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उफनती यमुना से हथिनीकुंड बैराज को नुकसान, सुरक्षा के लिए बनाई गई स्पोर्टिंग वाल और सीमेंट के स्टड क्षतिग्रस्त

Thu, 22 Aug 2019 11:51 PM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Thu, 22 Aug 2019 11:51 PM IST
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ymuna hthinikund stud
इस साल यमुना में आए रिकॉर्डतोड़ पानी ने न केवल आसपास रहने वाले लोगों की चिंता बढ़ाई बल्कि हथिनीकुंड बैराज को भी नुकसान पहुंचाया है। पानी उतरने के बाद बैराज की सुरक्षा के लिए बनाई गई स्पोर्टिंग वाल और सीमेंट के स्टड क्षतिग्रस्त पाए गए हैं। जिसे देखकर सिंचाई विभाग के अधिकारियों के हाथ पांव फूल गए हैं। बैराज को नुकसान अवैध खनन और पानी की अधिकता को बताया जा रहा है। हथिनीकुंड बैराज की क्षमता 9 लाख 95 हजार क्यूसेक है और इस बार बैराज ने लगातार 36 घंटे तक तीन से सवा आठ लाख क्यूसेक पानी का दबाव सहन किया है। ऐसे में अगर पानी थोड़ा और ज्यादा बढ़ जाता तो बैराज के लिए खतरा साबित हो सकता था। सिंचाई विभाग के अधिकारियों ने पानी उतरने के बाद बैराज में और ज्यादा नुकसान होने का अंदेशा भी जताया है।
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अवैध खनन बड़ी वजह
बैराज के आसपास तीन किमी के एरिया में माइनिंग पर बैन है, इसके बावजूद ताजेवाला में बड़े पैमाने पर अवैध खनन किया गया। खनन माफिया ने माइनिंग करके बैराज को कमजोर कर दिया। सेंट्रल वॉटर कमीशन की तरफ से भी इसके दो किलोमीटर के एरिया पर खनन पर बैन है। अधिकारियों का कहना है कि अवैध खनन हथिनीकुंड बैराज को नुकसान पहुंचाने में बड़ी वजह है।
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पांच महीने पहले अमर उजाला ने चेताया था
बैराज के आसपास चल रहे अवैध खनन को लेकर अमर उजाला ने लगातार रिपोर्ट प्रकाशित की थी। अप्रैल में अमर उजाला ने खुलासा किया था कि माइनिंग माफिया द्वारा किए जा रहे अवैध खनन की वजह से हथिनीकुंड बैराज को खतरा हो गया है और बरसात के सीजन में इसमें नुकसान हो सकता है। इसके बाद सिंचाई विभाग की रिपोर्ट में भी अधिकारियों ने इस बात का खुलासा किया था कि बैराज को नुकसान पहुंच सकता है। इस संबंध में माइनिंग माफिया के खिलाफ प्रतापनगर थाने में कंप्लेंट भी की गई थी।
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20 साल पुराना है हथिनीकुंड
ताजेवाला हेड 1873 में अंग्रेजों ने बनाया था। इसके 126 साल पूरे करने के बाद 3 सितंबर 1978 में यमुना में ज्यादा पानी आ गया था और पानी की रफ्तार सहन ना करते हुए यह क्षतिग्रस्त हो गया था। जिसके बाद सिंचाई विभाग ने इसे कंडम घोषित कर दिया और 1996 में हथिनीकुंड बैराज बनाना शुरू किया, जो 1999 में बनकर तैयार हुआ था। जिसके बाद ताजेवाला हेड की उपयोगिता लगभग खत्म हो गई थी। साल 2013 में भी ज्यादा पानी आया था तो ताजेवाला हेड का अधिकतर हिस्सा बह गया था।

बैराज के कुछ हिस्से को नुकसान हुआ है। बैराज के इर्द-गिर्द सीसी ब्लॉक भी क्षतिग्रस्त हुए हैं। पानी की अधिकता के अलावा अवैध खनन भी बड़ी वजह मानी जा सकती है। पानी कम होने के बाद ही नुकसान का पूरा आकलन किया जा सकेगा।
-हरिदेव कांबोज, कार्यकारी अभियंता, सिंचाई विभाग
बैराज पर पानी कम होने के बाद ही नुकसान का पता चल सकेगा। उसके बाद मरम्मत करवाई जाएगी।
मुकुल कुमार, डीसी, यमुनानगर
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