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Yamuna Nagar News: कागजों में मृत महिला तीन साल के बाद जिंदा घोषित
Sat, 17 May 2025 11:54 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
Updated Sat, 17 May 2025 11:54 PM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
यमुनानगर। तीन साल से अपने आप को दस्तावेजों में जिंदा साबित करने के लिए दर-दर की ठोकरें खा रही दयालगढ़ निवासी समीना का आखिरकार जिंदा हो ही गई। महिला को मृत साबित करने के लिए जहां उसके पति ने पांच दिन में उसका मृत्यु प्रमाणपत्र बनवा कर परिवार पहचान पत्र से नाम कटवा दिया था। उसे दस्तावेजों में जिंदा होने के लिए तीन साल लग गए।
मामला डीसी पार्थ गुप्ता के संज्ञान में आया। इसके बाद उन्होंने मामले की जांच एडीसी कार्यालय के नागरिक संसाधन सूचना विभाग के अधिकारियों को दी। अधिकारियों ने समीना के निवास स्थान पर जाकर विस्तृत जांच की तो ज्ञात हुआ कि परिवार पहचान पत्र में मृत दिखाई गई महिला जीवित है। इसके बाद उसका नाम दोबारा परिवार पहचान पत्र में जोड़ा गया।
बूड़िया क्षेत्र के दयालगढ़ में किराये के मकान में रहने वाली समीना का निकाह करनाल जिले के सोतजांबा गांव निवासी लियाकत के साथ हुआ था। इस निकाह के बाद समीना के पास 19 वर्षीय बेटी मुस्कान, 15 वर्षीय तरन्नुम व 13 वर्षीय बेटा जावेद है। लियाकत ने 2016 में समीना को तीन तलाक देकर दूसरा निकाह कर लिया था।
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समीना ने बताया कि तलाक के बाद उसके पति व ससुर ने कुछ लोगों से मिलीभगत करके साल 2023 में सहारनपुर के सरसावा से उसका मृत्यु प्रमाण पत्र बनवा लिया और उसका नाम परिवार पहचान पत्र से कटवा दिया ताकि उसे सरकारी डिपो से राशन न मिल सके। जब वह बेटी तरन्नुम का 2024 में आठवीं कक्षा का स्कूल दाखिला कराने के लिए बैंक में खाता खुलवाने गई तो बैंक अधिकारी ने कागजात मांगे।
दस्तावेजों की ऑनलाइन जांच की तो उसे परिवार परिवार पत्र में मृत घोषित होने का पता चला। वहीं उसे पता चला कि उसके नाम को मृत्यु प्रमाण पत्र भी बना हुआ है। तब से वह परिवार पहचान पत्र में खुद को जिंदा साबित करने के लिए कार्यालयों में चक्कर काट रही थी।
समीना ने बताया कि उसे डिपो से पांच किलो गेहूं मिलती थी। लेकिन, पति ने तीन तलाक देकर उसके मुंह से रोटी का निवाला भी छीन लिया। परिवार पहचान पत्र से नाम कटने से उसे डिपो से पांच किलो गेहूं, चीनी, तेल मिलना भी बंद हो गया। डिपो समेत सरकार द्वारा मिलने वाली अन्य सुविधाएं भी मिलनी बंद हो गई। अधिकारियों के सामने जिंदा खड़ी होकर भी उसे खुद को जिंदा साबित करने के प्रमाण दिखाने के लिए कहा जा रहा था। उसने इसकी शिकायत बूड़िया थाना पुलिस को भी दी। थाना प्रभारी नर सिंह ने भी मामले की जांच कर उचित कार्रवाई करने का आश्वासन दिया था।
परिवार पहचान पत्र में महिला को मृत घोषित करने का एक विचित्र मामला संज्ञान में आया था। परिवार पहचान पत्र में मृत दिखाई गई महिला मौके पर जीवित मिली। इसके बाद उसके परिवार पहचान पत्र में उसका नाम जोड़ दिया गया है। फर्जी दस्तावेज व फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र बनाने वालों को भी बख्शा नहीं जाएगा। - पार्थ गुप्ता, उपायुक्त।
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यमुनानगर। तीन साल से अपने आप को दस्तावेजों में जिंदा साबित करने के लिए दर-दर की ठोकरें खा रही दयालगढ़ निवासी समीना का आखिरकार जिंदा हो ही गई। महिला को मृत साबित करने के लिए जहां उसके पति ने पांच दिन में उसका मृत्यु प्रमाणपत्र बनवा कर परिवार पहचान पत्र से नाम कटवा दिया था। उसे दस्तावेजों में जिंदा होने के लिए तीन साल लग गए।
मामला डीसी पार्थ गुप्ता के संज्ञान में आया। इसके बाद उन्होंने मामले की जांच एडीसी कार्यालय के नागरिक संसाधन सूचना विभाग के अधिकारियों को दी। अधिकारियों ने समीना के निवास स्थान पर जाकर विस्तृत जांच की तो ज्ञात हुआ कि परिवार पहचान पत्र में मृत दिखाई गई महिला जीवित है। इसके बाद उसका नाम दोबारा परिवार पहचान पत्र में जोड़ा गया।
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बूड़िया क्षेत्र के दयालगढ़ में किराये के मकान में रहने वाली समीना का निकाह करनाल जिले के सोतजांबा गांव निवासी लियाकत के साथ हुआ था। इस निकाह के बाद समीना के पास 19 वर्षीय बेटी मुस्कान, 15 वर्षीय तरन्नुम व 13 वर्षीय बेटा जावेद है। लियाकत ने 2016 में समीना को तीन तलाक देकर दूसरा निकाह कर लिया था।
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समीना ने बताया कि तलाक के बाद उसके पति व ससुर ने कुछ लोगों से मिलीभगत करके साल 2023 में सहारनपुर के सरसावा से उसका मृत्यु प्रमाण पत्र बनवा लिया और उसका नाम परिवार पहचान पत्र से कटवा दिया ताकि उसे सरकारी डिपो से राशन न मिल सके। जब वह बेटी तरन्नुम का 2024 में आठवीं कक्षा का स्कूल दाखिला कराने के लिए बैंक में खाता खुलवाने गई तो बैंक अधिकारी ने कागजात मांगे।
दस्तावेजों की ऑनलाइन जांच की तो उसे परिवार परिवार पत्र में मृत घोषित होने का पता चला। वहीं उसे पता चला कि उसके नाम को मृत्यु प्रमाण पत्र भी बना हुआ है। तब से वह परिवार पहचान पत्र में खुद को जिंदा साबित करने के लिए कार्यालयों में चक्कर काट रही थी।
समीना ने बताया कि उसे डिपो से पांच किलो गेहूं मिलती थी। लेकिन, पति ने तीन तलाक देकर उसके मुंह से रोटी का निवाला भी छीन लिया। परिवार पहचान पत्र से नाम कटने से उसे डिपो से पांच किलो गेहूं, चीनी, तेल मिलना भी बंद हो गया। डिपो समेत सरकार द्वारा मिलने वाली अन्य सुविधाएं भी मिलनी बंद हो गई। अधिकारियों के सामने जिंदा खड़ी होकर भी उसे खुद को जिंदा साबित करने के प्रमाण दिखाने के लिए कहा जा रहा था। उसने इसकी शिकायत बूड़िया थाना पुलिस को भी दी। थाना प्रभारी नर सिंह ने भी मामले की जांच कर उचित कार्रवाई करने का आश्वासन दिया था।
परिवार पहचान पत्र में महिला को मृत घोषित करने का एक विचित्र मामला संज्ञान में आया था। परिवार पहचान पत्र में मृत दिखाई गई महिला मौके पर जीवित मिली। इसके बाद उसके परिवार पहचान पत्र में उसका नाम जोड़ दिया गया है। फर्जी दस्तावेज व फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र बनाने वालों को भी बख्शा नहीं जाएगा। - पार्थ गुप्ता, उपायुक्त।