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नौकरी के लिए जोखिम में जान, प्रशासन जानकर भी अंजान
amar ujala beuro panipat
Updated Sun, 04 Dec 2016 11:57 PM IST
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- फोटो : c
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एचएसएससी द्वारा क्लर्क की नौकरी हेतु ली गई लिखित परीक्षा से पहले और बाद में परीक्षार्थी जान जोखिम में डाल रहे हैं। बसों की कमी में वह बसों पर लटक व छतों पर बैठ कर सफर करने पर मजबूर हैं। ठीक यही नजारा रविवार को जिले में बने केंद्रों पर हुई क्लर्क पद की परीक्षा से पहले और बाद में देखने को मिला, जो कभी भी बड़े हादसे की वजह बन सकता है। यही हालात बीते दो रविवार को भी बने थे। सब कुछ जगजाहिर होने के बावजूद प्रशासन अंजान बना हुआ है।
रविवार परीक्षा संपन्न होने पर दोपहर व शाम में यमुनानगर व जगाधरी बस स्टैंड पर हजारों परीक्षार्थियों की भीड़ जुटी और बसों में चढ़ने के लिए धक्का-मुक्की की स्थिति बन गई। बसों में चढ़ने को लेकर सबसे अधिक परेशानी महिला परिक्षार्थियों को हुई। कइयों को मजबूरन घर लौटने के लिए निजी वाहनों व अन्य साधन का सहारा लेना पड़ा वहीं, कई परीक्षार्थी जान जोखिम में डाल चलती बसों के दरवाजों पर पायदान व पीछे सीढिय़ों पर लटक गए और कुछ बसों की छतों पर बैठे दिखे। यह लापरवाही हादसे की वजह बन सकती है, किंतु विभाग इस दिशा में कुछ करता नहीं दिख रहा है। ऐसे में यदि कोई हादसा हो, तो कौन जिम्मेदार होगा।
दो सत्र में हुई परीक्षा
जिले में बने परीक्षा केंद्रों पर रविवार को एचएसएससी द्वारा क्लर्क पद की लिखित परीक्षा ली गई, जोकि दो सत्रों सुबह 10:30 से दोपहर 12 बजे और शाम तीन से 4:30 बजे तक परीक्षा तक हुई। इसमें प्रदेश भर से हजारों से अधिक परीक्षार्थियों ने हिस्सा लिया। कुछ परीक्षार्थी शनिवार देर शाम को ही आ गए और अपने परीक्षा केंद्रों के आसपास धर्मशाला व होटल आदि में रात बीताई। जबकि रविवार को प्रदेश भर के हजारों परीक्षार्थी रोडवेज बसों से यमुनानगर पहुंचे, जिस कारण कम बसों और भीड़ के बीच उन्हें दिक्कतों से दो-चार होना पड़ा।
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दोपहर 12 बजे पहले व शाम 4:30 बजे दूसरे सत्र की परीक्षा संपन्न होने पर यमुनानगर व जगाधरी बस स्टैंड पर परीक्षार्थियों भारी भीड़ उमड़ पड़ी। यमुनानगर डिपो पर करीब 160 बसें हैं, जो कि परीक्षार्थियों व अन्य यात्रियों के आगे कम साबित हुई। एक के बाद एक अलग-अलग रूट की बस के आते ही उसमें चढ़ने को लेकर धक्का-मुक्की की स्थिति बन गई। देर शाम तक भी बस स्टैंड पर कई परीक्षार्थी बसों में आसानी चढ़ने को लेकर इंतजार करते रहे वहीं, कुछ परीक्षार्थियों ने निजी वाहनों व अन्य साधन का सहारा लिया।
अपने-अपने जिले में बने सेंटर
संजना, निशा, व सरोज ने कहा कि सरकार को चाहिए कि परीक्षार्थियों के परीक्षा केंद्र उनके जिले में ही बनाए जाएं, ताकि वह आसानी से आ-जा सकें और परीक्षा सही प्रकार से हो। चूंकि बसों में आते वक्त भीड़ के चलते उनमें चढ़नेे को लेकर दिक्कत हुई और यही दिक्कत जाने के वक्त हो रही है। इन्हीं दिक्कतों के बीच परीक्षा केंद्रों तक पहुंचने में तनाव की स्थिति बन जाती है और परीक्षा बेहतर ढंग से नहीं हो पाती है।
केंद्र के बाहर उतरवाए कंगन, टॉप्स, बाली, क्लीप और बेल्ट
परीक्षार्थियों के परीक्षा केंद्र में प्रवेश से पहले उनकी कड़ी तलाशी ली गई। मेटल डिटेक्टर के जरिए सभी की जांच की गई वहीं, केंद्र में प्रवेश के लिए उन्हें केवल परिचय पत्र व रोल नंबर स्लिप ही साथ ले जाने दी गई। जबकि महिला परीक्षार्थियों के कंगन, बाली, अंगुठी, कड़ा, जूड़ा पिंन व पुरुष परीक्षार्थियों के बेल्ट आदि बाहर की उतार लिए गए।
वहीं, नकल रोकने के लिए सभी केंद्रों पर जैमर लगाए गए थे और प्रशासन की ओर से धारा-144 के तहत परीक्षा केंद्र के 200 मीटर की परिधि में सभी फोटोस्टेट की दुकाने बंद रखी गईं। इसके साथ ही प्रशासनिक अधिकारी परीक्षा के दौरान केंद्रों का निरीक्षण करते रहे।
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रविवार परीक्षा संपन्न होने पर दोपहर व शाम में यमुनानगर व जगाधरी बस स्टैंड पर हजारों परीक्षार्थियों की भीड़ जुटी और बसों में चढ़ने के लिए धक्का-मुक्की की स्थिति बन गई। बसों में चढ़ने को लेकर सबसे अधिक परेशानी महिला परिक्षार्थियों को हुई। कइयों को मजबूरन घर लौटने के लिए निजी वाहनों व अन्य साधन का सहारा लेना पड़ा वहीं, कई परीक्षार्थी जान जोखिम में डाल चलती बसों के दरवाजों पर पायदान व पीछे सीढिय़ों पर लटक गए और कुछ बसों की छतों पर बैठे दिखे। यह लापरवाही हादसे की वजह बन सकती है, किंतु विभाग इस दिशा में कुछ करता नहीं दिख रहा है। ऐसे में यदि कोई हादसा हो, तो कौन जिम्मेदार होगा।
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दो सत्र में हुई परीक्षा
जिले में बने परीक्षा केंद्रों पर रविवार को एचएसएससी द्वारा क्लर्क पद की लिखित परीक्षा ली गई, जोकि दो सत्रों सुबह 10:30 से दोपहर 12 बजे और शाम तीन से 4:30 बजे तक परीक्षा तक हुई। इसमें प्रदेश भर से हजारों से अधिक परीक्षार्थियों ने हिस्सा लिया। कुछ परीक्षार्थी शनिवार देर शाम को ही आ गए और अपने परीक्षा केंद्रों के आसपास धर्मशाला व होटल आदि में रात बीताई। जबकि रविवार को प्रदेश भर के हजारों परीक्षार्थी रोडवेज बसों से यमुनानगर पहुंचे, जिस कारण कम बसों और भीड़ के बीच उन्हें दिक्कतों से दो-चार होना पड़ा।
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दोपहर 12 बजे पहले व शाम 4:30 बजे दूसरे सत्र की परीक्षा संपन्न होने पर यमुनानगर व जगाधरी बस स्टैंड पर परीक्षार्थियों भारी भीड़ उमड़ पड़ी। यमुनानगर डिपो पर करीब 160 बसें हैं, जो कि परीक्षार्थियों व अन्य यात्रियों के आगे कम साबित हुई। एक के बाद एक अलग-अलग रूट की बस के आते ही उसमें चढ़ने को लेकर धक्का-मुक्की की स्थिति बन गई। देर शाम तक भी बस स्टैंड पर कई परीक्षार्थी बसों में आसानी चढ़ने को लेकर इंतजार करते रहे वहीं, कुछ परीक्षार्थियों ने निजी वाहनों व अन्य साधन का सहारा लिया।
अपने-अपने जिले में बने सेंटर
संजना, निशा, व सरोज ने कहा कि सरकार को चाहिए कि परीक्षार्थियों के परीक्षा केंद्र उनके जिले में ही बनाए जाएं, ताकि वह आसानी से आ-जा सकें और परीक्षा सही प्रकार से हो। चूंकि बसों में आते वक्त भीड़ के चलते उनमें चढ़नेे को लेकर दिक्कत हुई और यही दिक्कत जाने के वक्त हो रही है। इन्हीं दिक्कतों के बीच परीक्षा केंद्रों तक पहुंचने में तनाव की स्थिति बन जाती है और परीक्षा बेहतर ढंग से नहीं हो पाती है।
केंद्र के बाहर उतरवाए कंगन, टॉप्स, बाली, क्लीप और बेल्ट
परीक्षार्थियों के परीक्षा केंद्र में प्रवेश से पहले उनकी कड़ी तलाशी ली गई। मेटल डिटेक्टर के जरिए सभी की जांच की गई वहीं, केंद्र में प्रवेश के लिए उन्हें केवल परिचय पत्र व रोल नंबर स्लिप ही साथ ले जाने दी गई। जबकि महिला परीक्षार्थियों के कंगन, बाली, अंगुठी, कड़ा, जूड़ा पिंन व पुरुष परीक्षार्थियों के बेल्ट आदि बाहर की उतार लिए गए।
वहीं, नकल रोकने के लिए सभी केंद्रों पर जैमर लगाए गए थे और प्रशासन की ओर से धारा-144 के तहत परीक्षा केंद्र के 200 मीटर की परिधि में सभी फोटोस्टेट की दुकाने बंद रखी गईं। इसके साथ ही प्रशासनिक अधिकारी परीक्षा के दौरान केंद्रों का निरीक्षण करते रहे।