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Yamuna Nagar News: धरोहरों से समृद्ध यमुनानगर, उपेक्षा से जूझती विरासत

Sat, 18 Apr 2026 12:11 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर Updated Sat, 18 Apr 2026 12:11 AM IST
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Yamunanagar: Rich in Heritage, a Legacy Grappling with Neglect
चनेटी स्थित बौद्ध् स्तूप। संवाद - फोटो : मेडल व प्रमाण पत्र के साथ ​खिलाड़ी व मुख्य अति​थि।
संवाद न्यूज एजेंसी
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यमुनानगर। जिला प्राचीन और ऐतिहासिक धरोहरों का एक महत्वपूर्ण केंद्र है, जहां महाभारत काल से लेकर बौद्ध धर्म तक से जुड़े अनेक स्थल मौजूद हैं। ये स्थान न केवल धार्मिक आस्था के केंद्र हैं, बल्कि ऐतिहासिक दृष्टि से भी बेहद समृद्ध हैं। विश्व धरोहर दिवस के अवसर पर इन धरोहरों की महत्ता और उनकी वर्तमान स्थिति पर नजर डालना जरूरी हो जाता है।
जिले में स्थित सरस्वती उद्गम स्थल आदिबद्री, सुघ का टीला, चनेटी का बौद्ध स्तूप और टोपरा कलां में स्थित अशोक स्तंभ जैसे स्थल अपनी विशिष्ट पहचान रखते हैं। आदिबद्री को सरस्वती नदी का उद्गम स्थल माना जाता है, जहां रोजाना सैकड़ों श्रद्धालु पवित्र जल से आचमन करने पहुंचते हैं। यहीं 1800 फीट की ऊंचाई पर स्थित माता मंत्रा देवी का मंदिर भी लोगों की आस्था का प्रमुख केंद्र है।
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इसके अलावा श्री आदिबद्री नारायण मंदिर में रखा शंख महाभारत कालीन बताया जाता है, जिसके बारे में मान्यता है कि उसी के नाद से युद्ध का आरंभ और समापन होता था। इतिहास के पन्नों में झांकें तो सुघ का टीला और चनेटी का बौद्ध स्तूप बौद्ध काल की झलक प्रस्तुत करते हैं। वहीं टोपरा कलां का अशोक स्तंभ मौर्यकालीन इतिहास का साक्षी है, जो सम्राट अशोक की विरासत को दर्शाता है।
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इसके अलावा बूड़िया रियासत और छछरौली की कलसिया रियासत भी जिले की ऐतिहासिक पहचान का अहम हिस्सा रही हैं। छछरौली में आज भी रियासतकालीन गेट मौजूद है और प्राचीन किले के कमरों में राजकीय स्कूल संचालित हो रहा है, जहां सैकड़ों बच्चे शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं।
कपालमोचन भी धार्मिक और ऐतिहासिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण स्थल है। यहां सिखों के प्रथम गुरु गुरु नानक देव जी और दशम गुरु गुरु गोबिंद सिंह के अलावा भगवान श्रीकृष्ण, पांडव, भगवान शिव और गुरु रविदास जी के चरण पड़ने की मान्यता है। इस कारण यह स्थल विभिन्न धर्मों और आस्थाओं का संगम माना जाता है।
इतनी समृद्ध विरासत होने के बावजूद जिले की अधिकांश धरोहरें उपेक्षा का शिकार हैं। उचित देखरेख और संरक्षण के अभाव में कई स्थल जर्जर हो रहे हैं या अपनी पहचान खोने की कगार पर पहुंच गए हैं।

गुरु नानक खालसा कॉलेज के पूर्व प्राचार्य डॉ. एचएस कंग का कहना है कि यदि समय रहते इन धरोहरों के संरक्षण के लिए ठोस कदम नहीं उठाए गए तो आने वाली पीढ़ियां इस ऐतिहासिक विरासत से वंचित रह जाएंगी। सरकार और प्रशासन इन स्थलों के संरक्षण और विकास के लिए गंभीर प्रयास करें, ताकि यमुनानगर की यह अमूल्य धरोहर सुरक्षित रह सके और पर्यटन के रूप में भी जिले को नई पहचान मिल सके।

चनेटी स्थित बौद्ध् स्तूप। संवाद

चनेटी स्थित बौद्ध् स्तूप। संवाद- फोटो : मेडल व प्रमाण पत्र के साथ खिलाड़ी व मुख्य अतिथि।

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