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पेंशन धारकों के लिए नोटबंदी बनी टेंशन
amar ujala beuro yamunanagar
Updated Sat, 19 Nov 2016 12:00 AM IST
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- फोटो : c
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नोट बंदी के चलते बैंकों में बनी नोटों की किल्लत का असर सामाजिक सुरक्षा पेंशन पर पड़ने लगा है। इस महीने पेंशन धारकों को पूरी पेंशन नहीं मिल रही है। वहीं कुछ को बैंकों से बिना पेंशन लिए लौटना पड़ रहा है। पेंशन धारकों को चिंता सता रही है कि वे अपनी दवा व अन्य खर्चे कहां से करेंगे।
हर महीने के दूसरे या तीसरे सप्ताह में बैंकों के माध्यम से पेंशन धारकों को सामाजिक सुरक्षा पेंशन का भुगतान किया जाता है। गत आठ नवंबर को 500 व एक हजार रुपये के नोट बंद किए जाने के बाद से बैंकों मेें पुराने नोट जमा किए जा रहे हैं। वहीं पुराने नोट के बदले चलन वाली करेंसी दी जा रही है। इस कारण बैंकों में करेंसी की जबरदस्त किल्लत बनी हुई है। सूरते-हाल यह है कि बैंक पेंशनधारकों की पेंशन में कटौती करने को मजबूर हो रहे हैं। शुक्रवार को अमर उजाला ने पेंशन धारकों की दिक्कतों का जायजा लिया।
पुराना हमीदा निवासी 80 वर्षीय मंजूर हसन सुबह 10 बजे पंजाब नेशनल बैंक, कैंप में बुढापा पेंशन लेने आए थे। बैंक में भीड़ होने के कारण उनका करीब 12 बजे नंबर आया तो बैंक कर्मचारी ने उन्हें एक हजार रुपये थमा दिए। चार सौ रुपये कम मिलने पर उन्होंने कर्मचारी से पूछा तो उसने कहा कि बकाया पेंशन अगले महीने मिल जाएगी। एक हजार रुपये लेकर मंजूर हसन यह सोच विचार में लगे रहे कि इस महीने अपना खर्च कैसे चलाएंगे।
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वीना नगर निवासी बलबीर कौर विधवा है। वह भी पंजाब नेशनल बैंक से विधवा पेंशन लेने आई थी। बैंकों में रोज लग रही लंबी लाइनों के कारण वह सुबह आठ बजे बैंक आई थी। करीब एक बजे उसका नंबर आया तो कर्मचारी ने उन्हें पेंशन के एक हजार रुपये दिए। बलबीर कौर के घर में कोई कमाने वाला नहीं है। वह अपना गुजारा पेंशन से ही करती है। हर महीने 300-400 रुपये उसकी दवा का खर्च है। पेंशन कम मिलने से उसके लिए भी अपना खर्चा चलाना मुश्किल हो जाएगा।
बाईपाल पुल के नजदीक रहने वाली सहोती देवी 80 साल की है। वह अपनी लड़की के पास रहती। विधवा पेंशन से ही उसका खर्च चलता है। शरीर से काफी दुर्बल सहोती देवी पेंशन के लिए बैंक में करीब चार घंटे लाइन में लगी रही। उसे भी एक हजार रुपये मिले। सहोती देवी की दवा पर हर महीने करीब 600 रुपये खर्च होते है। पेंशन के चार सौ रुपये कम मिलने से उसे भी दिक्कतों का सामना करना पड़ेगा।
जम्मू कालोनी निवासी दर्शन लाल व उनकी नेत्रहीन पत्नी के घर का खर्च दोनों को मिलने वाली पेंशन से चलता है। ये दोनों सुबह ही बैंक आ गए थे। करीब तीन बजे तक लाइन में लगने के बाद उनका नंबर आने से पहले ही बैंक में करेंसी खत्म हो गई। बैंक कर्मचारी ने उन्हें शनिवार को बैंक आने को कहा है। दर्शनलाल ने बताया कि रिक्शे वाले को 40 रुपये देकर वे बैंक तक पहुंचे थे। शनिवार को भी पेंशन मिलेगी या नहीं, ये पक्का नहीं है। बैंक आने के लिए उन्हें फिर रिक्शे पर आना पड़ेगा।
कैंप निवासी सुरजीत कौर चलने-फिरने में असमर्थ है। बुढ़ापा पेंशन लेन के लिए वह अपने नाती के साथ मोटरसाइकिल पर सुबह नौ बजे बैंक आई थी। लेकिन भीड़ अधिक होने के कारण वह वापस लौट आ गई। दोपहर में दोबारा आकर बैंक कर्मचारी से पेंशन के बारे में पूछा तो पता चला किया कि पैसे खत्म हो गए है। कर्मचारी ने उन्हें भी शनिवार को पेंशन के लिए बुलाया है।
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हर महीने के दूसरे या तीसरे सप्ताह में बैंकों के माध्यम से पेंशन धारकों को सामाजिक सुरक्षा पेंशन का भुगतान किया जाता है। गत आठ नवंबर को 500 व एक हजार रुपये के नोट बंद किए जाने के बाद से बैंकों मेें पुराने नोट जमा किए जा रहे हैं। वहीं पुराने नोट के बदले चलन वाली करेंसी दी जा रही है। इस कारण बैंकों में करेंसी की जबरदस्त किल्लत बनी हुई है। सूरते-हाल यह है कि बैंक पेंशनधारकों की पेंशन में कटौती करने को मजबूर हो रहे हैं। शुक्रवार को अमर उजाला ने पेंशन धारकों की दिक्कतों का जायजा लिया।
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पुराना हमीदा निवासी 80 वर्षीय मंजूर हसन सुबह 10 बजे पंजाब नेशनल बैंक, कैंप में बुढापा पेंशन लेने आए थे। बैंक में भीड़ होने के कारण उनका करीब 12 बजे नंबर आया तो बैंक कर्मचारी ने उन्हें एक हजार रुपये थमा दिए। चार सौ रुपये कम मिलने पर उन्होंने कर्मचारी से पूछा तो उसने कहा कि बकाया पेंशन अगले महीने मिल जाएगी। एक हजार रुपये लेकर मंजूर हसन यह सोच विचार में लगे रहे कि इस महीने अपना खर्च कैसे चलाएंगे।
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वीना नगर निवासी बलबीर कौर विधवा है। वह भी पंजाब नेशनल बैंक से विधवा पेंशन लेने आई थी। बैंकों में रोज लग रही लंबी लाइनों के कारण वह सुबह आठ बजे बैंक आई थी। करीब एक बजे उसका नंबर आया तो कर्मचारी ने उन्हें पेंशन के एक हजार रुपये दिए। बलबीर कौर के घर में कोई कमाने वाला नहीं है। वह अपना गुजारा पेंशन से ही करती है। हर महीने 300-400 रुपये उसकी दवा का खर्च है। पेंशन कम मिलने से उसके लिए भी अपना खर्चा चलाना मुश्किल हो जाएगा।
बाईपाल पुल के नजदीक रहने वाली सहोती देवी 80 साल की है। वह अपनी लड़की के पास रहती। विधवा पेंशन से ही उसका खर्च चलता है। शरीर से काफी दुर्बल सहोती देवी पेंशन के लिए बैंक में करीब चार घंटे लाइन में लगी रही। उसे भी एक हजार रुपये मिले। सहोती देवी की दवा पर हर महीने करीब 600 रुपये खर्च होते है। पेंशन के चार सौ रुपये कम मिलने से उसे भी दिक्कतों का सामना करना पड़ेगा।
जम्मू कालोनी निवासी दर्शन लाल व उनकी नेत्रहीन पत्नी के घर का खर्च दोनों को मिलने वाली पेंशन से चलता है। ये दोनों सुबह ही बैंक आ गए थे। करीब तीन बजे तक लाइन में लगने के बाद उनका नंबर आने से पहले ही बैंक में करेंसी खत्म हो गई। बैंक कर्मचारी ने उन्हें शनिवार को बैंक आने को कहा है। दर्शनलाल ने बताया कि रिक्शे वाले को 40 रुपये देकर वे बैंक तक पहुंचे थे। शनिवार को भी पेंशन मिलेगी या नहीं, ये पक्का नहीं है। बैंक आने के लिए उन्हें फिर रिक्शे पर आना पड़ेगा।
कैंप निवासी सुरजीत कौर चलने-फिरने में असमर्थ है। बुढ़ापा पेंशन लेन के लिए वह अपने नाती के साथ मोटरसाइकिल पर सुबह नौ बजे बैंक आई थी। लेकिन भीड़ अधिक होने के कारण वह वापस लौट आ गई। दोपहर में दोबारा आकर बैंक कर्मचारी से पेंशन के बारे में पूछा तो पता चला किया कि पैसे खत्म हो गए है। कर्मचारी ने उन्हें भी शनिवार को पेंशन के लिए बुलाया है।