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सतगुरु नानक परगटया, मिटी धुंध जग चानण होया...
amar ujala beuro yamunanagar
Updated Tue, 15 Nov 2016 12:44 AM IST
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- फोटो : gh
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गुरुद्वारा पेपर मिल में श्री गुरु नानक देव महाराज का प्रकाशोत्सव उत्साह व श्रद्धा के साथ मनाया गया। जिसमें बड़ी संख्या में संगत ने हाजिरी भरी।
सुबह सात बजे गुरुद्वारा साहिब में तीन दिन से आरंभ श्री अखंड पाठ साहिब की संपूर्णता पर भोग डाला गया। इसके बाद पेपर मिल ग्राउंड में दीवान सजाया गया। इसमें भाई जबरतोड़ सिंह हजूरी रागी श्री दरबार साहिब अमृतसर, भाई कुलविंदर सिंह हजूरी रागी श्री दरबार साहिब अमृतसर, भाई कश्मीर सिंह हजूरी रागी पावंटा साहिब, भाई भूपिंद्र सिंह हजूरी रागी पेपर मिल गुरुद्वारा, भाई अमरजीत सिंह हेड ग्रंथी गुरुद्वारा पेपर मिल, विरसा संभाल सेवा सासाइटी दे बच्चे व स्त्री सत्संग सभा गुरुद्वारा पेपर मिल द्वारा गुरु महाराज की शिक्षाओं का गुणगान किया गया।
रागी जत्थों ने सतगुरु नानक परगटया, मिटी धुंध जग चानण होया...शब्द कीर्तन राही गुरु नानकदेव जी महाराज के इस संसार में आकर मानवता की भलाई के लिए किए गए कार्यों का बखान किया। वहीं रात को गुरुद्वारा साहिब में कवि दरबार का आयोजन किया गया। गुुरुपर्व के उपलक्ष्य में गुरुद्वारा साहिब से प्रभात फेरियों शुरू की गई थी व शहर में नगर कीर्तन निकाला गया था।
गुरुद्वारा दसवीं पाताशाही में मनाया प्रकाशोत्सव, निकाला नगर कीर्तन
यमुनानगर। श्री गुरु नानक देव जी महाराज का प्रकाशोत्सव बड़ी श्रद्धा व प्रेम से गुरुद्वारा पाताशाही दसवीं हनुमान गेट में मनाया मनाया गया। तीन दिन पूर्व गुुुरुद्वारे के प्रांगण में श्री अखंड पाठ आरंभ किया गया था। सुबह श्री अखंड पाठ की संपूर्णता पर भोग डाला गया। जिसके बाद कीर्तन दरबार सजाया गया। इसमें कथा वाचक तथा रागी जत्थों ने गुरुओं की वाणी का गायन किया।
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गुरु नानक देव जी की शिक्षाओं का वर्णन किया। रागी जत्थों ने संगत को गुरु चरणों के साथ जोड़ा। शाम पांच बजे शहर में नगर कीर्तन निकाला गया। गुरु महाराज की पालकी विशेष आकर्षण रही। जिसमें गतका पार्टी के कलाकारों ने कला का प्रदर्शन किया। मौके पर करतार सिंह, मोहन सिंह, सविंद्र सिंह, सोहन सिंह, हरपाल सिंह व अमितपाल सिंह रिंपी सहित बड़ी संख्या में संगत मौजूद रहे। उधर, मिलट्री ग्राउंड में भी दीवान सजा, जिसमें रागी जत्थों ने शब्द गायन किया। इसमें कपालमोचन में आए श्रद्धालुओं ने माथा टेका व लंगर में प्रसाद ग्रहण किया।
विष्णु नगर गुरुद्वारा साहिब में सजा दीवान
जगाधरी वर्कशाप। गुरुद्वारा श्री सिंह सभा विष्णु नगर में गुरु नानक देव जी का प्रकाशोत्सव श्रद्धा व उत्साह के साथ मनाया गया। सुबह सबसे पहले श्री अखंड पाठ की संपूर्णता पर भोग डाला गया। इसके बाद गुरुद्वारा साहिब में दीवान सजाए गए, जिसमें रागी जत्थों व कथा वाचकों ने शब्द कीर्तन कर संगत को निहाल किया। साथ ही गुरु महाराज की शिक्षाओं का वर्णन किया। इस अवसर पर लंगर भी लगाया गया। कार्यक्रम में हजारों की संख्या में संगत ने भाग लिया। मौके पर गुरुद्वारा कमेटी के प्रधान अमरीक सिंह ने बताया कि प्रकाशोत्सव के उपलक्ष्य में प्रभात फेरियां व नगर कीर्तन का आयोजन भी किया गया।
उन्होंने बताया कि श्री गुरुनानक देव जी का जन्म रावी नदी के किनारे तलवंडी गांव में कार्तिक पूर्णिमा को खत्री कुल में हुआ था। तलवंडी का नाम आगे चलकर ननकाणा साहिब पड़ गया। बचपन से ही इनमें प्रखर बुद्धि के लक्षण दिखाई देने लगे थे। पडने लिखने में इनका मन नहीं लगा। छह सात वर्ष की आयु से ही स्कूल छूट गया। इनके प्रश्नों के आगे अध्यापक ने ही हार मान ली और वे इन्हें सम्मान के साथ घर छोड़ने आ गए। उसके बाद से ही यह सारा समय आध्यात्मिक चिंतन और सत्संग में व्यतीत करने लगे। बचपन के समय कई चमत्कारिक घटनाएं घटी जिसको देखकर गांव वाले इन्हें दिव्य व्यक्तित्व मानने लगे। विवाह के बाद इन्हें दो पुत्रों की प्राप्ति हुई। कुछ समय बाद यह मरदाना, लहना, बाला और रामदास इन चारों साथियों को साथ लेकर तीर्थ यात्रा पर निकल गए थे।
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सुबह सात बजे गुरुद्वारा साहिब में तीन दिन से आरंभ श्री अखंड पाठ साहिब की संपूर्णता पर भोग डाला गया। इसके बाद पेपर मिल ग्राउंड में दीवान सजाया गया। इसमें भाई जबरतोड़ सिंह हजूरी रागी श्री दरबार साहिब अमृतसर, भाई कुलविंदर सिंह हजूरी रागी श्री दरबार साहिब अमृतसर, भाई कश्मीर सिंह हजूरी रागी पावंटा साहिब, भाई भूपिंद्र सिंह हजूरी रागी पेपर मिल गुरुद्वारा, भाई अमरजीत सिंह हेड ग्रंथी गुरुद्वारा पेपर मिल, विरसा संभाल सेवा सासाइटी दे बच्चे व स्त्री सत्संग सभा गुरुद्वारा पेपर मिल द्वारा गुरु महाराज की शिक्षाओं का गुणगान किया गया।
रागी जत्थों ने सतगुरु नानक परगटया, मिटी धुंध जग चानण होया...शब्द कीर्तन राही गुरु नानकदेव जी महाराज के इस संसार में आकर मानवता की भलाई के लिए किए गए कार्यों का बखान किया। वहीं रात को गुरुद्वारा साहिब में कवि दरबार का आयोजन किया गया। गुुरुपर्व के उपलक्ष्य में गुरुद्वारा साहिब से प्रभात फेरियों शुरू की गई थी व शहर में नगर कीर्तन निकाला गया था।
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गुरुद्वारा दसवीं पाताशाही में मनाया प्रकाशोत्सव, निकाला नगर कीर्तन
यमुनानगर। श्री गुरु नानक देव जी महाराज का प्रकाशोत्सव बड़ी श्रद्धा व प्रेम से गुरुद्वारा पाताशाही दसवीं हनुमान गेट में मनाया मनाया गया। तीन दिन पूर्व गुुुरुद्वारे के प्रांगण में श्री अखंड पाठ आरंभ किया गया था। सुबह श्री अखंड पाठ की संपूर्णता पर भोग डाला गया। जिसके बाद कीर्तन दरबार सजाया गया। इसमें कथा वाचक तथा रागी जत्थों ने गुरुओं की वाणी का गायन किया।
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गुरु नानक देव जी की शिक्षाओं का वर्णन किया। रागी जत्थों ने संगत को गुरु चरणों के साथ जोड़ा। शाम पांच बजे शहर में नगर कीर्तन निकाला गया। गुरु महाराज की पालकी विशेष आकर्षण रही। जिसमें गतका पार्टी के कलाकारों ने कला का प्रदर्शन किया। मौके पर करतार सिंह, मोहन सिंह, सविंद्र सिंह, सोहन सिंह, हरपाल सिंह व अमितपाल सिंह रिंपी सहित बड़ी संख्या में संगत मौजूद रहे। उधर, मिलट्री ग्राउंड में भी दीवान सजा, जिसमें रागी जत्थों ने शब्द गायन किया। इसमें कपालमोचन में आए श्रद्धालुओं ने माथा टेका व लंगर में प्रसाद ग्रहण किया।
विष्णु नगर गुरुद्वारा साहिब में सजा दीवान
जगाधरी वर्कशाप। गुरुद्वारा श्री सिंह सभा विष्णु नगर में गुरु नानक देव जी का प्रकाशोत्सव श्रद्धा व उत्साह के साथ मनाया गया। सुबह सबसे पहले श्री अखंड पाठ की संपूर्णता पर भोग डाला गया। इसके बाद गुरुद्वारा साहिब में दीवान सजाए गए, जिसमें रागी जत्थों व कथा वाचकों ने शब्द कीर्तन कर संगत को निहाल किया। साथ ही गुरु महाराज की शिक्षाओं का वर्णन किया। इस अवसर पर लंगर भी लगाया गया। कार्यक्रम में हजारों की संख्या में संगत ने भाग लिया। मौके पर गुरुद्वारा कमेटी के प्रधान अमरीक सिंह ने बताया कि प्रकाशोत्सव के उपलक्ष्य में प्रभात फेरियां व नगर कीर्तन का आयोजन भी किया गया।
उन्होंने बताया कि श्री गुरुनानक देव जी का जन्म रावी नदी के किनारे तलवंडी गांव में कार्तिक पूर्णिमा को खत्री कुल में हुआ था। तलवंडी का नाम आगे चलकर ननकाणा साहिब पड़ गया। बचपन से ही इनमें प्रखर बुद्धि के लक्षण दिखाई देने लगे थे। पडने लिखने में इनका मन नहीं लगा। छह सात वर्ष की आयु से ही स्कूल छूट गया। इनके प्रश्नों के आगे अध्यापक ने ही हार मान ली और वे इन्हें सम्मान के साथ घर छोड़ने आ गए। उसके बाद से ही यह सारा समय आध्यात्मिक चिंतन और सत्संग में व्यतीत करने लगे। बचपन के समय कई चमत्कारिक घटनाएं घटी जिसको देखकर गांव वाले इन्हें दिव्य व्यक्तित्व मानने लगे। विवाह के बाद इन्हें दो पुत्रों की प्राप्ति हुई। कुछ समय बाद यह मरदाना, लहना, बाला और रामदास इन चारों साथियों को साथ लेकर तीर्थ यात्रा पर निकल गए थे।