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25 घंटे बाद रेलमार्ग बहाल, यात्रियों ने राहत की सांस
yamunanagar beuro
Updated Sat, 22 Apr 2017 12:29 AM IST
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- फोटो : yamunanagar
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बराड़ा के तंदवाल में गुरुवार दोपहर में पुल टूटने से मारकंडा नदी में मालगाड़ी के 15 डिब्बों के गिरने से बंद पड़ा अंबाला-सहारनपुर रेलमार्ग शुक्रवार दोपहर करीब तीन बजे बहाल हो गया। यमुनानगर-जगाधरी रेलवे स्टेशन पर पहली पैसेंजर ट्रेन 54540 (अंबाला छावनी-हजरत निजामुदीन) आई, जो स्टेशन पर करीब 4:50 बजे पर पहुंची। शाम सात बजे से छोटे रूट की ट्रेनें सामान्य दिनों की तरह निर्धारित समय पर चलने लगीं। करीब 25 घंटे बाद रेलमार्ग खुलने से अप व डाउन ट्रैक की ट्रेनों के आवागमन से यात्रियों ने राहत महसूस की। जबकि लांग रूट की दर्जनों गाड़ियां देर शाम के बाद भी निर्धारित समय से घंटों लेट चलीं, जिनके इंतजार में यात्रियों के गर्मी में पसीने छूटते नजर आए।
गुरुवार जगाधरी से होकर अंबाला की ओर जा रही कोयले से भरी मालगाड़ी के करीब 15 डिब्बे बराड़ा के तंदवाल में पुल टूटने से मारकंडा नदी में जा गिरे थे। दोपहर करीब दो बजे हुए हादसे के बाद सहारनपुर-अंबाला रेल मार्ग पूरी तरह बंद हो गया। इससे गुरुवार रातभर तक यमुनानगर-जगाधरी रेलवे स्टेशन समेत साथ लगते छोटे स्टेशनों पर सहारनपुर व अंबाला से कोई भी ट्रेन नहीं आ पाई। यही स्थिति शुक्रवार सुबह से दोपहर ढाई बजे तक ट्रैक के क्लीयर न होने से बनी रही। दिनभर यात्री स्टेशनों पर ट्रेनों के चलने बारे पूछताछ करते दिखे। उन्हें ट्रेनों के आवागमन न होने पर उल्टे पांव लौटना पड़ा और अधिकांश ने गंतव्य तक पहुंचने के लिए बस व अन्य साधन का सहारा लिया। इनमें सबसे अधिक परेशानी दैनिक रेल यात्रियों को हुई, जो नौकरी, पढ़ाई व अन्य कामकाज के लिए रोजाना रेल से सफर कर आते-जाते हैं।
दूसरे दिन भी यात्रियों की सहारनपुर व अंबाला तक लगी दौड़
गुरुवार की तरह शुक्रवार सुबह से दोपहर के बीच यमुनानगर-जगाधरी रेलवे स्टेशन सहित अंबाला-सहारनपुर रेलमार्ग पर लगते अन्य स्टेशनों पर आने वाली ट्रेनों में पहले से रिजर्वेशन करवा चुके यात्रियों को अपनी गाडिय़ों को पकड़ने के लिए अंबाला व सहारनपुर तक की दौड़ लगानी पड़ी। बता दें यमुनानगर-जगाधरी स्टेशन से अंबाला की दूरी करीब 65 किलोमीटर है, जबकि सहारनपुर 35 किलोमीटर दूर है। ऐसे में यात्रियों को सड़क मार्ग से बसों व अन्य साधनों का सहारा लेना पड़ा और उनके अधिक धन व समय की बर्बादी हुई।
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ट्रैक क्लीयर होने के बाद भी कम न हुई परेशानी
शुक्रवार दोपहर करीब तीन बजे ट्रैक क्लीयर हो गया और यमुनानगर-जगाधरी रेलवे स्टेशन पर पहली पैसेंजर ट्रेन 54540 (अंबाला छावनी-हजरत निजामुदीन) आई, जो स्टेशन पर करीब 4:50 बजे पर पहुंची। इसके बाद शाम सात बजे से छोटे रूट की ट्रेनें सामान्य दिनों की तरह निर्धारित समय पर चलने लगीं। करीब 25 घंटे बाद रेलमार्ग खुलने से अप-डाउन ट्रैक की ट्रेनों के आवागमन से यात्रियों ने राहत महसूस की। किंतु लांग रूट की दर्जनों गाडिय़ां देर शाम के बाद भी निधार्रित समय से घंटों लेट चलीं। दोपहर 12 बजे आने वाली अमृसर से सहरसा जनसेवा एक्सप्रेस सात घंटे की देरी से देर शाम 7:30 बजे स्टेशन पर पहुंची। इसी तरह 12511 दरभंगा-अमृतसर एक्सप्रेस छह घंटे देरी से स्टेशन पर पहुंची। इनके इंतजार में यात्रियों के गर्मी में पसीने छूटते नजर आए। जबकि रेलवे की ओर से 15012 चंडीगढ़-लखनऊ एक्सप्रेस को सहारनपुर तक और 14711 हरिद्वार-गंगानगर गंगानगर एक्सप्रेस को हरिद्वार से अंबाला के बीच रद किया गया। इसके अलावा दर्जनों ट्रेनों अपने निर्धारित समय से दो से सात घंटों देरी से चलीं। इससे यात्रियों को गर्मी में खासी दिक्कतों से दो-चार होना पड़ा।
जान जोखिम में डाल रांग साइड से चढ़ते दिखे लोग
25 घंटे बद रहे अंबाला-सहारनपुर रेलमार्ग पर दोपहर बाद ट्रेनों के सुचारू आवागमन होने पर यमुनानगर-जगाधरी रेलवे स्टेशन पर अचानक यात्रियों की भीड़ बढ़ गई। ऐसा ट्रेनों के देरी से चलने के कारण सुबह व दोपहर में ट्रेनों से सफर करने वाले यात्रियों के शाम के वक्त तक जुटे रहने से हुआ। यात्रियों की बढ़ी संख्या में ट्रेनों में भीड़ बढ़ गई और उनमें चढ़ने के लिए दिक्कतों से दो-चार होना पड़ा। कई लोग ट्रेनों में रांग साइड से जान जोखिम में डालकर चढ़ते नजर आए।
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गुरुवार जगाधरी से होकर अंबाला की ओर जा रही कोयले से भरी मालगाड़ी के करीब 15 डिब्बे बराड़ा के तंदवाल में पुल टूटने से मारकंडा नदी में जा गिरे थे। दोपहर करीब दो बजे हुए हादसे के बाद सहारनपुर-अंबाला रेल मार्ग पूरी तरह बंद हो गया। इससे गुरुवार रातभर तक यमुनानगर-जगाधरी रेलवे स्टेशन समेत साथ लगते छोटे स्टेशनों पर सहारनपुर व अंबाला से कोई भी ट्रेन नहीं आ पाई। यही स्थिति शुक्रवार सुबह से दोपहर ढाई बजे तक ट्रैक के क्लीयर न होने से बनी रही। दिनभर यात्री स्टेशनों पर ट्रेनों के चलने बारे पूछताछ करते दिखे। उन्हें ट्रेनों के आवागमन न होने पर उल्टे पांव लौटना पड़ा और अधिकांश ने गंतव्य तक पहुंचने के लिए बस व अन्य साधन का सहारा लिया। इनमें सबसे अधिक परेशानी दैनिक रेल यात्रियों को हुई, जो नौकरी, पढ़ाई व अन्य कामकाज के लिए रोजाना रेल से सफर कर आते-जाते हैं।
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दूसरे दिन भी यात्रियों की सहारनपुर व अंबाला तक लगी दौड़
गुरुवार की तरह शुक्रवार सुबह से दोपहर के बीच यमुनानगर-जगाधरी रेलवे स्टेशन सहित अंबाला-सहारनपुर रेलमार्ग पर लगते अन्य स्टेशनों पर आने वाली ट्रेनों में पहले से रिजर्वेशन करवा चुके यात्रियों को अपनी गाडिय़ों को पकड़ने के लिए अंबाला व सहारनपुर तक की दौड़ लगानी पड़ी। बता दें यमुनानगर-जगाधरी स्टेशन से अंबाला की दूरी करीब 65 किलोमीटर है, जबकि सहारनपुर 35 किलोमीटर दूर है। ऐसे में यात्रियों को सड़क मार्ग से बसों व अन्य साधनों का सहारा लेना पड़ा और उनके अधिक धन व समय की बर्बादी हुई।
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ट्रैक क्लीयर होने के बाद भी कम न हुई परेशानी
शुक्रवार दोपहर करीब तीन बजे ट्रैक क्लीयर हो गया और यमुनानगर-जगाधरी रेलवे स्टेशन पर पहली पैसेंजर ट्रेन 54540 (अंबाला छावनी-हजरत निजामुदीन) आई, जो स्टेशन पर करीब 4:50 बजे पर पहुंची। इसके बाद शाम सात बजे से छोटे रूट की ट्रेनें सामान्य दिनों की तरह निर्धारित समय पर चलने लगीं। करीब 25 घंटे बाद रेलमार्ग खुलने से अप-डाउन ट्रैक की ट्रेनों के आवागमन से यात्रियों ने राहत महसूस की। किंतु लांग रूट की दर्जनों गाडिय़ां देर शाम के बाद भी निधार्रित समय से घंटों लेट चलीं। दोपहर 12 बजे आने वाली अमृसर से सहरसा जनसेवा एक्सप्रेस सात घंटे की देरी से देर शाम 7:30 बजे स्टेशन पर पहुंची। इसी तरह 12511 दरभंगा-अमृतसर एक्सप्रेस छह घंटे देरी से स्टेशन पर पहुंची। इनके इंतजार में यात्रियों के गर्मी में पसीने छूटते नजर आए। जबकि रेलवे की ओर से 15012 चंडीगढ़-लखनऊ एक्सप्रेस को सहारनपुर तक और 14711 हरिद्वार-गंगानगर गंगानगर एक्सप्रेस को हरिद्वार से अंबाला के बीच रद किया गया। इसके अलावा दर्जनों ट्रेनों अपने निर्धारित समय से दो से सात घंटों देरी से चलीं। इससे यात्रियों को गर्मी में खासी दिक्कतों से दो-चार होना पड़ा।
जान जोखिम में डाल रांग साइड से चढ़ते दिखे लोग
25 घंटे बद रहे अंबाला-सहारनपुर रेलमार्ग पर दोपहर बाद ट्रेनों के सुचारू आवागमन होने पर यमुनानगर-जगाधरी रेलवे स्टेशन पर अचानक यात्रियों की भीड़ बढ़ गई। ऐसा ट्रेनों के देरी से चलने के कारण सुबह व दोपहर में ट्रेनों से सफर करने वाले यात्रियों के शाम के वक्त तक जुटे रहने से हुआ। यात्रियों की बढ़ी संख्या में ट्रेनों में भीड़ बढ़ गई और उनमें चढ़ने के लिए दिक्कतों से दो-चार होना पड़ा। कई लोग ट्रेनों में रांग साइड से जान जोखिम में डालकर चढ़ते नजर आए।