फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Haryana ›   Yamuna's water level reduced due to snowfall, hydroelectric projects affected

बर्फबारी से घटा यमुना का जलस्तर: पनबिजली परियोजनाएं प्रभावित, हरियाणा और दिल्ली में गहरा सकता है पानी संकट

Fri, 01 Mar 2024 01:27 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो नवाब खान, प्रतापनगर (हरियाणा)
नवाब खान, प्रतापनगर (हरियाणा) Updated Fri, 01 Mar 2024 01:27 PM IST
सार

पहाड़ों पर बर्फबारी होने से बर्फ का पिघलना रुक गया है, जिसके कारण हथिनीकुंड पर पानी की मात्रा कम हो गई है। पश्चिमी, दक्षिण हरियाणा सहित दिल्ली में भी पानी संकट गहरा जाएगा। पानी की मांग पूरी करने के लिए बैराज की ओर से पनबिजली परियोजनाओं की आपूर्ति में कटौती की गई है।

विज्ञापन
Yamuna's water level reduced due to snowfall, hydroelectric projects affected
हथिनीकुंड बैराज - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

पहाड़ों पर बर्फबारी होने से हथिनीकुंड बैराज का जलस्तर कम होने लगा है। चूंकि पहाड़ों पर बर्फ का पिघलना रुक गया है, इससे पानी की कमी हो गई है। हालांकि दो दिन से दोपहर में धूप निकलने से स्थिति में मामूली सुधार हुआ है, लेकिन दिन ढलने के बाद वहीं स्थिति बन रही है। इसके हथिनीकुंड पर पानी की मात्रा आवश्यकता से काफी कम हो गई है। मौसम विशेषज्ञों के अनुसार अभी मौसम में परिवर्तन हो सकता है, बर्फबारी व तापमान में गिरावट की संभावना है। यदि ऐसी स्थिति बनती है तो प्रदेश के पश्चिमी, दक्षिण हरियाणा सहित दिल्ली में भी पानी संकट गहरा जाएगा।

विज्ञापन


पानी की मांग पूरी करने के लिए बैराज की ओर से पनबिजली परियोजनाओं की आपूर्ति में कटौती की गई है। वहीं वीरवार शाम तक उत्तरप्रदेश के लिए पानी नहीं दिया गया। आवश्यकता अनुसार पानी न मिल पाने के कारण पनबिजली परियोजना भी प्रभावित हो रही है। वीरवार दोपहर एक बजे हथिनीकुंड बैराज पर सर्वाधिक 4803 क्यूसेक दर्ज किया गया। जिसमें से यमुना में 352 क्यूसेक और 4451 क्यूसेक पानी पश्चिमी यमुना नहर में छोड़ा गया।
विज्ञापन


पनबिजली परियोजनाओं की आधी इकाइयां चलाने के लिए 2700 क्यूसेक पानी की आवश्यकता पड़ती है। यदि यही स्थिति बनी रही तो पनबिजली योजनाओं की इकाइयां बंद करनी पड़ सकती हैं। हथिनीकुंड बैराज पर शाम पांच बजे 2544 क्यूसेक पानी दर्ज किया गया। जिसमें से 352 क्यूसेक पानी यमुना में और 2192 पश्चिमी नहर में छोड़ा गया।
विज्ञापन
विज्ञापन


परियोजना में तैयार होती है तीन लाख यूनिट बिजली
बता दें कि हथिनीकुंड बैराज की 995900 क्यूसेक पानी की क्षमता है। जबकि नहर की क्षमता 25 हजार क्यूसेक है। फिलहाल डब्ल्यूजेसी की मांग 4500 क्यूसेक है। वहीं ईजेसी से उत्तर प्रदेश को पानी दिया जाता है। ईजेसी की क्षमता 7545 क्यूसेक है। विभाग के अनुसार बैराज पर डिमांड से आधा पानी है। इसके अलावा ताजेवाला स्थित पन बिजली परियोजना के लिए प्रतिदिन 5400 क्यूसेक पानी की जरूरत है, परंतु अभी इतना पानी बैराज पर भी नहीं है।

इस दौरान दोपहर मेंं जलस्तर में वृद्धि हुई, लेकिन शाम को फिर वहीं स्थिति बन गई। दोपहर 11 बजे 4627 क्यूसेक, 12 बजे 4667 क्यूसेक, एक बजे 4803 क्यूसेक, दो बजे 3331 क्यूसेक, तीन बजे 3105 क्यूसेक, चार बजे 2539 क्यूसेक पानी दर्ज किया गया। बता दें कि ताजेवाला स्थित पन बिजली परियोजनाओं से हर महीने करीब तीन लाख यूनिट बिजली का उत्पादन किया जाता है। करीब एक महीने से पानी में उतार चढ़ाव चल रहा है और ऐसे में पानी की मात्रा के अनुसार एक एक इकाई का संचालन किया जा रहा है।


अधिकारी के अनुसार
पहाड़ों पर जमी बर्फ का पिघलना रुक गया है। इससे मैदानी इलाकों में बिजली पानी का संकट गहराने लगा है। यमुना नदी का पानी लगातार कम हो रहा है, हालांकि बुधवार को वृद्धि हुई थी, लेकिन शाम व सुबह जलस्तर कम रहा। दिन में पानी जरूरत से भी आधा रहता है। इससे पन बिजली परियोजना की पानी सप्लाई में कमी की गई है। इन इकाइयों को जरूरत से आधा पानी भी नहीं दिया रहा है। यदि स्थिति ऐसी ही रही तो आने वाले दिनों में बिजली का संकट गहरा सकता है। -विजय गर्ग, एक्सईएन, सिंचाई विभाग।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed