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Bilaspur News: जिले में सितंबर तक होगी स्कूलों में विद्यार्थियों की 100 फीसदी स्क्रीनिंग
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सरकारी और गैर-सरकारी स्कूलों के 3 से 18 साल के बच्चों की होगी विशेष जांच, 5,742 शिक्षक अभियान में तैनात
दिव्यांग बच्चों की पहचान कर योजनाओं से जोड़ा जाएगा
चिह्नित दिव्यांग बच्चों को स्पेशल एजुकेटर करेंगे प्रमाणित, मिलेगा सरकारी योजनाओं का लाभ
प्रियंका ठाकुर
बिलासपुर। जिले के सभी सरकारी और गैर सरकारी स्कूलों में विद्यार्थियों की 100 फीसदी स्क्रीनिंग सितंबर तक पूरी की जाएगी। इसके लिए स्कूलों में प्रशस्त एप 2.0 के माध्यम से विद्यार्थियों की स्क्रीनिंग करने के निर्देश जारी किए गए हैं। उप निदेशक शिक्षा गुणवत्ता एवं जिला परियोजना अधिकारी निशा गुप्ता ने इस संबंध में सभी प्रधानाचार्यों, मुख्याध्यापकों और संबंधित अधिकारियों को निर्देश जारी किए हैं। सितंबर 2026 के पहले सप्ताह तक कक्षा शिक्षकों को अपनी निर्धारित कक्षाओं के विद्यार्थियों की पार्ट-1 स्क्रीनिंग पूरी करनी होगी। इसके बाद अक्तूबर में विशेष शिक्षकों की ओर से पार्ट-2 स्क्रीनिंग की जाएगी। अभियान का उद्देश्य समावेशी शिक्षा को बढ़ावा देना और दिव्यांग बच्चों को समाज की मुख्यधारा से जोड़ना है। इसके तहत 3 से 18 वर्ष तक के बच्चों को शामिल किया जा रहा है, ताकि उनकी विशिष्ट जरूरतों की समय रहते पहचान की जा सके। अभियान की निगरानी और संचालन के लिए जिले के 5,742 शिक्षकों को जिम्मेदारी सौंपी गई है। सभी शिक्षकों को निर्धारित समय में स्क्रीनिंग प्रक्रिया पूरी करने के निर्देश दिए गए हैं। प्रशस्त एप पर प्रशिक्षण वीडियो और शिक्षण सत्र भी उपलब्ध करवाए गए हैं। स्क्रीनिंग शुरू करने से पहले शिक्षकों के लिए इन वीडियो को पूरा देखना अनिवार्य किया गया है। संवाद
शिक्षकों को स्कूलों में नामांकित सभी बच्चों के व्यवहार और शारीरिक गतिविधियों पर बारीकी से नजर रखने के निर्देश दिए गए हैं। यदि किसी बच्चे में शारीरिक, मानसिक या सीखने से जुड़ी किसी तरह की अक्षमता के संकेत मिलते हैं तो शिक्षक उसका पूरा विवरण प्रशस्त एप पर अपलोड करेंगे। इससे बच्चों का केंद्रीकृत डिजिटल डाटाबेस तैयार होगा। संवाद
विशेष शिक्षक करेंगे दोबारा मूल्यांकन
प्रथम चरण में शिक्षक ऐप के माध्यम से बच्चों का डेटा अपलोड करेंगे। दूसरे चरण में विशेष शिक्षक संबंधित स्कूल में पहुंचकर ऐसे बच्चों का दोबारा परीक्षण और मूल्यांकन करेंगे। यदि जांच में अक्षमता की पुष्टि होती है तो विभागीय नियमों के अनुसार बच्चे को दिव्यांगता प्रमाणपत्र जारी किया जाएगा और उसे विशेष आवश्यकता वाले बच्चों की श्रेणी में शामिल किया जाएगा। इसके बाद पात्र बच्चों को सरकार की विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं, छात्रवृत्ति, सहायक उपकरण और अन्य सुविधाओं का लाभ मिल सकेगा। शिक्षा अधिकारियों के अनुसार डिजिटल स्क्रीनिंग व्यवस्था से बच्चों में शुरुआती उम्र में ही विशेष जरूरतों की पहचान करने में मदद मिलेगी और समय रहते उन्हें आवश्यक सहायता उपलब्ध कराई जा सकेगी।
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दिव्यांग बच्चों की पहचान कर योजनाओं से जोड़ा जाएगा
चिह्नित दिव्यांग बच्चों को स्पेशल एजुकेटर करेंगे प्रमाणित, मिलेगा सरकारी योजनाओं का लाभ
प्रियंका ठाकुर
बिलासपुर। जिले के सभी सरकारी और गैर सरकारी स्कूलों में विद्यार्थियों की 100 फीसदी स्क्रीनिंग सितंबर तक पूरी की जाएगी। इसके लिए स्कूलों में प्रशस्त एप 2.0 के माध्यम से विद्यार्थियों की स्क्रीनिंग करने के निर्देश जारी किए गए हैं। उप निदेशक शिक्षा गुणवत्ता एवं जिला परियोजना अधिकारी निशा गुप्ता ने इस संबंध में सभी प्रधानाचार्यों, मुख्याध्यापकों और संबंधित अधिकारियों को निर्देश जारी किए हैं। सितंबर 2026 के पहले सप्ताह तक कक्षा शिक्षकों को अपनी निर्धारित कक्षाओं के विद्यार्थियों की पार्ट-1 स्क्रीनिंग पूरी करनी होगी। इसके बाद अक्तूबर में विशेष शिक्षकों की ओर से पार्ट-2 स्क्रीनिंग की जाएगी। अभियान का उद्देश्य समावेशी शिक्षा को बढ़ावा देना और दिव्यांग बच्चों को समाज की मुख्यधारा से जोड़ना है। इसके तहत 3 से 18 वर्ष तक के बच्चों को शामिल किया जा रहा है, ताकि उनकी विशिष्ट जरूरतों की समय रहते पहचान की जा सके। अभियान की निगरानी और संचालन के लिए जिले के 5,742 शिक्षकों को जिम्मेदारी सौंपी गई है। सभी शिक्षकों को निर्धारित समय में स्क्रीनिंग प्रक्रिया पूरी करने के निर्देश दिए गए हैं। प्रशस्त एप पर प्रशिक्षण वीडियो और शिक्षण सत्र भी उपलब्ध करवाए गए हैं। स्क्रीनिंग शुरू करने से पहले शिक्षकों के लिए इन वीडियो को पूरा देखना अनिवार्य किया गया है। संवाद
शिक्षकों को स्कूलों में नामांकित सभी बच्चों के व्यवहार और शारीरिक गतिविधियों पर बारीकी से नजर रखने के निर्देश दिए गए हैं। यदि किसी बच्चे में शारीरिक, मानसिक या सीखने से जुड़ी किसी तरह की अक्षमता के संकेत मिलते हैं तो शिक्षक उसका पूरा विवरण प्रशस्त एप पर अपलोड करेंगे। इससे बच्चों का केंद्रीकृत डिजिटल डाटाबेस तैयार होगा। संवाद
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विशेष शिक्षक करेंगे दोबारा मूल्यांकन
प्रथम चरण में शिक्षक ऐप के माध्यम से बच्चों का डेटा अपलोड करेंगे। दूसरे चरण में विशेष शिक्षक संबंधित स्कूल में पहुंचकर ऐसे बच्चों का दोबारा परीक्षण और मूल्यांकन करेंगे। यदि जांच में अक्षमता की पुष्टि होती है तो विभागीय नियमों के अनुसार बच्चे को दिव्यांगता प्रमाणपत्र जारी किया जाएगा और उसे विशेष आवश्यकता वाले बच्चों की श्रेणी में शामिल किया जाएगा। इसके बाद पात्र बच्चों को सरकार की विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं, छात्रवृत्ति, सहायक उपकरण और अन्य सुविधाओं का लाभ मिल सकेगा। शिक्षा अधिकारियों के अनुसार डिजिटल स्क्रीनिंग व्यवस्था से बच्चों में शुरुआती उम्र में ही विशेष जरूरतों की पहचान करने में मदद मिलेगी और समय रहते उन्हें आवश्यक सहायता उपलब्ध कराई जा सकेगी।
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