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AIIMS Bilaspur: एम्स बिलासपुर में नई तकनीक जटिल सर्जरी के लिए कारगर, रिकवरी जल्द; कम होगा रक्तस्राव, जानें

Sun, 28 Dec 2025 11:17 AM IST
अंकेश डोगरा सरोज पाठक, बिलासपुर।
सरोज पाठक, बिलासपुर। Published by: अंकेश डोगरा Updated Sun, 28 Dec 2025 11:17 AM IST
सार

एम्स बिलासपुर में मल्टी-स्पेशियलिटी मेजर ऑपरेशन थिएटर को अत्याधुनिक बनाने के लिए जल्द ही रेडियो फ्रीक्वेंसी जनरेटर शामिल किया जाएगा। यह उपकरण विशेष रूप से जटिल और लंबे ऑपरेशनों के लिए उपयोगी साबित होगा। जानें सभी फायदे विस्तार से...
 

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AIIMS Bilaspur operating theater will be equipped with state-of-the-art radio frequency generator
एम्स बिलासपुर - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) बिलासपुर में स्वास्थ्य सेवाओं को आधुनिक तकनीक से लैस किया जा रहा है। एम्स के मल्टी-स्पेशियलिटी मेजर ऑपरेशन थिएटर को अत्याधुनिक बनाने के लिए जल्द ही रेडियो फ्रीक्वेंसी जनरेटर शामिल किया जाएगा। इस नई तकनीक के आने से संस्थान में होने वाली सर्जरी पहले से अधिक सटीक, सुरक्षित और कम जोखिम वाली होंगी।

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यह उपकरण विशेष रूप से जटिल और लंबे ऑपरेशनों के लिए उपयोगी साबित होगा। इससे न केवल सर्जरी के दौरान रक्तस्राव कम होगा, बल्कि ऑपरेशन में लगने वाला समय भी घटेगा और मरीजों की रिकवरी पहले की तुलना में कहीं अधिक तेज होगी। रेडियो फ्रीक्वेंसी जनरेटर का उपयोग वेसल सीलिंग और बाइपोलर रिसेक्शन जैसी आधुनिक सर्जिकल प्रक्रियाओं में किया जाता है।

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इस तकनीक के माध्यम से ऑपरेशन के दौरान रक्त वाहिकाओं को तुरंत और प्रभावी ढंग से सील किया जा सकता है, जिससे खून बहने की संभावना बेहद कम हो जाती है। यह तकनीक पेट, प्रोस्टेट, गर्भाशय, मूत्र तंत्र और अन्य जटिल अंगों से जुड़ी सर्जरी में विशेष रूप से कारगर मानी जाती है। साथ ही आसपास के स्वस्थ ऊतकों को न्यूनतम नुकसान पहुंचता है, जिससे संक्रमण, जटिलताओं और दोबारा सर्जरी की संभावना भी कम हो जाती है। टेंडर में तकनीकी शर्तों और मांगी गई स्पेसिफिकेशन से यह स्पष्ट है कि यह उपकरण एम्स बिलासपुर के मल्टी-स्पेशियलिटी मेजर ऑपरेशन थिएटर के लिए प्रस्तावित है, न कि किसी छोटे या डे-केयर ओटी के लिए।

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रेडियो फ्रीक्वेंसी जनरेटर में प्रिसाइज, स्टैंडर्ड और मैक्रो जैसे मल्टी-मोड विकल्प उपलब्ध होंगे। सर्जन सर्जरी की आवश्यकता और ऊतकों की मोटाई के अनुसार ऊर्जा स्तर का चयन कर सकेंगे। मशीन को ईएसयू पेंसिल और फुट स्विच के माध्यम से नियंत्रित किया जाएगा, जिससे सर्जन बिना मशीन को हाथ लगाए, पूरी एकाग्रता के साथ सटीक सर्जरी कर सकेंगे। लंबे और जटिल ऑपरेशनों के दौरान यह सुविधा डॉक्टरों के लिए अधिक सुरक्षित और सहज मानी जाती है।

नई मशीन के साथ एम्स बिलासपुर का ऑपरेशन थिएटर कई आधुनिक सहायक उपकरणों से भी लैस किया जाएगा। इनमें 37 सेंटीमीटर लंबे कवर्ड और स्ट्रेट वेसल सीलर, नॉन-स्टिक तकनीक से बने जॉ, विभिन्न प्रकार के नीडल इलेक्ट्रोड और बॉल इलेक्ट्रोड शामिल होंगे। ये उपकरण गहराई में की जाने वाली सर्जरी और लैप्रोस्कोपिक ऑपरेशनों को आसान बनाएंगे। नॉन-स्टिक तकनीक के कारण उपकरण ऊतकों से नहीं चिपकेंगे, जिससे घाव जल्दी भरेंगे और मरीज को कम दर्द का सामना करना पड़ेगा।

मरीजों की सुरक्षा सर्वोपरि
रेडियो फ्रीक्वेंसी जनरेटर में लीकेज करंट को बेहद न्यूनतम स्तर पर नियंत्रित करने की सुविधा होगी। इसके साथ ही इसमें इम्पीडेंस सेंस तकनीक भी मौजूद होगी, जो शरीर के ऊतकों के प्रतिरोध को पहचानकर स्वतः पावर को संतुलित कर लेती है। इससे मरीज को बिजली के झटके या अनावश्यक ऊतक क्षति का खतरा नहीं रहेगा, जिससे सर्जरी और अधिक सुरक्षित बन सकेगी।
 
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