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सात महीने बाद भी जांच करने नहीं पहुंचा कोई अधिकारी
Updated Fri, 03 Nov 2017 11:57 PM IST
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बिलासपुर। टावर लाइन शोषित जागरूकता मंच के प्रदेश संयोजक रजनीश शर्मा, राज्य कानूनी सलाहकार अजय नड्डा और मंच के जिला प्रधान बाबूराम ठाकुर ने कहा कि अप्रैल महीने में सुई सुराहाड़ गांव में टावर लाइन धमाकों से करीब 10 परिवारों को नुकसान हुआ था। इसके बाद प्रशासन ने जांच करने के आदेश दिए थे। लेकिन, प्रशासन के आदेश के बाद भी कोई अधिकारी मौके पर जांच करने के लिए नहीं पहुंचा।
उन्होंने कहा कि कोलडैम लुधियाना उच्च तापीय क्षमता की टावर लाइन में धमाका हुआ था। इसकी वजह से करीब 10 परिवारों के घरों में लाखों का नुकसान हुआ था। उनके बिजली के उपकरण पंखे वाशिंग मशीन, टीवी फ्रिज आदि जल गए थे। इसके बाद इस संबंध में एडीएम बिलासपुर को शिकायत दी थी। एडीएम ने जांच के आदेश एसडीएम को दिए थे। इसके बाद एसडीएम ने इस मामले की जांच के लिए तहसीलदार जीतराम भारद्वाज को मौके पर जाकर जांच करने के आदेश दिए थे।
मंच के सदस्यों ने आरोप लगाया कि 7 महीने बीत जाने के बाद भी तहसीलदार बिलासपुर न ही मौके पर गए तथा न ही नुकसान संबंधी कोई रिपोर्ट बनाई। मंच के सदस्यों ने कहा कि तहसीलदार बिलासपुर जांच में कोताही बरत रहे हैं। इस कारण आज भी लोगों के घरों में करंट लगने का खतरा बना हुआ है। मंच के सभी सदस्यों ने जिला प्रशासन को चेताया है कि एक सप्ताह में अंदर कार्रवाई नहीं की गई तो ग्रामीण तहसीलदार का घेराव करने पर मजबूर होंगे। वहीं अगर इस दौरान फिर से कोई हादसा होता है तो उसकी जिम्मेवारी जिला प्रशासन की होगी।
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उन्होंने कहा कि कोलडैम लुधियाना उच्च तापीय क्षमता की टावर लाइन में धमाका हुआ था। इसकी वजह से करीब 10 परिवारों के घरों में लाखों का नुकसान हुआ था। उनके बिजली के उपकरण पंखे वाशिंग मशीन, टीवी फ्रिज आदि जल गए थे। इसके बाद इस संबंध में एडीएम बिलासपुर को शिकायत दी थी। एडीएम ने जांच के आदेश एसडीएम को दिए थे। इसके बाद एसडीएम ने इस मामले की जांच के लिए तहसीलदार जीतराम भारद्वाज को मौके पर जाकर जांच करने के आदेश दिए थे।
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मंच के सदस्यों ने आरोप लगाया कि 7 महीने बीत जाने के बाद भी तहसीलदार बिलासपुर न ही मौके पर गए तथा न ही नुकसान संबंधी कोई रिपोर्ट बनाई। मंच के सदस्यों ने कहा कि तहसीलदार बिलासपुर जांच में कोताही बरत रहे हैं। इस कारण आज भी लोगों के घरों में करंट लगने का खतरा बना हुआ है। मंच के सभी सदस्यों ने जिला प्रशासन को चेताया है कि एक सप्ताह में अंदर कार्रवाई नहीं की गई तो ग्रामीण तहसीलदार का घेराव करने पर मजबूर होंगे। वहीं अगर इस दौरान फिर से कोई हादसा होता है तो उसकी जिम्मेवारी जिला प्रशासन की होगी।
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