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Himachal Apple Season: हिमाचल प्रदेश में सेब उत्पादन का क्षेत्र तो बढ़ा मगर पैदावार उस अनुपात में नहीं, जानें

Tue, 15 Jul 2025 05:00 AM IST
अंकेश डोगरा अमर उजाला ब्यूरो, शिमला।
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला। Published by: अंकेश डोगरा Updated Tue, 15 Jul 2025 05:00 AM IST
सार

Himachal Apple Season : हिमाचल प्रदेश में सेब का कारोबार पिछले एक दशक में दो से चार करोड़ पेटियों में ही सिमट रहा है। इस बार ऊंचाई वाले क्षेत्रों में सेब की फसल बहुत कम है। पढ़ें पूरी खबर...

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area of apple production increased in Himachal Pradesh but the yield is not in the same proportion
सेब। - फोटो : अमर उजाला नेटवर्क

विस्तार

हिमाचल प्रदेश में सेब उत्पादन का क्षेत्र तो बढ़ा है, मगर पैदावार उस अनुपात में नहीं बढ़ी है। सेब का कारोबार पिछले एक दशक में दो से चार करोड़ पेटियों में ही सिमट रहा है। 5000 करोड़ रुपये का सालाना कारोबार होने का आंकड़ा भी पिछले कई वर्षों से बना हुआ है। यानी इससे ऊपर यह आंकड़ा नहीं जा रहा है। इसके पीछे तर्क दिया जा रहा है कि वास्तव में न तो सेब उत्पादन का क्षेत्र ही बहुत ज्यादा बढ़ा है और न ही पैदावार को उस हिसाब से गति मिली है। बागवानी विभाग के अनुसार राज्य में फल उत्पादन के तहत कुल क्षेत्र 2.38 लाख हेक्टेयर आता है। इसमें से सेब उत्पादन के अंतर्गत 1.16 लाख हेक्टेयर क्षेत्र है।

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2020 में 2.40 करोड़ पेटियों (कार्टन) का उत्पादन हुआ। 2021 में उत्पादन बढ़कर लगभग 3.05 करोड़ पेटियों में पहुंच गया। 2022 में 3.36 करोड़ पेटियों की पैदावार हुई। 2023 में भारी बारिश और आपदा के चलते सेब सीजन बहुत प्रभावित रहा। एक तो फसल पहले से ही पतली थी, वहीं ज्यादातर क्षेत्रों के सेब के बगीचे अल्टरनेरिया पतझड़ या मासेर्निना ब्लॉज जैसी बीमारियों की चपेट में आ गए। मौसम की बेरुखी के चलते 2023 में उत्पादन गिरकर 2.11 करोड़ पेटियों तक पहुंच गया। यानी 2,500-3,000 करोड़ रुपये का नुकसान होने का अनुमान लगाया गया। 2024 में भी पैदावार 2.51 करोड़ पेटियों में ही सिमटी रही। इस बार भी स्थिति लगभग जस की तस है। इस बार ऊंचाई वाले क्षेत्रों में सेब की फसल बहुत कम है। मौसम की मार के चलते भी हिमाचल प्रदेश की सेब बागवानी रफ्तार नहीं पकड़ पा रही है।

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2010-11 में 8.92 लाख मीट्रिक टन से अधिक की उच्चतम वार्षिक उपज दर्ज की गई थी। यानी 4 करोड़ रुपये से अधिक की पैदावार हुई। इसके बाद हिमाचल प्रदेश इस आंकड़े को पार नहीं कर पाया। प्रति हेक्टेयर उत्पादन में भी 13 साल में 50 प्रतिशत तक की गिरावट दर्ज की गई है।

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सेब बागवानी के 5000 करोड़ रुपये होने का आंकड़ा केवल घिसा-पिटा
डॉ. वाईएस परमार बागवानी एवं वानिकी विश्वविद्यालय नौणी के पूर्व कुलपति डॉ. विजय सिंह ठाकुर का कहना है कि हिमाचल प्रदेश में सेब बागवानी का कारोबार 5000 करोड़ रुपये होने का आंकड़ा केवल घिसा-पिटा हुआ है। यह वह आंकड़ा है, जो बागवानों की आमदनी से संबंधित है। असल में इसका ठीक से आकलन कर आढ़ती, लदानी, कार्टन व्यापारियों, श्रमिकों, परिवहन आदि पर व्यय समेत विभिन्न घटकों को लिया जाए तो कुल कारोबार 10 से 13 हजार करोड़ रुपये तक का है। हिमाचल में असल में सेब उत्पादन का वास्तविक क्षेत्र बहुत ज्यादा बढ़ा भी नहीं है। जब 1982 में स्कैब आया था तो उस वक्त सेब बागवानी के तहत 48,000 हेक्टेयर क्षेत्र आता था। अब यह एक लाख हेक्टेयर से ज्यादा माना जा रहा है। मगर इसमें 1982 का वह आंकड़ा भी ले लिया गया है। पर उस समय के सेब के पुराने बगीचे खत्म हो गए हैं। अगर पिछला आंकड़ा हटा दिया जाए तो असल में सेब की यह बागवानी 52,000 से 60,000 हेक्टेयर क्षेत्र में हो रही है।

जलवायु परिवर्तन का सेब की उपज पर बुरा असर पड़ा है। पुराने पेड़ों की जगह उच्च घनत्व वाले सेब के पौधों को लगाने से अभी नई फसल आने में वक्त लग रहा है। इससे भी पैदावार बढ़ती हुई नहीं दिख रही है। 2019 के बाद ही उच्च घनत्व वाले बगीचे ज्यादा लगने शुरू हुए हैं। - विनय सिंह, निदेशक, उद्यान विभाग, हिमाचल प्रदेश सरकार
 
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