{"_id":"e190f0461e2dfa5d76be36a867cbaab7","slug":"ymn-hindi-news-2","type":"story","status":"publish","title_hn":"शहरी कॉलोनियों में भी डायरिया का खतरा ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
शहरी कॉलोनियों में भी डायरिया का खतरा
अमर उजाला ब्यूरो, यमुनानगर
Updated Tue, 04 Aug 2015 12:10 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
कोट माजरी और मुसिंबल में बीस दिन में डायरिया फैल गया। दोनों जगहों पर करीब दो सौ लोग डायरिया की चपेट में आ गए। इसके बाद प्रशासन हरकत में आया। दोनों मामलों में नालियों से गुजर रहे पानी के पाइप व उसकी लीकेज बीमारी फैलने का कारण बनी।
ठीक ऐसे ही हालात ग्रामीण क्षेत्रों समेत शहरी कॉलोनियों में बने हुए हैं, जो कभी भी डायरिया को दस्तक दे सकते हैं। क्योंकि कई दशक से पेयजल पाइप लाइन को नहीं बदल गया है। जर्जर व जंग लगे पानी के पाइप गंदगी से अटी नालियों से गुजर रहे हैं, इनमें बार-बार लीकेज की समस्या रहती है।
ऐसे में घरों में दूषित पानी सप्लाई होने पर लोग उसे पीकर बीमार पड़ सकते हैं। जन स्वास्थ्य एवं जलापूर्ति अभियांत्रिकी विभाग शायद रोग फैलने के इंतजार में है। तभी दो गांवों के डायरिया की चपेट में आने के बाद भी अन्य ग्रामीण क्षेत्रों व शहरी कॉलोनियों के हालात की सुध नहीं ली जा रही है।
विज्ञापन
अमर उजाला ने सोमवार को यमुनानगर शहर की करीब एक दर्जन कॉलोनियों का जायजा लिया। इनमें सैकड़ों घरों के पेयजल कनेक्शन गंदगी से अटी नालियों के बीच मिले। सड़क/गलियों के बीच से गुजर रहे पाइप से घरों में जा रहे कनेक्शनों के ज्वाइंट नालियों के बीच हैं। काफी पुराने कनेक्शन होने के कारण पाइप व उनके ज्वाइंट पर जंग लग चुका है।
इससे अगर लीकेज होती है तो घरों में गंदे पानी की सप्लाई होगी जिससे बीमारी फैल सकती है। संबंधित विभाग के अधिकारी भी इस बात को स्वीकार कर पुरानी पाइप बदलने और पेयजल कनेक्शनों को नालियों से दूर करने को कार्रवाई की बात कर रहे हैं।
कॉलोनियों के यह हालात
आजाद नगर, मुंडामाजरा, चिट्टा मंदिर रोड, खड्ढा कॉलोनी, शांति कॉलोनी, महावीर कॉलोनी, मॉडल कॉलोनी, संतनगर व छोटी लाइन, विश्वकर्मा मोहल्ला, पुराना हमीदा समेत कैंप की कई कॉलोनियों में सैकड़ों घरों के पेयजल कनेक्शन नालियों के बीच हैं। इनमें से कई कॉलोनियों में पाइप करीब दो दशक पहले डाले गए थे जिन्हें आज तक नहीं बदला गया। इस कारण पाइप जर्जर हो चुके हैं और उनमें बार-बार लीकेज होने की शिकायत रहती है। नालियों के बीच लोगों के पेयजल कनेक्शन के पाइपों व ज्वाइंट पर जंग लग चुका है। इससे भी लीकेज होने पर घरों में सप्लाई में दूषित पानी आने का खतरा रहता है, जिसे पीकर लोग बीमार पड़ते हैं। इसका एक उदाहरण जून में संतनगर में देखने को मिला, जहां करीब डेढ़ माह तक गंदे पानी की सप्लाई से दर्जनों लोग बीमार पड़ गए। जबकि अब 20 दिन में कोट माजरी व मुसिंबल में डायरिया के पांव पसारने का भी यही कारण रहा और करीब 200 लोग बीमारी की चपेट में आ गए।
हालात बिगड़ने पर ही जागता है विभाग
संत नगर के अशोक कुमार, चिट्टा मंदिर रोड निवासी विनोद शर्मा, मॉडल कॉलोनी के भारत, पुराना हमीदा के बलवंत, महावीर कॉलोनी के उदय ने कहा कि सबकुछ जगजाहिर होने के बाद भी विभाग कार्रवाई नहीं कर रहा है। डायरिया जैसे रोग से बचाव के लिए लोगों तक स्वच्छ पेयजल पहुंचना जरूरी है, किंतु विभाग हालात बिगड़ने पर ही कार्रवाई करता नजर आता है। जन स्वास्थ्य एवं जलापूर्ति विभाग को चाहिए कि समय रहते कार्रवाई करे और पुराने पाइप बदलने के साथ पेयजल कनेक्शनों को गंदी नालियों से दूर किया जाए।
पुराने पाइप बदलने के लिए प्रपोजल भेजा हुआ है। मंजूर होते ही पीने के पानी के पुराने पाइप बदल दिए जाएंगे। नालियों से पेयजल कनेक्शनों को दूर करने का अभियान जारी है, जिसमें लोगों की काउंसिलिंग कर कार्रवाई की जा रही है वहीं, नए कनेक्शन भी नालियों से दूर ही दिए जा रहे हैं।
सुमित गर्ग, एसडीओ, जनस्वास्थ्य एवं जलापूर्ति अभियांत्रिकी विभाग।
विज्ञापन
ठीक ऐसे ही हालात ग्रामीण क्षेत्रों समेत शहरी कॉलोनियों में बने हुए हैं, जो कभी भी डायरिया को दस्तक दे सकते हैं। क्योंकि कई दशक से पेयजल पाइप लाइन को नहीं बदल गया है। जर्जर व जंग लगे पानी के पाइप गंदगी से अटी नालियों से गुजर रहे हैं, इनमें बार-बार लीकेज की समस्या रहती है।
विज्ञापन
ऐसे में घरों में दूषित पानी सप्लाई होने पर लोग उसे पीकर बीमार पड़ सकते हैं। जन स्वास्थ्य एवं जलापूर्ति अभियांत्रिकी विभाग शायद रोग फैलने के इंतजार में है। तभी दो गांवों के डायरिया की चपेट में आने के बाद भी अन्य ग्रामीण क्षेत्रों व शहरी कॉलोनियों के हालात की सुध नहीं ली जा रही है।
विज्ञापन
अमर उजाला ने सोमवार को यमुनानगर शहर की करीब एक दर्जन कॉलोनियों का जायजा लिया। इनमें सैकड़ों घरों के पेयजल कनेक्शन गंदगी से अटी नालियों के बीच मिले। सड़क/गलियों के बीच से गुजर रहे पाइप से घरों में जा रहे कनेक्शनों के ज्वाइंट नालियों के बीच हैं। काफी पुराने कनेक्शन होने के कारण पाइप व उनके ज्वाइंट पर जंग लग चुका है।
इससे अगर लीकेज होती है तो घरों में गंदे पानी की सप्लाई होगी जिससे बीमारी फैल सकती है। संबंधित विभाग के अधिकारी भी इस बात को स्वीकार कर पुरानी पाइप बदलने और पेयजल कनेक्शनों को नालियों से दूर करने को कार्रवाई की बात कर रहे हैं।
कॉलोनियों के यह हालात
आजाद नगर, मुंडामाजरा, चिट्टा मंदिर रोड, खड्ढा कॉलोनी, शांति कॉलोनी, महावीर कॉलोनी, मॉडल कॉलोनी, संतनगर व छोटी लाइन, विश्वकर्मा मोहल्ला, पुराना हमीदा समेत कैंप की कई कॉलोनियों में सैकड़ों घरों के पेयजल कनेक्शन नालियों के बीच हैं। इनमें से कई कॉलोनियों में पाइप करीब दो दशक पहले डाले गए थे जिन्हें आज तक नहीं बदला गया। इस कारण पाइप जर्जर हो चुके हैं और उनमें बार-बार लीकेज होने की शिकायत रहती है। नालियों के बीच लोगों के पेयजल कनेक्शन के पाइपों व ज्वाइंट पर जंग लग चुका है। इससे भी लीकेज होने पर घरों में सप्लाई में दूषित पानी आने का खतरा रहता है, जिसे पीकर लोग बीमार पड़ते हैं। इसका एक उदाहरण जून में संतनगर में देखने को मिला, जहां करीब डेढ़ माह तक गंदे पानी की सप्लाई से दर्जनों लोग बीमार पड़ गए। जबकि अब 20 दिन में कोट माजरी व मुसिंबल में डायरिया के पांव पसारने का भी यही कारण रहा और करीब 200 लोग बीमारी की चपेट में आ गए।
हालात बिगड़ने पर ही जागता है विभाग
संत नगर के अशोक कुमार, चिट्टा मंदिर रोड निवासी विनोद शर्मा, मॉडल कॉलोनी के भारत, पुराना हमीदा के बलवंत, महावीर कॉलोनी के उदय ने कहा कि सबकुछ जगजाहिर होने के बाद भी विभाग कार्रवाई नहीं कर रहा है। डायरिया जैसे रोग से बचाव के लिए लोगों तक स्वच्छ पेयजल पहुंचना जरूरी है, किंतु विभाग हालात बिगड़ने पर ही कार्रवाई करता नजर आता है। जन स्वास्थ्य एवं जलापूर्ति विभाग को चाहिए कि समय रहते कार्रवाई करे और पुराने पाइप बदलने के साथ पेयजल कनेक्शनों को गंदी नालियों से दूर किया जाए।
पुराने पाइप बदलने के लिए प्रपोजल भेजा हुआ है। मंजूर होते ही पीने के पानी के पुराने पाइप बदल दिए जाएंगे। नालियों से पेयजल कनेक्शनों को दूर करने का अभियान जारी है, जिसमें लोगों की काउंसिलिंग कर कार्रवाई की जा रही है वहीं, नए कनेक्शन भी नालियों से दूर ही दिए जा रहे हैं।
सुमित गर्ग, एसडीओ, जनस्वास्थ्य एवं जलापूर्ति अभियांत्रिकी विभाग।