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हरकत में आया विभाग, फैक्ट्री मालिक को दिया नोटिस
ब्यूरो/अमर उजाला यमुनानगर
Updated Tue, 01 Dec 2015 11:39 PM IST
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रुकाली गांव में लगी टायर से तेल निकालने वाली फैक्ट्री के खिलाफ ग्रामीणों की एकजुटता के चलते प्रदूषण विभाग हरकत में आया। विभाग ने यहां मौके का मुआयना किया। मौका मुआयना के तहत प्रदूषण विभाग की टीम को यहां ढेरों खामियां मिली।
प्रदूषण विभाग ने फैक्ट्री मालिक को 15 दिन के अंदर-अंदर सभी खामियों को दूर करने का नोटिस थमाया है अन्यथा उक्त फैक्ट्री को बंद कर दिया जाएगा। मामला सुर्खियों में आने के बाद प्रशासन के गांव में पहुंच कर फैक्ट्री के खिलाफ कार्यवाही करने के आदेश से ग्रामीणों ने राहत की सांस ली है।
गौरतलब है कि पिछले दो साल पहले मलिकपुर बांगर व रुकाली गांव के बीच में नीलकंठ नामक एक फैक्ट्री लगाई गई थी। उस समय इस फैक्ट्री में गोदाम बनाने की बात कही गई थी। जैसे ही यह फैक्ट्री बन कर तैयार हुई और रातों रात फैक्ट्री मालिक ने पुराने टायरों के ढेर लगा दिए।
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देखते ही देखते यहां पर टायरों से तेल निकालने का काम शुरू कर दिया था। जैसे ही फैक्ट्री चली तो गांव में लोगों को फैक्ट्री से निकलने वाले जहरीले धुएं से परेशानी होनी शुरू हो गई। तब से लेकर आज तक ग्रामीण इस फैक्ट्री को बंद करने या प्रदूषण नियंत्रण के स्थाई इंतजाम करने की मांग करते आ रहे हैं।
ग्रामीणों की मेहनत लाई रंग
गांव के कर्ण सिंह, रणधीर सिंह, संजीव राठी, रामकरण, साहिल, रवि आदि का कहना है कि वह इस फैक्ट्री को बंद कराने या प्रदूषण नियंत्रण कराने को लेकर पिछले दो साल से संघर्ष करते आ रहे हैं। मामला मीडिया में आने के बाद प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की आंखें खुली और हरकत में आते ही विभाग की टीम गांव में पहुंच गई। विभाग की टीम ने ग्रामीणों के सभी आरोपों को सही पाया। उनका कहना है कि अगर प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड पहले ही उचित कार्रवाही करता तो इस क्षेत्र के दर्जनों गांवों के लोगों, पशुओं व फसलों को बीमारियों से न जूझना पड़ता। टायरों के जलने से निकलने वाले जहरीले कार्बन को यहां स्टोर करने का कोई स्थाई इंतजाम नहीं है। यहां से निकलने वाली काली राख व धुंआ फसलों के साथ-साथ आम जनजीवन को प्रभावित कर रहा है। हालात इतने बुरे हो गए हैं कि ग्रामीण खुली हवा में सांस भी नहीं ले सकते।
ये मिली खामियां
समाचार प्रकाशित होने के बाद प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की कुंभकर्णी नींद खुली। उसके बाद विभाग की टीम ने यहां आनन-फानन में यहां मौका मुआयना किया। विभाग के रीजनल अधिकारी संजीव बुद्धि राजा ने बताया कि क्षेत्र के एसडीओ विपिन कुमार ने अपनी टीम के साथ मलिकपुर बांगर में लगी नीलकंठ फैक्ट्री का दौरा किया। जहां टीम को फैक्ट्री में भारी खामियां मिली। उनका कहना है कि कार्बन को स्टोर करने के लिए स्थाई इंतजाम नहीं है। फैक्ट्री का एरिया नीचे से कच्चा है। चारदीवारी आज तक नहीं बनाई गई। इसके अलावा भी कई कमियां मिली। इन सभी कमियों को लेकर प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने नीलकंठ फैक्ट्री के मालिक को नोटिस थमाया है। जिसमें 15 दिन के भीतर सभी कमियों को पूरा करने की हिदायत दी गई है। उसके बाद फैक्ट्री के उपर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
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प्रदूषण विभाग ने फैक्ट्री मालिक को 15 दिन के अंदर-अंदर सभी खामियों को दूर करने का नोटिस थमाया है अन्यथा उक्त फैक्ट्री को बंद कर दिया जाएगा। मामला सुर्खियों में आने के बाद प्रशासन के गांव में पहुंच कर फैक्ट्री के खिलाफ कार्यवाही करने के आदेश से ग्रामीणों ने राहत की सांस ली है।
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गौरतलब है कि पिछले दो साल पहले मलिकपुर बांगर व रुकाली गांव के बीच में नीलकंठ नामक एक फैक्ट्री लगाई गई थी। उस समय इस फैक्ट्री में गोदाम बनाने की बात कही गई थी। जैसे ही यह फैक्ट्री बन कर तैयार हुई और रातों रात फैक्ट्री मालिक ने पुराने टायरों के ढेर लगा दिए।
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देखते ही देखते यहां पर टायरों से तेल निकालने का काम शुरू कर दिया था। जैसे ही फैक्ट्री चली तो गांव में लोगों को फैक्ट्री से निकलने वाले जहरीले धुएं से परेशानी होनी शुरू हो गई। तब से लेकर आज तक ग्रामीण इस फैक्ट्री को बंद करने या प्रदूषण नियंत्रण के स्थाई इंतजाम करने की मांग करते आ रहे हैं।
ग्रामीणों की मेहनत लाई रंग
गांव के कर्ण सिंह, रणधीर सिंह, संजीव राठी, रामकरण, साहिल, रवि आदि का कहना है कि वह इस फैक्ट्री को बंद कराने या प्रदूषण नियंत्रण कराने को लेकर पिछले दो साल से संघर्ष करते आ रहे हैं। मामला मीडिया में आने के बाद प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की आंखें खुली और हरकत में आते ही विभाग की टीम गांव में पहुंच गई। विभाग की टीम ने ग्रामीणों के सभी आरोपों को सही पाया। उनका कहना है कि अगर प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड पहले ही उचित कार्रवाही करता तो इस क्षेत्र के दर्जनों गांवों के लोगों, पशुओं व फसलों को बीमारियों से न जूझना पड़ता। टायरों के जलने से निकलने वाले जहरीले कार्बन को यहां स्टोर करने का कोई स्थाई इंतजाम नहीं है। यहां से निकलने वाली काली राख व धुंआ फसलों के साथ-साथ आम जनजीवन को प्रभावित कर रहा है। हालात इतने बुरे हो गए हैं कि ग्रामीण खुली हवा में सांस भी नहीं ले सकते।
ये मिली खामियां
समाचार प्रकाशित होने के बाद प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की कुंभकर्णी नींद खुली। उसके बाद विभाग की टीम ने यहां आनन-फानन में यहां मौका मुआयना किया। विभाग के रीजनल अधिकारी संजीव बुद्धि राजा ने बताया कि क्षेत्र के एसडीओ विपिन कुमार ने अपनी टीम के साथ मलिकपुर बांगर में लगी नीलकंठ फैक्ट्री का दौरा किया। जहां टीम को फैक्ट्री में भारी खामियां मिली। उनका कहना है कि कार्बन को स्टोर करने के लिए स्थाई इंतजाम नहीं है। फैक्ट्री का एरिया नीचे से कच्चा है। चारदीवारी आज तक नहीं बनाई गई। इसके अलावा भी कई कमियां मिली। इन सभी कमियों को लेकर प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने नीलकंठ फैक्ट्री के मालिक को नोटिस थमाया है। जिसमें 15 दिन के भीतर सभी कमियों को पूरा करने की हिदायत दी गई है। उसके बाद फैक्ट्री के उपर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।