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पेयजल के लिए तरस रहे जनक माजरा गांव के लोगों के सब्र का बांध टूटा, खाली मटका लेकर पहुंचे सचिवविलय
yamunanagar beuro
Updated Tue, 30 May 2017 12:19 AM IST
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- फोटो : yamunanagar
एक साल से ट्यूबवेल खराब होने के चलते पेयजल को तरस रहे जनक माजरा गांव के लोगों को सब्र का बांध सोमवार को टूट पड़ा। पेयजल न मिलने पर भड़के ग्रामीण सोमवार को खाली मटके (घड़े) लेकर लघु सचिवालय पहुंचे। सिर पर मटके रखकर महिलाओं ने जगाधरी अनाजमंडी गेट से लघु सचिवालय तक रोष मार्च निकाला। महिलाओं ने सिर पर रखे मटकों को लघु सचिवालय के गेट के समक्ष नेशनल हाईवे 73 पर फेंककर फोड़ा और सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। लघु सचिवालय में प्रदर्शन करने के बाद महिलाओं ने लघु सचिवालय प्रांगण में कुछ देर धरना भी दिया। धरना दे रही महिलाओं का ज्ञापन लेने के लिए डीसी रोहताश सिंह खरब खुद कार्यालय से बाहर आए और महिलाओं की शिकायत सुन जल्द समाधान करने का आश्वासन किया।
भंभौली पंचायत के तहत आने वाले गांव जनक का माजरा की सैकड़ों लोग व महिलाएं सोमवार सुबह सिर पर मटके लेकर जगाधरी अनाजमंडी में कांग्रेसी नेता बृजपाल छप्पर व पिंकी छप्पर के नेतृत्व में एकत्रित हुए। सिर पर मटके उठाकर व हाथों में हमें पीने का पानी चाहिए का बैनर लेकर ग्रामीणों ने यहां सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किया। सरकार विरोधी नारेबाजी करते हुए सभी ग्रामीण अनाजमंडी से होते हुए अनाजमंडी गेट से होकर नेशनल हाईवे पर पहुंचे। नेशनल हाईवे से नारेबाजी करते हुए लघु सचिवालय के गेट पर आकर ग्रामीणों ने सिर पर रखे मटकों को सड़क पर फेंककर तोड़ दिया। इस दौरान नेशनल हाईवे पर जाम की स्थिति बनी रही। इसके बाद महिलाएं सरकार विरोधी नारेबाजी करते हुए लघु सचिवालय पहुंचे और जमकर प्रदर्शन किया। प्रदर्शन करते हुए ग्रामीण लघु सचिवालय के मुख्य द्वार के समक्ष आकर नीचे बैठ गए और नारेबाजी करने लगे। इस दौरान कांग्रेसी नेता व पूर्व विधायक अर्जुन सिंह व अन्य नेता उनके समर्थन में नीचे बैठ गए और नारेबाजी करने लगे। काफी समय के बाद डीसी रोहताश सिंह खरब खुद कार्यालय से उठकर ग्रामीणों के पास पहुंचे और उनकी समस्या सुनी। ग्रामीणों ने डीसी को लिखित में शिकायत दी। डीसी ने उन्हें जल्द समस्या का समाधान होने का आश्वासन दिया। जिसके बाद ग्रामीण शांत हुए।
एक साल से 150 परिवारों को नहीं मिला पेयजल
सरपंच राजदुलारी, पूर्व सरपंच रिषी पाल, रामसिंह, उषा रानी, जोगिंद्रों, जरनैलों, दीपिका, मेहर चंद, परमजीत, अंग्रेजो, नीलम आदि ने बताया कि गांव में करीब 150 परिवार पेयजल की संकट से जुझ रहे है। एक साल से गांव का ट्यूबवेल खराब पड़ा है। जिसके चलते उसका कनेक्शन भी कटा हुआ है। नया ट्यूबवेल जनक का माजरा नाम से मंजूर है। सारा गांव पीने के पानी से बहुत परेशान है। ट्यूबवेल खराब होने से ग्रामीणों को पेयजल नहीं मिल पा रहा है।
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खेतों में लगे सिंचाई ट्यूबवेलों से लाते है पानी
ग्रामीणों ने बताया कि पीने के पानी के लिए वे खेतों में सिंचाई के लिए लगे जमींदारों के ट्यूबवेलों से पानी भरकर लाते है। जो गांव के काफी दूर और उबड़ खाबड़ रास्तों में है। इनका पानी भी शोरायुक्त होता है। पेयजल न मिलने से वे शोरायुक्त पानी पीने का मजबूर है। इससे कई बार ग्रामीणों को पेट संबंधित बीमारियां होती है।
शिकायतों के बाद भी समाधान नहीं
ग्रामीण गौरव, सुनीता, मायावती, गीता देवी, संगीता आदि ने बताया कि समस्या के समाधान के लिए उन्होंने संबंधित विभाग के जेई, एसडीओ, एक्सईएन को शिकायत दी। लेकिन समाधान नहीं हुआ। कुछ माह पूर्व डीसी को भी इस संबंध में शिकायत दी। लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। जिससे उनमें प्रशासन के प्रति भी रोष है।
पेयजल नहीं होगा तो मटकों का क्या करेंगे
लघु सचिवालय के गेट के समक्ष मटके तोड़ने के बाद ग्रामीणों ने कहा कि उन्हें पेयजल नहीं मिल रहा है। जब पीने का पानी ही नहीं होगा तो वे खाली मटकों का क्या करेंगे। पेयजल के बिना खाली मटके घर में अच्छे नहीं लगते। इसलिए उन्होंने खाली मटका तोड़ प्रदर्शन करने का निर्णय लिया।
पानी की निकासी के लिए नाला भी नहीं
पेयजल के साथ साथ ग्रामीणों ने पानी की निकासी की समस्या भी डीसी के समक्ष रखी। ग्रामीणों ने डीसी को बताया कि गांव में निकासी के लिए नाला भी टूटा पड़ा है। जो कि लाल डोरे के अंदर है। गंदे पानी की निकासी का कोई साधन नहीं है। गांव में गंदा पानी फैलने से लोग बार बार बीमार पड़ रहे है।
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भंभौली पंचायत के तहत आने वाले गांव जनक का माजरा की सैकड़ों लोग व महिलाएं सोमवार सुबह सिर पर मटके लेकर जगाधरी अनाजमंडी में कांग्रेसी नेता बृजपाल छप्पर व पिंकी छप्पर के नेतृत्व में एकत्रित हुए। सिर पर मटके उठाकर व हाथों में हमें पीने का पानी चाहिए का बैनर लेकर ग्रामीणों ने यहां सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किया। सरकार विरोधी नारेबाजी करते हुए सभी ग्रामीण अनाजमंडी से होते हुए अनाजमंडी गेट से होकर नेशनल हाईवे पर पहुंचे। नेशनल हाईवे से नारेबाजी करते हुए लघु सचिवालय के गेट पर आकर ग्रामीणों ने सिर पर रखे मटकों को सड़क पर फेंककर तोड़ दिया। इस दौरान नेशनल हाईवे पर जाम की स्थिति बनी रही। इसके बाद महिलाएं सरकार विरोधी नारेबाजी करते हुए लघु सचिवालय पहुंचे और जमकर प्रदर्शन किया। प्रदर्शन करते हुए ग्रामीण लघु सचिवालय के मुख्य द्वार के समक्ष आकर नीचे बैठ गए और नारेबाजी करने लगे। इस दौरान कांग्रेसी नेता व पूर्व विधायक अर्जुन सिंह व अन्य नेता उनके समर्थन में नीचे बैठ गए और नारेबाजी करने लगे। काफी समय के बाद डीसी रोहताश सिंह खरब खुद कार्यालय से उठकर ग्रामीणों के पास पहुंचे और उनकी समस्या सुनी। ग्रामीणों ने डीसी को लिखित में शिकायत दी। डीसी ने उन्हें जल्द समस्या का समाधान होने का आश्वासन दिया। जिसके बाद ग्रामीण शांत हुए।
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एक साल से 150 परिवारों को नहीं मिला पेयजल
सरपंच राजदुलारी, पूर्व सरपंच रिषी पाल, रामसिंह, उषा रानी, जोगिंद्रों, जरनैलों, दीपिका, मेहर चंद, परमजीत, अंग्रेजो, नीलम आदि ने बताया कि गांव में करीब 150 परिवार पेयजल की संकट से जुझ रहे है। एक साल से गांव का ट्यूबवेल खराब पड़ा है। जिसके चलते उसका कनेक्शन भी कटा हुआ है। नया ट्यूबवेल जनक का माजरा नाम से मंजूर है। सारा गांव पीने के पानी से बहुत परेशान है। ट्यूबवेल खराब होने से ग्रामीणों को पेयजल नहीं मिल पा रहा है।
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खेतों में लगे सिंचाई ट्यूबवेलों से लाते है पानी
ग्रामीणों ने बताया कि पीने के पानी के लिए वे खेतों में सिंचाई के लिए लगे जमींदारों के ट्यूबवेलों से पानी भरकर लाते है। जो गांव के काफी दूर और उबड़ खाबड़ रास्तों में है। इनका पानी भी शोरायुक्त होता है। पेयजल न मिलने से वे शोरायुक्त पानी पीने का मजबूर है। इससे कई बार ग्रामीणों को पेट संबंधित बीमारियां होती है।
शिकायतों के बाद भी समाधान नहीं
ग्रामीण गौरव, सुनीता, मायावती, गीता देवी, संगीता आदि ने बताया कि समस्या के समाधान के लिए उन्होंने संबंधित विभाग के जेई, एसडीओ, एक्सईएन को शिकायत दी। लेकिन समाधान नहीं हुआ। कुछ माह पूर्व डीसी को भी इस संबंध में शिकायत दी। लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। जिससे उनमें प्रशासन के प्रति भी रोष है।
पेयजल नहीं होगा तो मटकों का क्या करेंगे
लघु सचिवालय के गेट के समक्ष मटके तोड़ने के बाद ग्रामीणों ने कहा कि उन्हें पेयजल नहीं मिल रहा है। जब पीने का पानी ही नहीं होगा तो वे खाली मटकों का क्या करेंगे। पेयजल के बिना खाली मटके घर में अच्छे नहीं लगते। इसलिए उन्होंने खाली मटका तोड़ प्रदर्शन करने का निर्णय लिया।
पानी की निकासी के लिए नाला भी नहीं
पेयजल के साथ साथ ग्रामीणों ने पानी की निकासी की समस्या भी डीसी के समक्ष रखी। ग्रामीणों ने डीसी को बताया कि गांव में निकासी के लिए नाला भी टूटा पड़ा है। जो कि लाल डोरे के अंदर है। गंदे पानी की निकासी का कोई साधन नहीं है। गांव में गंदा पानी फैलने से लोग बार बार बीमार पड़ रहे है।