह है कि संबंधित अधिकारी कहते हैं कि सभी चिकित्सक जेनेरिक दवा लिख रहे हैं। जिस प्रकार से बाहर से दवाइयां लिखी जा रही है उससे साफ है कि सरकार के आदेशों का यहां कोई फर्क नहीं पड़ता।
इनसेट...
केंद्र सरकार और एमसीआई का निर्देश
केंद्र सरकार और मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया ने अक्तूबर 2016 में ही जेनेरिक दवाएं लिखने का निर्देश जारी किया है। 2 साल के बाद भी बिलासपुर अस्पताल में चिकित्सक जेनेरिक दवाएं नहीं लिख रहे हैं। इस मामले में न तो कोई शिकायत हो रही है और न ही एमसीआई कोई कार्रवाई कर रही है।
.....
कमीशनखोरी का बड़ा खेल
दरअसल, बड़ी दवा कंपनियां चिकित्सकों को खास कंपनी की दवा लिखने के लिए बड़े ऑफर देती हैं। इसमें सैर सपाटे के पैकेज के साथ अन्य उपहार होते हैं। सूत्र बताते हैं कि इसमें नकदी तक का ऑफर रहता है।
--
अगर ऐसा हुआ है तो चिकित्सकों से पूछेंगे
मैं अभी छुट्टी पर हूं। अगर ऐसा हुआ है तो चिकित्सकों से पूछा जाएगा। सीएमओ साहब ही इस सदर्भ में जानकारी दे पाएंगें।
.....डॉ. राजेश आहलूवालिया एमएस बिलासपुर
.....जारी
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जिले के अस्पतालों में डॉक्टरों की लिखी दवाइयां उपलब्ध नहीं
मरीज बाजारों से महंगी दवाइयां खरीदने को मजबूर
‘अमर उजाला’ टीम के औचक निरीक्षण के बाद हुआ खुलासा
शुभम राही
बिलासपुर। लोगों को अस्पताल से निशुल्क दवाइयां मुहैया करवाने के आदेश के बाद भी डॉक्टर मरीजों को जेनेरिक दवाइयां नहीं लिख रहे हैं। इस कारण जिला अस्पताल में आने वाले अधिकांश मरीजों को अस्पताल के बाहर दुकानों से मजबूरी में दवाइयां खरीदनी पड़ रही है जिसका खुलासा मंगलवार को ‘अमर उजाला’ टीम द्वारा की गई पड़ताल में हुआ है। हालांकि स्वास्थ्य विभाग का दावा है कि मरीजों को अस्पताल से निशुल्क दवाइयां मुहैया करवाई जा रही है लेकिन वास्तव में जमीनी हकीकत कुछ और है।
‘अमर उजाला’ टीम ने मंगलवार को बिलासपुर अस्पताल में चिकित्सकों द्वारा जेनेरिक दवाइयां लिखे जाने की पड़ताल की। पड़ताल में चौकाने वाली स्थिति सामने आईं जिसमें अधिकतर चिकित्सक एक पर्ची पर दो जेनेरिक तो बाकी की सारी दवाइयां बाहरी और महंगी लिख रहे हैं।
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वहीं, अस्पताल में आई सोमा देवी, ब्यासा देवी, प्रदीप कुमार व अन्य दर्जनों मरीजों ने बताया कि यहां अस्पताल में उन्हें दवाइयां नहीं मिली। जब उन्होंने यहां पर बैठे कर्मचारियों से पूछा कि दवाई क्यों नहीं है तो उन्होंने बताया कि ये दवाइयां बाहर मिलेंगी जिससे अनुमान लगा सकते हैं कि यहां पर चिकित्सक मरीजों को लेकर कितने सजग है।
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वहीं, हैरान करने वाली बात तो यह है कि संबंधित अधिकारी कहते हैं कि सभी चिकित्सक जेनेरिक दवा लिख रहे हैं। जिस प्रकार से बाहर से दवाइयां लिखी जा रही है उससे साफ है कि सरकार के आदेशों का यहां कोई फर्क नहीं पड़ता।
इनसेट...
केंद्र सरकार और एमसीआई का निर्देश
केंद्र सरकार और मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया ने अक्तूबर 2016 में ही जेनेरिक दवाएं लिखने का निर्देश जारी किया है। 2 साल के बाद भी बिलासपुर अस्पताल में चिकित्सक जेनेरिक दवाएं नहीं लिख रहे हैं। इस मामले में न तो कोई शिकायत हो रही है और न ही एमसीआई कोई कार्रवाई कर रही है।
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कमीशनखोरी का बड़ा खेल
दरअसल, बड़ी दवा कंपनियां चिकित्सकों को खास कंपनी की दवा लिखने के लिए बड़े ऑफर देती हैं। इसमें सैर सपाटे के पैकेज के साथ अन्य उपहार होते हैं। सूत्र बताते हैं कि इसमें नकदी तक का ऑफर रहता है।
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अगर ऐसा हुआ है तो चिकित्सकों से पूछेंगे
मैं अभी छुट्टी पर हूं। अगर ऐसा हुआ है तो चिकित्सकों से पूछा जाएगा। सीएमओ साहब ही इस सदर्भ में जानकारी दे पाएंगें।
.....डॉ. राजेश आहलूवालिया एमएस बिलासपुर
.....जारी